RANCHI : झारखंड में कथित ट्रेजरी घोटाले को लेकर सियासत तेज हो गई है. प्रतुल शाह देव ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 20 दिनों से सरकार, समितियों, CID और SIT जांच के नाम पर इस बड़े घोटाले को दबाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर से साफ जवाब मांगा कि खजाने से गायब ₹10,000 करोड़ आखिर कहां गए और क्या यह रकम ट्रेजरी घोटाले से जुड़ी है. प्रतुल शाहदेव ने आरोप लगाया कि सरकार “समिति पर समिति” और “SIT पर SIT” बनाकर असली दोषियों को बचाने का प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि वित्त विभाग के उप सचिव ज्योति झा के नेतृत्व में बनी प्रारंभिक जांच समिति ने बोकारो में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा किया था. लेकिन उस रिपोर्ट को दबा दिया गया. बाद में 17 अप्रैल को उत्पाद सचिव के नेतृत्व में दूसरी समिति बनाकर मामले को लटकाने की कोशिश की गई.

उन्होंने कहा कि हालिया खुलासे में बोकारो में एसपी के नाम पर 16 करोड़ रुपये निकाले जाने की बात सामने आई है. जो बेहद गंभीर है. साथ ही पुरानी समिति को SIT में विलय कर देना भी संदेह को और गहरा करता है. ताकि अलग से रिपोर्ट सामने न आ सके. प्रतुल शाहदेव ने CID की भूमिका पर भी सवाल उठाए. उनका कहना है कि CID ने खुद जांच करने के बजाय झारखंड पुलिस के आईजी (मानवाधिकार) के नेतृत्व में SIT बना दी. जिससे जांच की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने पूछा कि जब CID के पास अधिकार था. तो उसने सीधे जांच क्यों नहीं की. साथ ही SIT के लिए कोई समय सीमा तय नहीं करना भी संदेहास्पद है.
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बोकारो कनेक्शन पर भी सवाल
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उन्होंने आरोप लगाया कि बोकारो के एसपी का अचानक तबादला और CID जांच में देरी इस बात का संकेत है कि सरकार मामले को भटकाने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि एक हफ्ते तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. और जब मामला मीडिया में उछला. तब दिखावटी कदम उठाए गए. अंत में. प्रतुल शाहदेव ने मांग की कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों जैसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय को सौंपी जाए. ताकि सच्चाई सामने आ सके. और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो. इस प्रेस वार्ता में प्रदेश सह मीडिया प्रभारी अशोक बड़ाइक भी मौजूद रहे.
