RANCHI : झारखंड हाईकोर्ट ने पुलिस विभाग में बिना ठोस आधार के किए गए तबादलों पर सख्त टिप्पणी करते हुए बड़ा आदेश जारी किया है. अदालत ने धनबाद जिला बल से स्थानांतरित 54 पुलिसकर्मियों के ट्रांसफर को अवैध ठहराते हुए उसे रद्द कर दिया.
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने स्पष्ट कहा कि ‘प्रशासनिक दृष्टिकोण’ का हवाला देना पर्याप्त नहीं है, जब तक कि उसके पीछे स्पष्ट कारण और प्रक्रिया का पालन न हो. कोर्ट ने माना कि संबंधित आदेश में पारदर्शिता और वैधता दोनों की कमी थी.
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बिना ठोस कारण किए गए तबादले पर कोर्ट सख्त, 54 पुलिसकर्मियों की वापसी का आदेश
यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब धनबाद से 54 पुलिसकर्मियों को अलग-अलग जिलों में भेज दिया गया. आदेश में कारण के रूप में सिर्फ प्रशासनिक आवश्यकता का उल्लेख था, जिसे प्रभावित कर्मियों ने चुनौती दी. उनका कहना था कि तय नियमों को दरकिनार कर यह फैसला लिया गया.
मामले की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से तबादले का कोई ठोस औचित्य पेश नहीं किया जा सका। इस पर अदालत ने 24 फरवरी 2025 को जारी पुलिस मुख्यालय के आदेश (ज्ञापांक 238/पी) को निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी प्रभावित पुलिसकर्मियों को वापस धनबाद जिला बल में पदस्थापित किया जाए और उनकी सेवा स्थिति पहले जैसी बहाल की जाए.
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इस फैसले को पुलिस व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पुलिस एसोसिएशन के नेताओं का कहना है कि इससे भविष्य में बिना कारण किए जाने वाले तबादलों पर रोक लगेगी और कर्मचारियों का भरोसा मजबूत होगा.
