RANCHI : भाजपा ने बोकारो और हजारीबाग ट्रेजरी से अवैध निकासी को लेकर हेमंत सरकार पर तीखा हमला बोला है. भाजपा प्रवक्ता अजय साह ने कहा कि यदि इस पूरे मामले की गहन और निष्पक्ष जांच कराई जाए, तो कई प्रभावशाली और सफेदपोश चेहरों का पर्दाफाश होना तय है.
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संबंधित डीएपी और एसपी की भूमिका
अजय साह ने आरोप लगाया कि यह ट्रेजरी घोटाला जितना साधारण दिखाया जा रहा है, वास्तव में उतना ही जटिल और संगठित है. उन्होंने कहा कि बोकारो में गिरफ्तार कौशल पांडे लंबे समय तक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का करीबी रहा है. यही कारण है कि उसे पूर्व डीजीपी द्वारा “मेहनत और लगन” के लिए सम्मानित भी किया गया था. ऐसे में यह मानना कठिन है कि एक लेखपाल अकेले 25 महीनों में 63 बार अवैध निकासी कर सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि डीडीओ की जिम्मेदारी जिला स्तर पर एसपी की होती है, जो यह अधिकार डीएपी को सौंपते हैं. इसलिए इस पूरे मामले में संबंधित डीएपी और एसपी की भूमिका की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए.
एक बड़े संगठित रैकेट की ओर संकेत
उन्होंने आगे कहा कि उपेंद्र सिंह के जन्मतिथि में हेरफेर जैसे मामलों से यह स्पष्ट होता है कि तकनीकी स्तर पर छेड़छाड़ किया जा सकता था, लेकिन उपेंद्र सिंह के नाम पर अनु पांडे के खाते में सालों तक अवैध राशि का हस्तांतरण होना एक बड़े और संगठित रैकेट की ओर संकेत करता है.
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बिना संरक्षण इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं
अजय साह ने पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कैशियर संतोष कुमार की गिरफ्तारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी भाजपा ने बड़े स्तर की संलिप्तता की आशंका जताई थी, जिसे बाद में ईडी-रांची पुलिस प्रकरण ने सही साबित किया. उन्होंने कहा कि वर्तमान ट्रेजरी घोटाले में कौशल पांडे की भूमिका भी उसी तरह की है और बिना उच्च पुलिस अधिकारियों के संरक्षण के इतना बड़ा घोटाला संभव नहीं है.
चारा घोटाले से भी बड़ा घोटाला
उन्होंने दावा किया कि अब तक उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार केवल दो जिलों में ही यह घोटाला लगभग 20 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. यदि पूरे झारखंड में इसकी व्यापक जांच कराई जाए, तो यह घोटाला राज्य के कुख्यात चारा घोटाले से भी बड़ा साबित हो सकता है. भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस विभाग से जुड़े इस महाघोटाले की जांच केवल पुलिस के माध्यम से कराना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है. इसलिए पार्टी ने इस मामले की न्यायिक जांच या सीबीआई से जांच कराने की मांग की है, ताकि सच्चाई सामने आ सके और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो.
डीएमएफटी और शराब घोटाले का उदाहरण
अजय साह ने यह भी कहा कि ट्रेजरी से अवैध निकासी का यह पहला मामला नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि हेमंत सरकार के कार्यकाल में इससे पहले भी ऊर्जा विभाग से लगभग 100 करोड़, पर्यटन विभाग से 10 करोड़ और पेयजल विभाग से 23 करोड़ रुपये की अवैध निकासी के मामले सामने आ चुके हैं. उन्होंने कहा कि इन घोटालों को कैग की रिपोर्ट में उजागर किया गया है, लेकिन सरकार अभी भी डीएमएफटी और शराब घोटाले से संबंधित फाइलें कैग को उपलब्ध नहीं करा रही है. यदि इन फाइलों को कैग को उपलब्ध कराया जाए, तो हजारों करोड़ रुपये के और भी घोटालों का खुलासा हो सकता है.
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