RANCHI : झारखंड में बहुत जल्द परिशीमन होने वाला हैं, जो आने वाले समय में राज्य की राजनीतिक दिशा और दशा दोनों बदल देगा . दरअसल, झारखंड में विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर गंभीर स्तर पर मंथन चल रहा है.मौजूदा समय में राज्य में कुल 81 विधानसभा सीटें हैं, लेकिन परिसीमन प्रक्रिया के बाद इनकी संख्या बढ़ाकर 121 से 125 तक की जा सकती है.परिसीमन यानी जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं का पुनर्निर्धारण.
हर कुछ वर्षों में यह प्रक्रिया इसलिए की जाती है, ताकि बदलती जनसंख्या के अनुसार हर क्षेत्र को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके.सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार महिला आरक्षण लागू करने के साथ-साथ परिसीमन कानून में भी संशोधन की तैयारी कर रही है. अगर ये दोनों बदलाव एक साथ लागू होते हैं, तो इसका असर झारखंड समेत कई राज्यों में देखने को मिलेगा. अब बात करते हैं इस बदलाव के सबसे अहम पहलू की तो नई व्यवस्था के तहत 40 से अधिक विधानसभा सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जा सकती हैं.
महिला आरक्षण से बढ़ेगी भागीदारी, लोकसभा – राज्यसभा सीटों में भी इजाफे के संकेत
यानी आने वाले समय में झारखंड की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी काफी ज्यादा बढ़ने वाली है. यह कदम न सिर्फ राजनीतिक संतुलन को मजबूत करेगा, बल्कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में और ज्यादा भागीदारी देगा. इसके अलावा, लोकसभा सीटों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है. फिलहाल झारखंड में 14 लोकसभा सीटें हैं, लेकिन परिसीमन के बाद इनकी संख्या बढ़कर 20 या 21 तक पहुंच सकती है. वहीं, राज्यसभा सीटों की संख्या भी मौजूदा 6 से बढ़ाकर 8 या 9 किए जाने की चर्चा है. यानि सिर्फ विधानसभा ही नहीं, बल्कि संसद में भी झारखंड का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है.
अब सवाल उठता है कि किन इलाकों में सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा तो जानकारी के अनुसार, रांची, धनबाद, पलामू और हजारीबाग जैसे जिलों में सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना सबसे ज्यादा है. इन इलाकों में तेजी से बढ़ती जनसंख्या और शहरीकरण को इसकी मुख्य वजह माना जा रहा है. इसके अलावा, कई अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में भी नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जा सकते हैं, ताकि क्षेत्रीय संतुलन को बेहतर किया जा सके. हालांकि, परिसीमन की प्रक्रिया काफी जटिल और संवेदनशील होती है.
इसे भी पढ़ें : झारखंड में 28-29 मार्च को तेज बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया येलो अलर्ट
इसमें जनसंख्या के ताजा आंकड़े , भौगोलिक सीमाएं, प्रशासनिक ढांचाऔर सामाजिक संतुलन जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाता है. यही वजह है कि इस पूरी प्रक्रिया में समय लग सकता है, और अंतिम फैसला केंद्र सरकार के स्तर पर ही लिया जाएगा.
सीटें बढ़ीं तो बदलेगा सियासी समीकरण, 2029 तक दिख सकता है बड़ा राजनीतिक बदलाव
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर सीटों की संख्या बढ़ती है, तो राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे. एक तरफ जहां नए नेताओं को मौका मिलेगा, वहीं दूसरी तरफ पुराने राजनीतिक समीकरण भी बदल सकते हैं.कई क्षेत्रों में नए चेहरे उभरकर सामने आ सकते हैं, तो कुछ स्थापित नेताओं को नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो 2029 के विधानसभा चुनाव तक झारखंड की राजनीति का पूरा गणित बदल सकता है. फिलहाल इस पूरे मुद्दे पर सरकार की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार किया जा रहा है. लेकिन इतना जरूर है कि आने वाले समय में झारखंड की राजनीति एक नए दौर में प्रवेश कर सकती है.फिलहाल के लिए बस इतना ही.
