लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन संशोधन विधेयक पर लंबी और गहन चर्चा के बाद शुक्रवार को मतदान प्रक्रिया संपन्न हुई.दो दिनों में करीब 15 घंटे की बहस के बावजूद महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन विधेयक सदन में पारित नहीं हो सका और गिर गया.
विधेयक के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़े. कुल 489 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया. बिल को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 326 मतों की आवश्यकता थी, लेकिन पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण यह विधेयक 54 वोटों से गिर गया.
इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने घोषणा की कि यह विधेयक आवश्यक समर्थन जुटाने में असफल रहा, इसलिए आगे की विधायी प्रक्रिया जारी नहीं रखी जा सकती. साथ ही, सरकार ने इससे जुड़े दो अन्य विधेयकों पर भी मतदान नहीं कराने का फैसला लिया.
पिछले 12 वर्षों में यह पहला मौका है जब नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा में कोई विधेयक पारित नहीं करा पाई.
इससे पहले बहस के दूसरे दिन, शुक्रवार को चर्चा का जवाब देते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने लगभग एक घंटे तक भाषण दिया. उन्होंने कहा कि यदि यह विधेयक पास नहीं होते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी विपक्ष की होगी.उन्होंने यह भी कहा कि यदि विपक्ष समर्थन नहीं देगा, तो बिल गिर जाएगा और देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह में बाधा कौन बन रहा है.
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल गिरा, 54 वोट से नहीं मिला बहुमत
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