झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में इलाज कराना अब थोड़ा महंगा होने जा रहा है, क्योंकि शासी परिषद निर्णय के अनुपालन में 20 अप्रैल से ओपीडी पंजीकरण शुल्क 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये कर दिया जाएगा, इस संबंध में रिम्स निदेशक प्रो. डॉ. राज कुमार ने समीक्षा बैठक कर सभी पदाधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी कर दिए हैं, जहां बैठक में शासी परिषद के फैसलों और उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन को लेकर विस्तार से चर्चा की गई और निदेशक ने स्पष्ट किया कि सभी निर्णयों को तय समयसीमा के भीतर लागू करना अनिवार्य है, गौरतलब है कि ओपीडी शुल्क बढ़ाने का प्रस्ताव पहले भी शासी परिषद की बैठक में लाया गया था जिस पर बाद में सहमति बनी, हालांकि इस निर्णय को लेकर बीच में आपत्ति भी जताई गई थी क्योंकि कई लोगों का मानना था कि शुल्क बढ़ाने से गरीब मरीजों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा, चूंकि रिम्स में बड़ी संख्या में आर्थिक रूप से कमजोर मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, इसके बावजूद प्रबंधन ने राज्य के अन्य सरकारी अस्पतालों का हवाला देते हुए शुल्क वृद्धि को उचित ठहराया और विशेष रूप से सदर अस्पताल का उदाहरण दिया जहां पहले से ही 10 रुपये पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा है, वहीं रिम्स प्रबंधन का तर्क है कि इस न्यूनतम शुल्क वृद्धि से अस्पताल की सेवाओं के संचालन और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी, लेकिन जानकारों का मानना है कि भले ही राशि कम दिखती हो, प्रतिदिन हजारों मरीजों के आने से इसका सीधा असर आम लोगों पर पड़ेगा, खासकर उन मरीजों पर जो दूरदराज के इलाकों से सस्ते इलाज की उम्मीद लेकर रिम्स पहुंचते हैं.

