RANCHI : रात के करीब दो बजे का वक्त… जब शहर की सड़कें लगभग शांत थीं, उसी वक्त रांची में कुछ युवा सड़क किनारे सोने को मजबूर थे. ये कोई आम प्रदर्शनकारी नहीं, बल्कि JSSC-CGL परीक्षा में सफल होकर सरकारी नौकरी का सपना पूरा करने वाले अभ्यर्थी हैं. इन युवाओं ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि जिस सरकारी नौकरी के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की, परीक्षा पास की और नियुक्ति की उम्मीद में आगे बढ़े, उसी नौकरी को बचाने के लिए उन्हें एक दिन सड़क पर रात गुजारनी पड़ेगी.कभी प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन, कभी सचिवालय परिसर में धरना… और अब आधी रात में खुले आसमान के नीचे सोते ये अभ्यर्थी सरकार से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर उनकी गलती क्या है?जयपाल सिंह स्टेडियम में छात्रों का करीब 26 दिनों तक चला आंदोलन खत्म होने के बाद सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया. इस फैसले के बाद जहां परीक्षा रद्द कराने की मांग कर रहे छात्रों में खुशी की लहर दौड़ी, वहीं परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों के सामने अपने भविष्य का संकट खड़ा हो गया.

इसके बाद से सफल अभ्यर्थी लगातार आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर परीक्षा में गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच की जाए, दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन उन अभ्यर्थियों का क्या, जिन्होंने मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे थे? कल तक जो युवा सरकारी व्यवस्था का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहे थे, जो अपने परिवार के सपनों को पूरा करने की उम्मीद में थे, आज वही युवा अपनी नियुक्ति बचाने के लिए रात-रातभर सड़क पर बैठने और सोने को मजबूर हैं. किसी ने किसान पिता की उम्मीदों के साथ परीक्षा पास की, किसी ने मजदूर परिवार से निकलकर इस मुकाम तक पहुंचने का सपना देखा. लेकिन आज इन सफल अभ्यर्थियों के सामने एक ही सवाल है – मेहनत से मिली सफलता का आखिर क्या होगा?
रात के डेढ़-दो बजे प्रोजेक्ट भवन के सामने सड़क पर सोते इन युवाओं की तस्वीर सिर्फ एक प्रदर्शन की तस्वीर नहीं है… ये उस अनिश्चित भविष्य और टूटती उम्मीदों की तस्वीर है, जिसे लेकर ये अभ्यर्थी लगातार सरकार से न्याय की गुहार लगा रहे हैं. इनका कहना है – परीक्षा में अगर कोई गलती हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन उनकी नियुक्ति क्यों छीनी जाए?
