RANCHI : झारखंड की राजनीति और छात्र आंदोलन के गलियारों में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के वरीय उपाध्यक्ष और प्रमुख छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो के सोशल मीडिया प्रोफाइल में एक बड़ा बदलाव देखा गया. देवेंद्र नाथ महतो ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट के बायो से ‘JLKM वरीय उपाध्यक्ष’ का पद हटा दिया है. अब उनके बायो में केवल ‘समाजसेवी’ और ‘स्टूडेंट लीडर’ लिखा हुआ है. इस बदलाव के बाद राजनीतिक विश्लेषकों और समर्थकों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई है कि क्या देवेंद्र नाथ महतो पार्टी से अलग होने की तैयारी कर रहे हैं या फिर इसके पीछे कोई नई रणनीति है.
भर्ती सुधार यात्रा के बीच उठाया गया कदम
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब देवेंद्र नाथ महतो राज्य के सभी 24 जिलों में ‘JPSC-JSSC भर्ती सुधार यात्रा’ पर निकले हुए हैं. वे प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, पेपर लीक की रोकथाम और युवाओं के अधिकारों को लेकर लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं. ज़मीनी स्तर पर छात्रों को एकजुट करने के इस अभियान के बीच पार्टी पद को प्रोफाइल से हटाने को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह के मायने निकाले जा रहे हैं.

राजनीतिक कयास और विश्लेषण के दो मुख्य पहलू
इस कदम को राजनीतिक जानकार मुख्य रूप से दो कोणों से देख रहे हैं:
- आंदोलन की निष्पक्षता बनाए रखने की रणनीति: कुछ जानकारों का मानना है कि ‘भर्ती सुधार यात्रा’ विशुद्ध रूप से छात्रों और बेरोजगार युवाओं का गैर-राजनीतिक मंच है. यदि कोई नेता किसी खास राजनीतिक दल के आधिकारिक पद के साथ आंदोलन का नेतृत्व करता है, तो विरोधी दल इसे राजनीति से प्रेरित बता सकते हैं. ऐसे में खुद को केवल ‘स्टूडेंट लीडर’ के रूप में पेश करना आंदोलन को निष्पक्ष रखने और हर विचारधारा के छात्र को जोड़ने की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है.
- पार्टी के भीतर संभावित मतभेद: दूसरा पहलू यह माना जा रहा है कि JLKM प्रमुख जयराम महतो और देवेंद्र नाथ महतो के बीच संगठन की प्राथमिकताओं या फैसलों को लेकर अंदरूनी मतभेद हो सकते हैं. दोनों नेताओं को झारखंड में युवा आंदोलन की सबसे मजबूत रीढ़ माना जाता रहा है. ऐसे में बायो से पार्टी का नाम हटना दोनों के बीच बढ़ती दूरी या स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनने का संकेत भी हो सकता है.
आधिकारिक बयान का इंतजार
फिलहाल इस बदलाव को लेकर न तो देवेंद्र नाथ महतो की तरफ से कोई स्पष्टीकरण आया है और न ही JLKM नेतृत्व या जयराम महतो ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है. इसलिए पार्टी छोड़ने या किसी बड़े विवाद की बात को अभी आधिकारिक तौर पर केवल राजनीतिक अटकल ही माना जा रहा है.अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि भर्ती सुधार यात्रा के आगे बढ़ने के साथ देवेंद्र नाथ महतो या पार्टी आलाकमान इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाते हैं.
