RANCHI / GIRIDIH : झारखंड की राजनीति में गिरिडीह विधानसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज हो रही है. यह चुनाव केवल एक विधानसभा सीट पर नए विधायक के चयन तक सीमित नहीं रहने वाला है. इसके नतीजे से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) की राजनीतिक ताकत का भी आकलन होगा. इस चुनाव में सबसे अधिक चर्चा डुमरी के विधायक और JLKM के अध्यक्ष जयराम महतो की है. सवाल यह है कि क्या जयराम महतो गिरिडीह उपचुनाव में किंगमेकर की भूमिका निभाएंगे या खुद चुनावी मैदान में उतरकर किंग बनने की कोशिश करेंगे?
इस सवाल की वजह 2024 के विधानसभा उपचुनाव के आंकड़े हैं। उस चुनाव में JLKM उम्मीदवार को 10,787 वोट मिले थे। दूसरी ओर, JMM के सुदिव्य कुमार सोनू ने BJP के निर्भय कुमार शाहाबादी को 3,838 वोटों से हराया था। यानी JLKM को मिले वोट जीत के अंतर से करीब तीन गुना थे.यही आंकड़ा इस बार के चुनाव को दिलचस्प बना रहा है. जयराम महतो का वोट बैंक किस दिशा में जाएगा और क्या वह किसी पार्टी के चुनावी समीकरण को बिगाड़ेगा, इसका असर नतीजे पर पड़ सकता है.
जयराम महतो की सक्रियता से बढ़ी राजनीतिक सरगर्मी
गिरिडीह उपचुनाव को लेकर JLKM भी अपनी संगठनात्मक गतिविधियां बढ़ा रही है.पार्टी पंचायत स्तर पर कार्यकर्ताओं से संपर्क साधने और संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है.पीरटांड़ प्रखंड में हुई पार्टी की बैठक में गिरिडीह उपचुनाव, संगठन विस्तार और जयराम महतो के विचारों को आम लोगों तक पहुंचाने पर चर्चा हुई. इस दौरान कई युवाओं ने पार्टी की सदस्यता भी ली. JLKM की इन गतिविधियों को उपचुनाव की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि पार्टी जयराम महतो को उम्मीदवार बनाएगी या किसी दूसरे चेहरे को मैदान में उतारेगी.
जयराम महतो की राजनीतिक ताकत का आधार युवाओं और स्थानीय मुद्दों से जुड़ा उनका जनाधार माना जाता है. लेकिन 10,787 वोटों को जीत में बदलने के लिए उन्हें अपने पुराने वोट बैंक से आगे बढ़कर नए मतदाताओं का समर्थन भी हासिल करना होगा.
JMM के सामने सहानुभूति और राजनीतिक विरासत बचाने की चुनौती
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद JMM के सामने अपनी सीट बचाने की चुनौती है. पार्टी के लिए इस चुनाव में सहानुभूति और सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. राजनीतिक हलकों में उनकी पत्नी श्वेता शर्मा को संभावित उम्मीदवार बनाए जाने की चर्चा है. श्वेता शर्मा पीरटांड़ और सुदिव्य कुमार सोनू से जुड़े क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर चुकी हैं. उन्होंने सुदिव्य कुमार सोनू के अधूरे सपनों और कार्यों को आगे बढ़ाने की बात भी कही है.
हाल में गिरिडीह में छठ घाटों के निरीक्षण के दौरान श्वेता शर्मा और गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन की मौजूदगी भी चर्चा में रही. इस दौरान कल्पना सोरेन ने श्वेता शर्मा को गले लगाया। राजनीतिक दृष्टि से इस मुलाकात को JMM के भीतर श्वेता शर्मा को मिल रहे समर्थन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है. हालांकि, उम्मीदवार को लेकर पार्टी की आधिकारिक घोषणा का इंतजार है.
114 करोड़ की सड़क परियोजनाएं भी चर्चा में
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद झारखंड सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में गिरिडीह क्षेत्र की तीन प्रमुख सड़क परियोजनाओं को मंजूरी दी गई. इन परियोजनाओं की कुल लागत करीब 114 करोड़ रुपये बताई गई है. इन फैसलों का राजनीतिक महत्व भी निकाला जा रहा है. JMM इसे क्षेत्र के विकास और जनता की जरूरतों से जुड़ा फैसला बता सकती है, जबकि विपक्ष इसे उपचुनाव से पहले मतदाताओं को साधने की कोशिश के रूप में पेश कर सकता है.
हालांकि, इन परियोजनाओं का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि स्थानीय मतदाता सरकार के कामकाज और विकास के दावों को किस तरह देखते हैं. JMM के लिए चुनौती केवल सहानुभूति के आधार पर चुनाव जीतने की नहीं होगी, बल्कि सुदिव्य कुमार सोनू के काम और राजनीतिक विरासत को भी जनता के सामने रखने की होगी.
BJP के सामने उम्मीदवार चयन और गुटबाजी संभालने की चुनौती
दूसरी ओर, BJP भी गिरिडीह उपचुनाव को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है. पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मजबूत उम्मीदवार का चयन करना और संभावित दावेदारों के बीच सहमति बनाना है. पूर्व विधायक निर्भय कुमार शाहाबादी और रवींद्र राय जैसे नामों को लेकर राजनीतिक चर्चाएं हैं. BJP के प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा है कि पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ेगी. उम्मीदवार के नाम पर अंतिम फैसला केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद होगा.
BJP की रणनीति में आदिवासी और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के मतदाताओं को साधना भी अहम माना जा रहा है. पूर्व मुख्यमंत्री और BJP के वरिष्ठ नेता बाबूलाल मरांडी ने हरलाडीह और पीरटांड़ मंडल की बैठकों में कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय होने और गांव-गांव जाकर संपर्क बढ़ाने का निर्देश दिया है. वहीं, प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी गिरिडीह में पार्टी की जीत का दावा किया है. BJP के लिए यह उपचुनाव संगठन की जमीनी ताकत परखने का अवसर भी है. पार्टी यह देखना चाहेगी कि विधानसभा चुनाव के बाद उसका स्थानीय संगठन कितना सक्रिय है और मतदाताओं के बीच उसकी पकड़ कितनी मजबूत है.
आजसू की भूमिका भी तय कर सकती है चुनावी नतीजा
गिरिडीह उपचुनाव में BJP के साथ आजसू पार्टी की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है. NDA के भीतर दोनों दलों के बीच तालमेल और मतों का हस्तांतरण चुनावी नतीजे को प्रभावित कर सकता है. सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी की सक्रियता और पीरटांड़ में आजसू के कार्यकर्ता सम्मेलन के बाद गठबंधन की रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हुई हैं.
हालांकि, गठबंधन के स्तर पर राजनीतिक सहमति बनना एक बात है और मतदाताओं के बीच दोनों दलों के समर्थकों का एक-दूसरे के उम्मीदवार को वोट देना दूसरी बात. BJP और आजसू के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती होगी कि उनके समर्थकों के वोट बिखरने न पाएं.
गिरिडीह उपचुनाव के तीन संभावित राजनीतिक समीकरण
इस चुनाव में जयराम महतो का रुख सबसे अहम सवाल बनकर उभरा है. मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए तीन संभावित समीकरण बन सकते हैं.
पहला समीकरण: JLKM के वोट से BJP को फायदा
अगर JLKM का वोट बैंक मुख्य रूप से JMM के समर्थन आधार को प्रभावित करता है, तो BJP को इसका फायदा मिल सकता है। 2024 में JMM की जीत का अंतर महज 3,838 वोट था, जबकि JLKM को 10,787 वोट मिले थे। ऐसे में वोटों का बंटवारा BJP के लिए अवसर पैदा कर सकता है.
दूसरा समीकरण: JLKM के वोट से JMM को राहत
अगर जयराम महतो का जनाधार BJP के परंपरागत वोट बैंक को अधिक प्रभावित करता है, तो JMM के लिए मुकाबला आसान हो सकता है. ऐसी स्थिति में सुदिव्य कुमार सोनू के प्रति सहानुभूति, श्वेता शर्मा की संभावित उम्मीदवारी और सरकार की विकास परियोजनाएं JMM के पक्ष में काम कर सकती हैं.
तीसरा समीकरण: जयराम महतो खुद चुनावी मैदान में उतरें
अगर JLKM जयराम महतो को ही उम्मीदवार बनाती है, तो मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना बढ़ जाएगी. ऐसी स्थिति में चुनाव केवल JMM और BJP के बीच सीधी लड़ाई नहीं रहेगा. जयराम महतो के सामने अपने मौजूदा जनाधार को बनाए रखने के साथ-साथ नए मतदाताओं को जोड़ने की चुनौती होगी.
हालांकि, यह भी ध्यान रखना होगा कि 2024 में मिले वोट किसी एक चुनाव में स्थायी राजनीतिक समर्थन की गारंटी नहीं होते. उपचुनाव में उम्मीदवार, स्थानीय मुद्दे, गठबंधन और चुनावी परिस्थितियां अलग परिणाम दे सकती हैं.
गिरिडीह का चुनाव, झारखंड की राजनीति की बड़ी परीक्षा
गिरिडीह उपचुनाव का नतीजा तीनों राजनीतिक दलों के लिए अलग-अलग संदेश लेकर आ सकता है. JMM के लिए यह सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत और सहानुभूति के आधार पर अपनी सीट बचाने की परीक्षा होगी. BJP के लिए यह संगठनात्मक ताकत और गठबंधन के वोटों को एकजुट करने की चुनौती होगी. वहीं, JLKM और जयराम महतो के लिए यह साबित करने का अवसर होगा कि उनका जनाधार केवल विधानसभा चुनाव तक सीमित नहीं है, बल्कि वे दूसरे क्षेत्रों के चुनावी समीकरण भी प्रभावित कर सकते हैं.
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम है-क्या जयराम महतो गिरिडीह में किंगमेकर बनेंगे या खुद चुनाव लड़कर किंग बनने की कोशिश करेंगे? फिलहाल इस सवाल का जवाब भविष्य की राजनीतिक रणनीति और उम्मीदवारों की घोषणा में छिपा है. इतना तय है कि गिरिडीह उपचुनाव में जयराम महतो की भूमिका पर JMM और BJP दोनों की नजर रहेगी.
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