RANCHI / HAZARIBAGH : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली और पैसों के दम पर चयन कराने के आरोप एक बार फिर चर्चा में हैं. इस बार मामला झारखंड हाई कोर्ट की महिला अधिवक्ता अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध मौत से जुड़ गया है. अनुष्का के पति कुशाग्र रुद्र राणा ने आत्मसमर्पण से ठीक पहले सोशल मीडिया पर करीब छह मिनट का एक वीडियो जारी किया. वीडियो में उन्होंने रामगढ़ की विधायक ममता देवी के विधायक प्रतिनिधि और निजी सहायक (PA) बताए जा रहे मनोज कुमार महतो पर JPSC परीक्षा में चयन कराने के नाम पर 17 लाख रुपये लेने का गंभीर आरोप लगाया है.
कुशाग्र के इस दावे ने झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है. हालांकि, वीडियो में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि कथित लेन-देन में JPSC के किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका थी या नहीं.
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— Loktantra19 (@theLoktantra19) October 29, 2026
विधायक ममता देवी के PA पर 17 लाख रुपये लेने का आरोप
कुशाग्र रुद्र राणा ने अपने वीडियो में दावा किया है कि उनकी पत्नी अनुष्का चक्रवर्ती को JPSC परीक्षा में अनुचित तरीके से सफल कराने और अधिकारी की नौकरी दिलाने के नाम पर पैसों का लेन-देन हुआ था. इस कथित सौदे में उन्होंने मनोज कुमार महतो को मुख्य सूत्रधार बताया है. कुशाग्र के मुताबिक, कथित तौर पर कुल 17 लाख रुपये दो किस्तों में दिए गए थे. पहली किस्त के रूप में उनकी कंपनी के आधिकारिक बैंक खाते से सात लाख रुपये ट्रांसफर किए गए. वहीं, दूसरी किस्त के रूप में 10 लाख रुपये नकद दिए जाने का दावा किया गया है.
कुशाग्र ने आरोप लगाया है कि यह रकम JPSC परीक्षा में चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर ली गई थी. हालांकि, इस कथित लेन-देन से जुड़े बैंक दस्तावेज, नकद भुगतान के प्रमाण और अन्य साक्ष्यों की आधिकारिक जांच सामने आना अभी बाकी है.
चयन नहीं हुआ तो सामने आई कथित सौदेबाजी?
कुशाग्र के वीडियो में किए गए दावों के अनुसार, कथित तौर पर 17 लाख रुपये देने के बावजूद उनकी पत्नी का चयन नहीं हो सका. उनका आरोप है कि पैसे देने के बाद भी वादा पूरा नहीं हुआ और इसी वजह से पूरे मामले में विवाद पैदा हुआ. यहां सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी परीक्षा में चयन कराने के नाम पर वास्तव में इतनी बड़ी रकम का लेन-देन हुआ, तो इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल थे? क्या यह किसी व्यक्ति तक सीमित था या इसके तार JPSC के भीतर तक जुड़े थे? इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा.
अनुष्का चक्रवर्ती की मौत से जुड़ा मामला
यह पूरा विवाद अनुष्का चक्रवर्ती की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद सामने आया है. उनके पति कुशाग्र रुद्र राणा पर भी अनुष्का की मौत को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं. ऐसे में उनके वीडियो को मामले के एक पक्ष के दावे के तौर पर देखा जाना चाहिए. कुशाग्र ने आत्मसमर्पण से पहले वीडियो जारी कर कथित रिश्वतखोरी के आरोपों को सार्वजनिक किया. इसके बाद मामला केवल एक महिला अधिवक्ता की मौत तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि JPSC की परीक्षा प्रक्रिया, कथित बिचौलियों और राजनीतिक रसूख के इस्तेमाल जैसे सवाल भी उठने लगे हैं.
हाई कोर्ट के आदेश पर जांच, SIT खंगाल रही मामले की परतें
अनुष्का चक्रवर्ती की मौत के मामले में झारखंड हाई कोर्ट के आदेश के बाद पुलिस जांच कर रही है. मामले की जांच में डीएसपी स्तर के अधिकारी और विशेष जांच टीम (SIT) की भूमिका बताई जा रही है. अब कुशाग्र रुद्र राणा के वीडियो में लगाए गए आरोपों के बाद जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है. पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि कथित 7 लाख रुपये का बैंक ट्रांसफर किस खाते में हुआ, 10 लाख रुपये नकद देने का दावा कितना सही है और क्या इस पूरे मामले में किसी अन्य व्यक्ति या संस्थान की भी भूमिका रही है.
झारखंड के लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य पर सवाल
JPSC जैसी प्रतियोगी परीक्षाएं झारखंड के हजारों युवाओं के लिए सरकारी सेवा में पहुंचने का सबसे बड़ा अवसर हैं. अभ्यर्थी वर्षों तक तैयारी करते हैं। परिवार अपनी आर्थिक क्षमता से आगे बढ़कर उनकी पढ़ाई पर खर्च करता है. ऐसे में यदि परीक्षा में पैसे लेकर चयन कराने का कोई संगठित खेल चलता है, तो यह केवल परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल नहीं होगा, बल्कि मेहनत और योग्यता के भरोसे पर भी चोट होगी.
फिलहाल मनोज कुमार महतो पर लगे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के निष्कर्ष सामने आने बाकी हैं. संबंधित पक्षों का जवाब भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगा. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या जांच एजेंसियां कथित 17 लाख रुपये के लेन-देन की पूरी कड़ी तक पहुंच पाएंगी? क्या इस मामले में केवल आरोप लगाने और लगाने वालों तक जांच सीमित रहेगी या कथित बिचौलियों से लेकर संभावित संस्थागत मिलीभगत तक की पड़ताल होगी? झारखंड के युवाओं को इस मामले में केवल आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस जवाब का इंतजार है.
