RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग यानी JPSC की परीक्षाओं में कथित धांधली के मामले में बुधवार, 30 सितंबर को कोर्ट में सुनवाई के दौरान कई गंभीर बातें सामने आईं. CID ने अदालत में दावा किया कि JPSC की सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य ने अपने PA ब्रज कुमार राम के कहने पर एक उम्मीदवार के इंटरव्यू के नंबर बढ़वाए. दावा है कि उम्मीदवार के 80 नंबर बढ़ाए गए और वह DSP के पद पर चयनित हुआ. इस मामले में आरोपी और JPSC सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के PA ब्रज कुमार राम की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी. कोर्ट ने मामले को संगठित भ्रष्टाचार से जुड़ा गंभीर मामला माना.
PA के कहने पर बढ़े 80 नंबर, 5 लाख लेने का आरोप
CID ने कोर्ट के सामने केस डायरी और जांच से जुड़े तथ्यों का हवाला देते हुए बताया कि ब्रज कुमार राम को JPSC की गोपनीय प्रक्रिया और उम्मीदवारों तक पहुंच हासिल थी. आरोप है कि उसने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर परीक्षा प्रक्रिया में दखल दिया. CID के मुताबिक, आदित्य पांडेय के कहने पर ब्रज कुमार राम ने JPSC सदस्य अजिता भट्टाचार्य से मुलाकात की और मनीष कुमार नाम के उम्मीदवार के इंटरव्यू में 80 नंबर बढ़वाए. इसके बाद उसका चयन DSP पद पर हुआ. जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बदले 5 लाख रुपये लिए गए.
11वीं-13वीं JPSC में 15 लाख तक की सेटिंग का दावा
CID ने कोर्ट में आरोपियों के बयानों का भी हवाला दिया. जांच एजेंसी के मुताबिक, मुख्य आरोपी अभय कुमार तिवारी और अन्य आरोपियों रामबीर सिंह, धर्मेंद्र कुमार और अरुण कुमार के बयानों में 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा में कई उम्मीदवारों की सेटिंग का जिक्र है. इन बयानों के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों के चयन के लिए प्रति उम्मीदवार 15 लाख रुपये तक के लेन-देन की बात सामने आई है. CID का दावा है कि इस रकम में आयोग के चेयरमैन और सदस्यों के हिस्से की रकम उनके करीबियों तक पहुंचाई जाती थी. वहीं, अजिता भट्टाचार्य के हिस्से की रकम उनके PA ब्रज कुमार राम तक पहुंचने का आरोप है.
मामला सिर्फ JPSC तक सीमित नहीं बताया जा रहा है. CID ने कोर्ट को बताया कि पूछताछ के दौरान ब्रज कुमार राम ने कथित तौर पर CDPO परीक्षा में 20 लाख रुपये प्रति उम्मीदवार के हिसाब से 4 अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने की बात स्वीकार की. इनमें प्रमोद पाठक का नाम भी शामिल बताया गया है.
मोबाइल, बैंक खाते और CDR से मिले सुराग
CID ने जांच में जुटाए गए इलेक्ट्रॉनिक और वित्तीय साक्ष्यों का भी कोर्ट में जिक्र किया. एजेंसी के मुताबिक, आरोपी के मोबाइल फोन की फोरेंसिक जांच, बैंक खातों की जानकारी, कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और दिसंबर 2025 में मिजोरम के आइजोल दौरे से जुड़े सुरागों की जांच में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है. CID का दावा है कि आरोपी के CDR से बिनसिस के निदेशक अरुण कुमार, परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और 14वीं JPSC PT में सफल 6 उम्मीदवारों से बातचीत के कनेक्शन सामने आए हैं.
अब जांच के घेरे में परीक्षा से लेकर चयन तक की पूरी कड़ी
कोर्ट में CID की ओर से रखी गई इन बातों के बाद जांच का फोकस सिर्फ पेपर या परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है. अब उम्मीदवारों की सेटिंग, नंबर बढ़ाने, पैसों के लेन-देन और आयोग के अंदर कथित संपर्कों की पूरी कड़ी जांच के दायरे में है. हालांकि, ये सभी आरोप और जांच एजेंसी के दावे हैं. इनकी अंतिम पुष्टि अदालत में साक्ष्यों और आगे की न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगी.
इसे भी पढ़े : दहेज प्रताड़ना मामले में पति पर ही चलेगा केस, ससुराल वालों को कोर्ट से राहत
