RANCHI : दहेज प्रताड़ना के एक मामले में न्यायिक आयुक्त की अदालत ने अहम फैसला सुनाया है. अदालत ने स्पष्ट किया कि ससुराल पक्ष के अन्य सदस्यों के खिलाफ सिर्फ सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आपराधिक संज्ञान नहीं लिया जा सकता. मामले में अदालत ने पति अनुज मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने का रास्ता साफ रखा, जबकि ससुर राजेंद्र मिश्रा, सास सावित्री मिश्रा और देवर आशु मिश्रा को राहत दी है. यह मामला क्रिमिनल रिवीजन संख्या 154/2026 और शिकायत वाद संख्या 11250/25 से जुड़ा है.
पत्नी ने पति समेत चार लोगों पर लगाए थे आरोप
प्रार्थी अर्चना मिश्रा ने अपने पति अनुज मिश्रा के अलावा ससुर राजेंद्र मिश्रा, सास सावित्री मिश्रा और देवर आशु मिश्रा के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी. मामले की शुरुआती सुनवाई JMFC-IV की अदालत में हुई. निचली अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों के आधार पर केवल पति अनुज मिश्रा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 85 के तहत संज्ञान लिया. वहीं, अदालत ने ससुराल के अन्य सदस्यों के खिलाफ प्रथमदृष्टया पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया.
निचली अदालत के फैसले को दी गई चुनौती
निचली अदालत के इस आदेश से असंतुष्ट अर्चना मिश्रा ने न्यायिक आयुक्त की अदालत का रुख किया. उन्होंने क्रिमिनल रिवीजन याचिका दायर कर मांग की कि उनके ससुर, सास और देवर के खिलाफ भी आपराधिक संज्ञान लिया जाए. मामले की सुनवाई न्यायिक आयुक्त अनिल कुमार मिश्रा-1 की अदालत में हुई. अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और मामले से जुड़े रिकॉर्ड का परीक्षण किया.
कोर्ट ने क्यों दी ससुराल वालों को राहत?
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अन्य आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और व्यापक प्रकृति के हैं. ऐसे आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक संज्ञान लेने के लिए प्रथमदृष्टया पर्याप्त आधार होना जरूरी है. अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री के आधार पर पति के अलावा अन्य ससुराल वालों के खिलाफ प्रथमदृष्टया आपराधिक मामला नहीं बनता. अदालत ने यह भी कहा कि पत्नी को गरिमा और सम्मान के साथ रखने की मुख्य जिम्मेदारी पति की होती है.
पत्नी की रिवीजन याचिका खारिज
इन आधारों पर न्यायिक आयुक्त की अदालत ने अर्चना मिश्रा की क्रिमिनल रिवीजन याचिका खारिज कर दी. इसके साथ ही निचली अदालत के उस आदेश को बरकरार रखा गया, जिसमें केवल पति अनुज मिश्रा के खिलाफ BNS की धारा 85 के तहत संज्ञान लिया गया था. हालांकि, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता को उचित समय पर कानून के तहत अपनी बात रखने की पूरी स्वतंत्रता रहेगी. इस फैसले के बाद फिलहाल दहेज प्रताड़ना मामले में पति अनुज मिश्रा के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, जबकि ससुर, सास और देवर को इस स्तर पर राहत मिल गई है.
