RANCHI : झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी और पेपर लीक के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं. भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने CID की जांच पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि कार्रवाई फिलहाल अभ्यर्थियों और एजेंटों तक सीमित दिखाई दे रही है.

मरांडी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अगर जांच केवल अभ्यर्थियों और एजेंटों की गिरफ्तारी तक सीमित रहती है, तो इससे बड़े साजिशकर्ताओं तक पहुंचने पर सवाल खड़े होते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जांच में उन लोगों की भूमिका भी सामने आनी चाहिए, जिन पर परीक्षा की पूरी प्रक्रिया से जुड़े होने या प्रभाव रखने के आरोप लगाए जा रहे हैं.
विनोद सिंह से पूछताछ क्यों नहीं हुई ?
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कथित करीबी विनोद सिंह का जिक्र करते हुए दावा किया कि उनके पास JSSC-CGL के एडमिट कार्ड मिले थे. मरांडी का सवाल है कि अगर ऐसा है, तो CID ने उनसे पूछताछ क्यों नहीं की. हालांकि,विनोद सिंह के खिलाफ मरांडी की ओर से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की गई है.
गिरिडीह को लेकर भी उठाए सवाल
मरांडी ने गिरिडीह को भी मामले में अहम कड़ी बताते हुए कहा कि वहां से कई लोगों की गिरफ्तारी हुई है, लेकिन उनके मुताबिक स्थानीय झामुमो नेताओं से पूछताछ नहीं हुई है. CID ने हाल के दिनों में गिरिडीह और अन्य इलाकों से कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है. सितंबर में जांच एजेंसी ने सफल अभ्यर्थियों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ के बाद गिरफ्तारियां की हैं.
कई अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने अपने पोस्ट में अनुराग गुप्ता, सुधीर गुप्ता, नीरज सिन्हा, मनोज कौशिक, प्रशांत कुमार और विनोद सिंह समेत कई लोगों की भूमिका की जांच की मांग की है. इससे पहले भी मरांडी JSSC-CGL मामले में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच और कुछ अधिकारियों को उनके पदों से हटाने की मांग कर चुके हैं. उन्होंने CID की जांच के बजाय CBI जांच की मांग भी उठाई है.
मरांडी ने आरोप लगाया कि अगर जांच केवल छोटे स्तर के आरोपियों तक सीमित रहती है और पूरे नेटवर्क की जांच नहीं होती, तो अभ्यर्थियों के बीच जांच की विश्वसनीयता को लेकर सवाल बने रहेंगे.
CID की जांच में अब तक क्या सामने आया?
JSSC-CGL मामले की जांच कर रही CID की SIT ने बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों और संदिग्धों से पूछताछ की है. सितंबर की शुरुआत में जांच एजेंसी की ओर से 350 से अधिक सफल अभ्यर्थियों से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई थी. बाद की कार्रवाई में फूड इंस्पेक्टर समेत कई सफल अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी हुई. 28 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक मामले में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 36 तक पहुंच चुकी थी.
मामले में कथित पेपर लीक और परीक्षा में अनुचित लाभ से जुड़े आरोपों की जांच अभी जारी है। वहीं, JSSC-CGL परीक्षा से जुड़ा विवाद अदालत में भी विचाराधीन है. बाबूलाल मरांडी का कहना है कि छात्रों का भरोसा तभी कायम होगा, जब जांच कथित तौर पर केवल अभ्यर्थियों और एजेंटों तक सीमित न रहकर पूरे नेटवर्क और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की पड़ताल करे.
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