RANCHI : झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की पुलिस एनकाउंटर में मौत के करीब दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उसकी डेथ रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं की गई है. सुजीत सिन्हा की मौत 2 अगस्त 2026 को जेल शिफ्टिंग के दौरान हुई थी. इसके बावजूद राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की अदालत में तेतरियाखाड़ गोलीकांड मामले में उसका नाम अब तक नहीं हटाया जा सका है. इस मामले में 11 बार सुनवाई की तारीख पड़ चुकी है. इससे पहले नक्सली प्रशांत बोस उर्फ प्रशांत दा के मामले में भी डेथ रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं किए जाने का मामला सामने आया था.
जेल शिफ्टिंग के दौरान एनकाउंटर में मारा गया था सुजीत सिन्हा
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को 2 अगस्त 2026 को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्ट किया जा रहा था. इसी दौरान रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया. पुलिस के अनुसार, गाड़ी बदलने के दौरान सुजीत सिन्हा ने शौच जाने का बहाना बनाया और एक पुलिसकर्मी की राइफल छीनकर भागने और फायरिंग करने की कोशिश की.
पुलिस की ओर से बताया गया कि इसके बाद जवाबी कार्रवाई में सुजीत सिन्हा मारा गया. हालांकि, घटना के बाद से अब तक उसकी डेथ रिपोर्ट अदालत में पेश नहीं किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
NIA की अदालत में 11 बार पड़ी सुनवाई की तारीख
सुजीत सिन्हा का नाम लातेहार के बालूमाथ थाना क्षेत्र स्थित तेतरियाखाड़ कोलियरी गोलीकांड मामले में दर्ज है. इस मामले की जांच NIA कर रही है. सुजीत सिन्हा की मौत के बाद NIA की अदालत में 7 अगस्त, 21 अगस्त, 5 सितंबर, 9 सितंबर, 11 सितंबर, 14 सितंबर, 16 सितंबर, 18 सितंबर, 21 सितंबर, 23 सितंबर और 26 सितंबर को सुनवाई की तारीख निर्धारित की गई.
इसके बावजूद अदालत में उसकी मौत से संबंधित रिपोर्ट पेश नहीं की गई. डेथ रिपोर्ट के अभाव में मामले से उसका नाम हटाने की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी है.
क्या था तेतरियाखाड़ कोलियरी गोलीकांड मामला?
18 दिसंबर 2020 को लातेहार जिले के बालूमाथ थाना क्षेत्र स्थित तेतरियाखाड़ कोलियरी में आगजनी और गोलीबारी की घटना हुई थी. इस दौरान चार ट्रकों और एक बाइक को आग के हवाले कर दिया गया था. गोलीबारी में एक व्यक्ति घायल हुआ था. इस मामले में NIA ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA और क्रिमिनल लॉ अमेंडमेंट (CLA) एक्ट के तहत जांच और कार्रवाई की थी. जांच के दौरान गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के साथ अमन साव उर्फ अमन साहू और उसके गिरोह के अन्य सदस्यों की भूमिका भी सामने आई थी.
प्रशांत बोस मामले में भी डेथ रिपोर्ट को लेकर उठे थे सवाल
सुजीत सिन्हा के मामले से पहले नक्सली और माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य प्रशांत बोस उर्फ प्रशांत दा के मामले में भी डेथ रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने को लेकर सवाल उठे थे. इस मामले में पुलिस और NIA की ओर से रिपोर्ट पेश नहीं किए जाने के कारण अदालत में सुनवाई की तारीखें बार-बार निर्धारित होती रहीं. बताया गया है कि NIA की अदालत ने प्रशांत बोस को पेश करने के लिए अब तक 11 बार तारीख तय की है.
डेथ रिपोर्ट पेश नहीं होने से अदालत की प्रक्रिया पर सवाल
सुजीत सिन्हा की मौत के बाद भी तेतरियाखाड़ गोलीकांड मामले में उसका नाम नहीं हटाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, मामले में अन्य आरोपियों के खिलाफ सुनवाई जारी रहने की वजह से भी तारीखें निर्धारित की जा सकती हैं. ऐसे में पुलिस और NIA की ओर से डेथ रिपोर्ट अदालत में पेश किए जाने के बाद ही सुजीत सिन्हा के खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. डेथ रिपोर्ट पेश होने से अदालत को मामले में आगे की कार्रवाई तय करने में मदद मिलेगी.
अब सवाल यह है कि सुजीत सिन्हा की मौत के करीब दो महीने बाद भी डेथ रिपोर्ट अदालत में क्यों नहीं पेश की गई और उसे मामले से हटाने की प्रक्रिया कब पूरी होगी.
