RANCHI : झारखंड में आवास बोर्ड की जमीन और मकान से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव हो सकता है. राज्य आवास बोर्ड ने Free Hold व्यवस्था खत्म कर दोबारा Lease Hold व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। अब इस प्रस्ताव पर सरकार के फैसले का इंतजार है. अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो आवास बोर्ड की जमीन और मकान से जुड़े हजारों आवंटियों पर इसका असर पड़ सकता है.
पहले समझिए Free Hold क्या होता है?
Free Hold का मतलब है कि संपत्ति पर मालिकाना हक संबंधित व्यक्ति के पास होता है। आवास बोर्ड की निर्धारित प्रक्रिया और शुल्क पूरा करने के बाद जमीन या मकान को Free Hold कराने पर संपत्ति पर मालिकाना अधिकार मिल जाता है. Free Hold संपत्ति को बेचने या दूसरे व्यक्ति के नाम ट्रांसफर करने के मामले में आम तौर पर आवास बोर्ड की अनुमति की जरूरत नहीं होती.
Lease Hold व्यवस्था क्या है?
Lease Hold व्यवस्था में जमीन का मूल मालिक आवास बोर्ड रहता है, जबकि आवंटी को उस जमीन या मकान के इस्तेमाल का अधिकार मिलता है. ऐसी लीज लंबी अवधि के लिए हो सकती है. संपत्ति को बेचने या ट्रांसफर करने की स्थिति में संबंधित नियमों के मुताबिक आवास बोर्ड की अनुमति और निर्धारित शुल्क की जरूरत पड़ सकती है.
2019 में लागू हुई थी Free Hold व्यवस्था
आवास बोर्ड की जमीन और मकानों को Free Hold करने की व्यवस्था वर्ष 2019 में तत्कालीन रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में लागू की गई थी. इस व्यवस्था का उद्देश्य पुराने लीजधारकों को निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद अपनी संपत्ति को Free Hold कराने का विकल्प देना था. इसके लिए बाजार दर की करीब 10 प्रतिशत राशि परिवर्तन शुल्क के रूप में लेने का प्रावधान बताया गया था.
क्यों खत्म करने की तैयारी?
आवास बोर्ड का कहना है कि Free Hold व्यवस्था के बाद उसकी संपत्तियों पर नियमों के विपरीत निर्माण और जमीन की प्रकृति में बदलाव जैसी शिकायतें सामने आई हैं. इसी वजह से बोर्ड ने पिछले करीब आठ महीने से Free Hold की प्रक्रिया पर रोक लगा रखी है. अब बोर्ड ने इसे पूरी तरह खत्म कर दोबारा Lease Hold व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है.
पुराने कब्जेदारों और बकायेदारों के सामने भी चुनौती
आवास बोर्ड की कई जमीनों और मकानों पर लंबे समय से रह रहे लोगों के लिए भी यह मामला महत्वपूर्ण है. बोर्ड ने 10 साल से कब्जे में रहने वाले लोगों को निर्धारित दर पर संपत्ति अपने नाम कराने का विकल्प दिया था. हालांकि, कई लोगों के लिए निर्धारित कीमत ज्यादा होने के कारण प्रक्रिया पूरी करना मुश्किल हो रहा है. इसके अलावा कुछ आवंटियों पर आवास बोर्ड का पुराना बकाया भी है. बकाया रकम पर ब्याज जुड़ने से देनदारी बढ़ती गई, जिसके कारण कई मामलों में रजिस्ट्री और NOC की प्रक्रिया भी प्रभावित हुई.
जिन्हें Free Hold की अनुमति मिल चुकी है, उनका क्या होगा?
सबसे बड़ा सवाल उन लोगों को लेकर है, जिन्हें पहले ही Free Hold की अनुमति मिल चुकी है. आवास बोर्ड के एमडी सूरज कुमार के मुताबिक, जिन लोगों को Free Hold की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है, उन्हें प्रस्तावित बदलाव से परेशानी नहीं होगी. हालांकि, जिन लोगों की Free Hold प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, उनके मामले में आगे क्या नियम लागू होंगे, यह राज्य सरकार के फैसले के बाद ही स्पष्ट होगा.
अब सरकार के फैसले का इंतजार
फिलहाल आवास बोर्ड का प्रस्ताव राज्य सरकार के पास है. सरकार अगर प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो झारखंड में आवास बोर्ड की जमीन और मकानों से जुड़े Free Hold और Lease Hold नियमों में बदलाव हो सकता है. ऐसे में सबसे ज्यादा नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार इस प्रस्ताव पर क्या फैसला लेती है और अधूरी Free Hold प्रक्रियाओं में शामिल आवंटियों के लिए क्या व्यवस्था तय की जाती है.
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