RANCHI : चतरा से लोजपा विधायक जनार्दन पासवान के बेटे सौरभ पासवान के कथित अपहरण के मामले ने सोमवार को झारखंड की राजनीति में हलचल पैदा कर दी. रांची स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के बाहर से उनके अपहरण की खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इसे लेकर चर्चा तेज हो गई. विधायक जनार्दन पासवान ने पुलिस को घटना की जानकारी दी. इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने भी इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया था.

हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच के बाद इस मामले की तस्वीर अलग नजर आई. रांची के सिटी एसपी पारस राणा के मुताबिक, सौरभ पासवान को पुलिस ने कुछ ही घंटों में सुरक्षित बरामद कर लिया. इसके बाद पुलिस ने पूरे घटनाक्रम की जांच की तो कथित अपहरण की कहानी पर कई सवाल खड़े हुए.
क्या हुआ था एमिटी यूनिवर्सिटी के बाहर?
पुलिस के अनुसार, सौरभ पासवान विश्वविद्यालय के बाहर अपने कुछ दोस्तों के साथ मौजूद थे.आरोप है कि उस दौरान उन्होंने शराब का सेवन किया था. इसी बीच किसी दूसरे छात्र के साथ उनका विवाद हो गया. विवाद बढ़ने के बाद दोनों पक्षों के बीच गाली-गलौज और मारपीट हुई. पुलिस के मुताबिक, दूसरे पक्ष के कुछ युवकों ने सौरभ पासवान को उनकी गाड़ी से उतारकर दूसरी गाड़ी में बैठाया और बाद में विधानसभा के पास छोड़ दिया.
यही घटनाक्रम बाद में कथित अपहरण के रूप में सामने आया. पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की जांच की गई और सौरभ पासवान का चिकित्सकीय परीक्षण तथा ब्रेथ एनालाइजर जांच भी कराई गई. पुलिस जांच में शराब के सेवन की बात सामने आने का दावा किया गया है.
राजनीतिक विवाद क्यों बढ़ा ?
सौरभ पासवान के कथित अपहरण की खबर सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई थी. विधायक के बेटे के लापता होने की सूचना के बाद पुलिस पर दबाव बढ़ा और मामले को लेकर कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे. भाजपा की ओर से भी इस मामले को गंभीर बताया गया था और आंदोलन की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई थी.
लेकिन पुलिस जांच में जब घटनाक्रम की दूसरी तस्वीर सामने आई, तो राजनीतिक बयानबाजी पर भी सवाल उठने लगे. इस पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यही है कि क्या किसी राजनीतिक व्यक्ति से जुड़े मामले में पूरी जांच और तथ्यों की पुष्टि से पहले ही उसे अपहरण या किसी बड़े अपराध का रूप देना उचित है?
मामला अब किस दिशा में?
पुलिस ने घटना में शामिल बताए जा रहे युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है. पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल यह मामला केवल सौरभ पासवान के कथित अपहरण तक सीमित नहीं रह गया है. इसने राजनीतिक प्रभाव वाले मामलों में पुलिस की भूमिका, सार्वजनिक बयानबाजी और जांच पूरी होने से पहले किसी घटना को राजनीतिक मुद्दा बनाने पर भी बहस छेड़ दी है. इस घटना का अंतिम सच पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई से ही स्पष्ट होगा. लेकिन एक बात जरूर सामने आती है,किसी भी हाई-प्रोफाइल मामले में शुरुआती दावे से पहले तथ्यों की पूरी पड़ताल बेहद जरूरी है.
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