RANCHI : झारखंड भाजपा में युवाओं की कोई कमी नहीं है…कमी है तो बस एक ऐसे युवा की, जिसे युवा मोर्चे का अध्यक्ष बनाया जा सके! भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नवीन खुद युवा चेहरों में गिने जाते हैं, पार्टी लगातार युवा नेतृत्व की बात करती है, लेकिन हालत यह है कि सात मोर्चों में से छह के अध्यक्ष तो मिल गए, मगर युवा मोर्चे के लिए एक अध्यक्ष अब तक नहीं मिल पाया. वह भी उस वक्त, जब झारखंड के छात्र और युवा अपने मुद्दों को लेकर सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं.
इसे संगठनात्मक देरी कहें या किसी बड़े राजनीतिक चेहरे की तलाश, सवाल तो उठना तय है. आखिर जिस वर्ग को आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बनाने की तैयारी हो रही है, उसी वर्ग के संगठन का नेतृत्व तय करने में इतनी माथापच्ची क्यों?

छह मोर्चे बने, युवा मोर्चा क्यों अटका?
झारखंड भाजपा ने प्रदेश संगठन को विस्तार देते हुए सात में से छह मोर्चों के अध्यक्षों की घोषणा कर दी है. मनोज वाजपेयी महतो को ओबीसी मोर्चा, अर्जुन सिंह को किसान मोर्चा, रंजन भारती को अनुसूचित जाति मोर्चा, सन्नी टोप्पो को अनुसूचित जनजाति मोर्चा, सीमा सिंह को महिला मोर्चा और मो. ताजदार आलम को अल्पसंख्यक मोर्चा की जिम्मेदारी दी गई है.अब इन सभी मोर्चों के अध्यक्ष अपनी-अपनी टीम तैयार करेंगे. लेकिन युवा मोर्चा की तस्वीर अभी साफ नहीं है. नई प्रदेश टीम के गठन के बाद भी युवा मोर्चे के अध्यक्ष के नाम की घोषणा नहीं हुई है.
यहीं से राजनीतिक सवाल शुरू होता है. जब बाकी छह मोर्चों के लिए चेहरे तय हो सकते हैं तो युवाओं के लिए एक चेहरा तय करने में इतनी मुश्किल क्यों?
और यह देरी भी ऐसे समय में…
युवा मोर्चे का गठन ऐसे समय में अटका है, जब झारखंड में छात्र और युवा कई मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं. रोजगार, नियुक्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं और परीक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर युवाओं में लगातार नाराजगी दिखाई देती रही है.
विपक्ष के लिए यह स्वाभाविक तौर पर सरकार को घेरने का बड़ा अवसर है. आंदोलन कर रहे युवाओं के बीच पहुंच बनाना, उनके मुद्दों को राजनीतिक आवाज देना और सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक अभियान चलाना किसी भी विपक्षी दल के लिए महत्वपूर्ण रणनीति हो सकती है.
लेकिन भाजपा के सामने फिलहाल एक अलग ही सवाल खड़ा है – युवा आंदोलन कर रहे हैं और भाजपा युवा मोर्चे के अध्यक्ष की तलाश कर रही है.

नितिन नवीन भी युवा, फिर झारखंड में युवा चेहरा कहां?
इस पूरे मामले में नितिन नवीन का नाम भी दिलचस्प है. प्रदेश प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है और वे भाजपा की युवा पीढ़ी के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं.
ऐसे में झारखंड भाजपा के सामने यह चुनौती और बड़ी हो जाती है कि युवा मोर्चे की कमान किसे दी जाए. पार्टी को ऐसा चेहरा चाहिए जो सिर्फ पद संभालने वाला नेता न हो, बल्कि युवाओं के बीच अपनी पहचान बना सके. छात्र राजनीति, रोजगार के मुद्दे, आंदोलन, सोशल मीडिया और संगठन – इन सभी मोर्चों पर सक्रिय रहने वाला चेहरा भाजपा के लिए ज्यादा उपयोगी साबित हो सकता है.
2029 के लिए अभी से शुरू करनी होगी तैयारी
झारखंड में अगले तीन वर्षों में विधानसभा चुनाव होने हैं. भाजपा लगातार दो विधानसभा चुनावों से सत्ता से बाहर है. ऐसे में पार्टी के लिए अभी से संगठन को चुनावी तैयारी में उतारना जरूरी है. छह मोर्चों के अध्यक्ष तय होने के बाद संगठन का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है. लेकिन युवा मोर्चा इस संरचना की सबसे महत्वपूर्ण कड़ियों में से एक है.
युवा वर्ग किसी भी चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है. ऐसे में भाजपा अगर 2029 में सत्ता वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है, तो उसे युवाओं के बीच सिर्फ चुनाव के समय नहीं, बल्कि अभी से लगातार सक्रिय रहना होगा.
सवाल सिर्फ अध्यक्ष का नहीं, रणनीति का है
युवा मोर्चे का अध्यक्ष कौन बनेगा, यह फैसला अब सिर्फ संगठनात्मक नियुक्ति नहीं रह गया है. चुना गया चेहरा आने वाले वर्षों में भाजपा की युवा राजनीति का प्रतिनिधित्व करेगा. अगर पार्टी किसी आंदोलनकारी या छात्र पृष्ठभूमि वाले चेहरे को आगे करती है तो उसका संकेत अलग होगा. अगर संगठन के पुराने और अनुभवी युवा कार्यकर्ता पर भरोसा किया जाता है तो रणनीति अलग मानी जाएगी.
यानी इस एक नियुक्ति से भाजपा यह भी तय करेगी कि वह झारखंड के युवाओं के बीच आंदोलन की राजनीति, संगठन की राजनीति या चुनावी राजनीति – किस रास्ते से आगे बढ़ना चाहती है. फिलहाल छह मोर्चों को अध्यक्ष मिल चुके हैं. सातवां मोर्चा अब भी इंतजार में है.
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विडंबना देखिए – झारखंड के युवा अपने मुद्दों के लिए सड़क पर हैं और भाजपा के पास उन युवाओं की आवाज बनने वाले संगठन का अध्यक्ष तक तय नहीं है. अब देखना यह है कि यह इंतजार कब खत्म होता है और भाजपा युवा मोर्चे की कमान किस चेहरे को सौंपती है.
