RANCHI : शहर में नगर निगम की ओर से चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान का विरोध अब तेज होता जा रहा है. मंगलवार को बड़ी संख्या में फुटपाथ दुकानदार. ठेला. रेहड़ी और गुमटी संचालक रांची नगर निगम कार्यालय पहुंचे और जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने निगम प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था और पर्याप्त पूर्व सूचना के उन्हें उनके व्यवसाय स्थल से हटाया जा रहा है. जिससे उनकी आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है.
इसे भी पढ़े : पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक का निधन, 83 साल की उम्र में रांची में ली अंतिम सांस

पुनर्वास से पहले बेदखली पर उठाए सवाल
दुकानदारों का कहना है कि वे वर्षों से शहर के अलग-अलग हिस्सों में छोटा व्यवसाय कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं. लेकिन हाल के दिनों में नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम लगातार अभियान चलाकर सब्जी बाजार. ठेले. गुमटी और अन्य अस्थायी दुकानों को हटा रही है. इससे सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट पैदा हो गया है. प्रदर्शन के दौरान दुकानदारों ने दावा किया कि नगर निगम की कार्रवाई स्ट्रीट वेंडर्स (जीविका संरक्षण एवं सड़क विक्रय विनियमन) अधिनियम. 2014 की भावना और प्रावधानों के अनुरूप नहीं है. उनका कहना है कि कानून के तहत किसी भी पात्र या पंजीकृत स्ट्रीट वेंडर को हटाने से पहले सर्वेक्षण. नोटिस और पुनर्वास अथवा वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराना अनिवार्य है. आरोप है कि इन प्रक्रियाओं का पालन किए बिना सीधे बेदखली की कार्रवाई की जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि नगर निगम पहले शहर के सभी फुटपाथ दुकानदारों का सर्वे कर उन्हें वेंडिंग जोन या उपयुक्त स्थान आवंटित करे. इसके बाद ही नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाए. उनका कहना है कि पुनर्वास के बिना किसी गरीब दुकानदार को हटाना उसके परिवार की आजीविका छीनने जैसा है.
इसे भी पढ़े : CM हेमंत: झारखंड को माइनिंग से माइंड बेस्ड स्टेट बनाना है
दुकानदारों ने स्पष्ट किया कि वे शहर को अतिक्रमण मुक्त बनाने के विरोधी नहीं हैं. बल्कि चाहते हैं कि कार्रवाई कानून के दायरे में और मानवीय दृष्टिकोण के साथ की जाए. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा. तथा शहर के विभिन्न क्षेत्रों के दुकानदार भी चरणबद्ध तरीके से इसमें शामिल होंगे. वहीं. रांची नगर निगम का कहना है कि सड़क. फुटपाथ और सार्वजनिक स्थलों पर अवैध कब्जे के कारण यातायात प्रभावित होता है और आम नागरिकों को परेशानी होती है. इसी उद्देश्य से नियमित रूप से अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाया जा रहा है.
इस बीच. सीपीआई के प्रदेश सचिव महेंद्र पाठक ने भी प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कहा कि शहर में करीब 50 हजार फुटपाथ दुकानदार हैं. जबकि अब तक लगभग दो हजार लोगों के पुनर्वास की ही व्यवस्था हो सकी है. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले सभी पात्र दुकानदारों के पुनर्वास की व्यवस्था करनी चाहिए. उसके बाद ही बेदखली की कार्रवाई की जानी चाहिए.
