Ranchi : कर्नाटक में कांग्रेस ने जैसे-तैसे सियासी आग बुझाई, लेकिन अब झारखंड में पार्टी के भीतर बगावत की चिंगारी भड़क उठी है. प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के खिलाफ नेताओं ने मोर्चा खोल दिया है.दिल्ली तक शिकायतों का दौर जारी है. जंबो प्रदेश कमेटी और टैलेंट हंट के फैसलों ने संगठन में नया तूफान खड़ा कर दिया है। कई बड़े नेता अब अध्यक्ष की कुर्सी पर नजर गड़ाए बैठे हैं और आलाकमान के दरबार में लगातार लॉबिंग कर रहे हैं .हालात ऐसे हैं, कि झारखंड कांग्रेस इस वक्त गुटबाजी, नाराजगी और सत्ता संघर्ष के बीच पूरी तरह उलझी नजर आ रही है.

टैलेंट हंट और मीडिया टीम गठन पर कांग्रेस में घमासान
झारखंड कांग्रेस में टैलेंट हंट और मीडिया टीम गठन को लेकर विवाद गहरा गया है. केंद्रीय नेतृत्व द्वारा नियुक्त टैलेंट हंट समन्वयक हामिद हुसैन ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश पर गंभीर आरोप लगाए हैं.सूत्रों के मुताबिक हामिद हुसैन ने पार्टी नेतृत्व को पत्र लिखकर कहा है कि टैलेंट हंट प्रक्रिया के नियमों का पालन नहीं किया गया.उन्होंने दावा किया कि चयनित योग्य उम्मीदवारों को हटाकर अध्यक्ष के करीबी लोगों को मीडिया टीम में शामिल किया गया।इस मामले के सामने आने के बाद झारखंड कांग्रेस में अंदरूनी असंतोष और गुटबाजी की चर्चा तेज हो गई है.
कांग्रेस की जंबो कमेटी में अंदरूनी कलह उजागर
कांग्रेस द्वारा गठित भारी-भरकम जंबो जेट प्रदेश कमेटी में अब अंदरूनी खेमाबंदी खुलकर सामने आने लगी है. संगठन के भीतर पदाधिकारियों के बीच तालमेल की कमी और अलग-अलग गुटों की सक्रियता से पार्टी में असंतोष बढ़ता दिख रहा है.
सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के आसपास एक खास लॉबी सक्रिय है, जिसके कारण कई वरिष्ठ नेता खुद को संगठन से अलग-थलग महसूस कर रहे हैं. पार्टी के पूर्व अध्यक्षों, सांसदों और मौजूदा विधायकों ने भी अपने-अपने गुट बना लिए हैं, जिससे संगठनात्मक एकजुटता कमजोर पड़ती नजर आ रही है.
टैलेंट हंट के समन्वयक हामिद हुसैन ने भी अपनी आपत्तियों में गुटबाजी और खास लॉबी के प्रभाव की ओर इशारा किया था. लगातार बढ़ती अंदरूनी खींचतान ने झारखंड कांग्रेस की सियासी चुनौती बढ़ा दी है.
राधाकृष्ण किशोर के तेवर से सियासत गरम
झारखंड कांग्रेस में जारी अंदरूनी विवाद के बीच प्रदेश नेतृत्व के लिए सबसे बड़ी चुनौती अब वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर बनते नजर आ रहे हैं. उन्होंने संगठन के कई फैसलों पर खुलकर नाराजगी जाहिर की है.
भारी-भरकम प्रदेश कमेटी के गठन पर सवाल उठाते हुए राधाकृष्ण किशोर ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश को लगातार तीन पत्र लिखे. सूत्रों के मुताबिक उन्होंने संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता और संतुलन की कमी पर भी आपत्ति जताई है.
मामला जब प्रदेश प्रभारी के. राजू तक पहुंचा, तब वित्त मंत्री ने राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर प्रदेश नेतृत्व की चुप्पी को भी सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया. इससे झारखंड कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान और तेज होती दिख रही है.
भाषा विवाद में मंत्रियों के बीच नहीं दिखा समन्वय
झारखंड कांग्रेस में जारी अंदरूनी खींचतान अब नीतिगत मुद्दों तक पहुंच गई है. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने संगठनात्मक सवालों के साथ-साथ भाषाई मुद्दों पर भी पार्टी नेतृत्व को घेरा है.उन्होंने मगही, अंगिका और भोजपुरी भाषाओं को लेकर कांग्रेस का आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग की है. राधाकृष्ण किशोर का कहना है कि ऐसे संवेदनशील मुद्दों पर पार्टी की स्पष्ट नीति सामने आनी चाहिए.
इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस संगठन और सरकार के बीच बढ़ती दूरी को उजागर कर दिया है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मंत्रियों और संगठन के बीच समन्वय की कमी से सरकार और पार्टी दोनों की छवि प्रभावित हो रही है.
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