Ranchi : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया गया.राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन के गणतंत्र मंडप में आयोजित समारोह में वर्ष 2026 के पहले पद्म पुरस्कार प्रदान किए. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर शिबू सोरेन को पद्म भूषण देने की घोषणा की थी.
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जानिए शिबू सोरेन को पद्म भूषण मिलने की बड़ी वजह
झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक शिबू सोरेन को सार्वजनिक जीवन में उनके लंबे योगदान और झारखंड राज्य गठन में निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका के लिए पद्म भूषण सम्मान दिया गया है.दिशोम गुरु’ के नाम से प्रसिद्ध शिबू सोरेन ने आदिवासी अधिकारों और अलग झारखंड राज्य की मांग को लेकर दशकों तक आंदोलन किया. उनके संघर्ष और राजनीतिक दबाव के बाद बिहार से अलग झारखंड राज्य का गठन हुआ
शिबू सोरेन ने अपने राजनीतिक जीवन में कई अहम जिम्मेदारियां निभाईं. उन्होंने 1977 में पहला लोकसभा चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद भी वे लगातार जमीनी राजनीति से जुड़े रहे और 1980 में दुमका लोकसभा सीट से जीत हासिल कर संसद पहुंचे।इसके बाद शिबू सोरेन कई बार लोकसभा और राज्यसभा के सदस्य बने.
वे झारखंड के मुख्यमंत्री भी रहे और केंद्र की मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय मंत्री की जिम्मेदारी संभाली. राजनीतिक जीवन के उतार-चढ़ाव के बीच भी वे आदिवासी समाज, जल-जंगल-जमीन और झारखंड के अधिकारों की आवाज बने रहे.
131 हस्तियों को पद्म पुरस्कार
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 25 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 131 पद्म पुरस्कार विजेताओं के नामों की घोषणा की थी. पहले चरण में देश की 66 हस्तियों को सम्मानित किया गया, जबकि बाकी पुरस्कार विजेताओं को दूसरे चरण में सम्मान प्रदान किया जाएगा.
