Nakib Ziya
RANCHI : बिहार की राजनीति इन दिनों एक बेहद अहम मोड़ पर खड़ी है. राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हालिया कदमों के बाद यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या राज्य को जल्द नया मुख्यमंत्री मिलने वाला है और क्या उनके लंबे राजनीतिक दौर का समापन करीब है.
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14 अप्रैल की तिथि महत्वपूर्ण
नीतीश कुमार के दिल्ली पहुंचने और राज्यसभा की शपथ लेने की संभावनाओं के बीच सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि वे पार्टी नेताओं के साथ महत्वपूर्ण बैठकों में शामिल होंगे. इससे पहले 13 अप्रैल को बुलाई गई कैबिनेट बैठक में उनके कार्यकाल की उपलब्धियों की समीक्षा की जाएगी. इसके बाद 14 अप्रैल को उनके इस्तीफे की चर्चाएं तेज हैं. जबकि 15 अप्रैल को नई सरकार के गठन की अटकलें लगाई जा रही हैं.
नीतीश रहे हैं कुशल रणनीतिकार
नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. उन्होंने समय-समय पर राजनीतिक समीकरण बदले. लेकिन हर बार सत्ता में अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी. उन्हें एक कुशल रणनीतिकार माना जाता है. जो परिस्थितियों के अनुसार फैसले लेने में माहिर हैं. यही कारण है कि आज भी बिहार की राजनीति काफी हद तक उनके इर्द-गिर्द ही घूमती है.
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सम्राट चौधरी प्रमुख दावेदार
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनके बाद सत्ता की कमान किसके हाथ में जाएगी. इस बीच सम्राट चौधरी का नाम प्रमुख दावेदार के रूप में सामने आ रहा है. यदि ऐसा होता है. तो यह बिहार के इतिहास में पहली बार होगा जब भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा.
बताया जा रहा है कि दिल्ली में भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है. हालांकि. पार्टी किसी भी फैसले से पहले नीतीश कुमार की राय को महत्व दे सकती है.
निशांत कुमार की भी चर्चा
इसी बीच एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है. जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर समर्थन बढ़ता दिख रहा है. कई मौकों पर उनके समर्थन में नारे भी सुनाई दिए हैं. इससे यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें भी भविष्य में बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी मिल सकती है.
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार. यदि सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री और निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया जाता है. तो यह एक नया सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बन सकता है. हालांकि. भाजपा के सामने अपने पारंपरिक वोट बैंक को संतुलित रखने की चुनौती भी बनी हुई है.
मंत्रिमंडल पर भी चर्चा
संभावित मंत्रिमंडल को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं. कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा के 14-15 मंत्री हो सकते हैं. जबकि जेडीयू को एक उपमुख्यमंत्री सहित 15-16 मंत्री पद मिल सकते हैं.
कुल मिलाकर. बिहार की राजनीति इस समय अनिश्चितता और संभावनाओं के बीच खड़ी है. आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि राज्य की सत्ता की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी.
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