Ritika
RANCHI : हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ प्रखंड के कोसुंभा गांव में 12 वर्षीय बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना को लेकर पूरे राज्य में आक्रोश है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार और पुलिस-प्रशासन से जवाब तलब किया है. न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य के डीजीपी, गृह सचिव और हजारीबाग के एसपी को नोटिस जारी कर मामले की स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. अदालत ने इस मामले को आगे की सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखने को भी कहा है.
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एफआईआर में देरी, अदालत नाराज
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि यह घटना बेहद क्रूर और अमानवीय है, जिसकी गंभीरता की तुलना 2012 में हुई निर्भया कांड जैसी दर्दनाक घटना से की जा रही है. अदालत के समक्ष इस घटना से जुड़ी समाचार पत्रों की रिपोर्ट भी रखी गई, जिसके बाद कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए तुरंत झारखंड स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सचिव और हजारीबाग एसपी को वर्चुअल रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया. जानकारी दी गई कि यह घटना 24 मार्च को हुई थी, जबकि प्राथमिकी 25 मार्च को दर्ज की गई. एफआईआर दर्ज करने में हुई देरी पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
अभी तक आरोपियों का गिरफ्त में नहीं होना चिंताजनक
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस से पूछा कि अब तक जांच में क्या प्रगति हुई है और क्या मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जा रही है. पुलिस की ओर से बताया गया कि जांच जारी है और मोबाइल लोकेशन के आधार पर आरोपी तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. इस पर अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि कई दिन बीत जाने के बाद भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है. कोर्ट ने यह भी पूछा कि क्या पीड़िता के कपड़े और अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए हैं, क्योंकि देरी होने से जांच प्रभावित हो सकती है. कोर्ट ने कहा कि अगर समाचार पत्रों के माध्यम से यह घटना सामने नहीं आती तो कोर्ट के समक्ष इसकी जानकारी नहीं हो सकती थी.
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