RANCHI : झारखंड में कोयला ढुलाई से जुड़े एक बड़े घूसकांड का खुलासा हुआ है, जिसने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिया है. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में सामने आया है कि किस तरह सरकारी पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से लाखों रुपये की कमाई की गई और फिर उसे छिपाने के लिए पूरा मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क खड़ा किया गया. इस मामले में ईडी ने रांची की विशेष अदालत में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के सहायक सुरक्षा उप निरीक्षक संजीव कुमार सिंह समेत चार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया है. आरोपियों में संजीव कुमार की पत्नी पूनम देवी, छोटे भाई गोपाल कुमार और निजी कोयला ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार शामिल हैं. यह मामला सिर्फ रिश्वतखोरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पैसे को सफेद बनाने के लिए सुनियोजित तरीके से बैंक खातों का इस्तेमाल भी किया गया है.
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सरकारी पद का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए
ईडी की जांच के मुताबिक, संजीव कुमार सिंह उस समय बड़का सयाल क्षेत्र में सुरक्षा प्रभारी के रूप में तैनात थे और कोयला खदानों से होने वाली ढुलाई पर उनका सीधा नियंत्रण था. इसी पद का फायदा उठाकर उन्होंने निजी ट्रांसपोर्टर राहुल कुमार से लगभग 5 लाख रुपये की रिश्वत ली. यह रकम सीधे उनकी पत्नी पूनम देवी के बैंक खाते में ट्रांसफर की गई थी, ताकि लेन-देन पर शक कम हो. जांच एजेंसी का कहना है कि यह पैसा कोयला ढुलाई में अनुचित लाभ दिलाने के बदले लिया गया था. यानी सरकारी व्यवस्था का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए किया गया, जो कि एक गंभीर आपराधिक साजिश का हिस्सा है.
खाते में जमा रकम का वैध स्रोत नहीं
मामले में सबसे अहम खुलासा तब हुआ जब पूनम देवी के बैंक खाते की जांच की गई. ईडी को वहां करीब 4.46 लाख रुपये की अतिरिक्त नकद जमा राशि मिली, जिसका कोई वैध स्रोत नहीं बताया जा सका. पूछताछ के दौरान भी वह इस पैसे के बारे में संतोषजनक जवाब नहीं दे पाईं. एजेंसी का आरोप है कि पूनम देवी ने जानबूझकर अपने खाते का इस्तेमाल अवैध कमाई को रखने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया. इसके बाद इस रकम में से करीब 4 लाख रुपये संजीव कुमार के भाई गोपाल कुमार के खाते में ट्रांसफर कर दिए गए, जिससे साफ होता है कि पूरे परिवार के स्तर पर पैसे को छिपाने की कोशिश की जा रही थी.
सभी के खाते अस्थायी सीज
जांच में यह भी सामने आया कि गोपाल कुमार ने इस रकम को अपने खाते में आने के सिर्फ सात दिनों के भीतर ही तेजी से खर्च कर दिया. इसमें नकद निकासी, अन्य लोगों को पैसे ट्रांसफर करना और यहां तक कि अपने वाहन लोन की ईएमआई चुकाना भी शामिल है. यानी अवैध तरीके से कमाए गए पैसे को जल्दी-जल्दी अलग-अलग माध्यमों से खर्च कर उसे ट्रेस करना मुश्किल बनाया गया. ईडी ने कार्रवाई करते हुए आरोपियों के बैंक खातों में जमा कुल 9.46 लाख रुपये की राशि को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया है. इसमें संजीव कुमार सिंह के एसबीआई खाते में मौजूद लगभग 58 हजार रुपये और गोपाल कुमार के खाते में करीब 8.88 लाख रुपये शामिल हैं. फिलहाल यह मामला न्यायालय में विचाराधीन है और आने वाले समय में इस पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है. यह पूरा प्रकरण साफ दिखाता है कि कैसे छोटे स्तर की रिश्वत भी एक बड़े संगठित भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का रूप ले सकती है.
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