रांची/गिरिडीह : झारखंड की राजनीति में मंत्री और गिरिडीह से JMM विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उनकी राजनीतिक विरासत को लेकर है. यदि भविष्य में गिरिडीह विधानसभा सीट पर उपचुनाव होता है, तो JMM के सामने सिर्फ नया उम्मीदवार चुनने की चुनौती नहीं होगी, बल्कि 2024 के बेहद करीबी मुकाबले को दोहराने या उससे आगे निकलने की चुनौती भी होगी. 2024 में सुदिव्य कुमार सोनू ने BJP के निर्भय कुमार शाहाबादी को महज 3,838 वोटों से हराया था. यही आंकड़ा बताता है कि गिरिडीह में मुकाबला पहले ही काफी कड़ा हो चुका था. अब सुदिव्य कुमार सोनू के नहीं रहने से यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनकी चुनावी ताकत का कितना हिस्सा व्यक्तिगत जनाधार था और कितना JMM के संगठन का.

2019 से 2024 में बदला चुनावी गणित
गिरिडीह की राजनीति को समझने के लिए पिछले दो विधानसभा चुनावों के आंकड़े अहम हैं. 2019 में JMM के सुदिव्य कुमार सोनू को 80,871 वोट मिले थे, जबकि BJP के निर्भय कुमार शाहाबादी को 64,987 वोट. जीत का अंतर 15,884 वोट था. 2024 में सुदिव्य कुमार सोनू ने 94,042 वोट हासिल किए. वहीं BJP के निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट मिले. अंतर घटकर 3,838 वोट रह गया. यानी पांच साल में JMM के वोट करीब 13 हजार बढ़े, लेकिन BJP के वोट इससे भी ज्यादा, करीब 25 हजार बढ़े. नतीजा यह हुआ कि JMM सीट तो बचाने में सफल रही, लेकिन दोनों दलों के बीच की दूरी काफी कम हो गई. यही बदलाव अब सुदिव्य कुमार सोनू के बाद की राजनीति का आधार बन सकता है.
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JMM के सामने विरासत का सवाल
सुदिव्य कुमार सोनू ने 2019 और 2024 में लगातार दो बार गिरिडीह से जीत दर्ज की. ऐसे में उनके निधन के बाद स्वाभाविक सवाल है कि क्या उनका व्यक्तिगत जनाधार भी उनके साथ चला गया या वह JMM के संगठन के साथ बना रहेगा. इसका जवाब चुनावी आंकड़ों से पूरी तरह नहीं मिलेगा. इसके लिए यह देखना होगा कि स्थानीय कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के बीच सुदिव्य कुमार सोनू की स्वीकार्यता किस तरह बनी थी. यही वजह है कि संभावित उपचुनाव में JMM का उम्मीदवार कौन होगा, यह फैसला बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है. सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत को परिवार आगे बढ़ाता है या संगठन किसी नए चेहरे पर भरोसा करता है-यह अभी स्पष्ट नहीं है. परिवार के किसी सदस्य के नाम की चर्चा जरूर हो सकती है, लेकिन आधिकारिक फैसला आने तक किसी नाम को उम्मीदवार मानना जल्दबाजी होगी.
BJP के लिए 2024 का प्रदर्शन बड़ा आधार
दूसरी तरफ BJP के पास भी नजरअंदाज करने लायक आंकड़े नहीं हैं. 2024 में निर्भय कुमार शाहाबादी को 90,204 वोट मिले थे. वह सुदिव्य कुमार सोनू से सिर्फ 3,838 वोट पीछे रहे. इसलिए संभावित उपचुनाव की स्थिति में BJP के सामने अपनी इस मजबूत स्थिति को जीत में बदलने का मौका होगा. लेकिन इसके लिए पार्टी को उम्मीदवार, संगठन और स्थानीय मुद्दों पर रणनीति तय करनी होगी. सिर्फ सुदिव्य कुमार सोनू की अनुपस्थिति को BJP की जीत का संकेत मानना सही नहीं होगा. चुनावी नतीजा उम्मीदवार और उस समय के राजनीतिक माहौल पर भी निर्भर करेगा.
JLKM का 10,787 वोट वाला फैक्टर
गिरिडीह के चुनावी गणित में तीसरा महत्वपूर्ण आंकड़ा JLKM का है. 2024 में JLKM के नवीन आनंद को 10,787 वोट मिले थे. यह संख्या इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि JMM और BJP के बीच जीत का अंतर केवल 3,838 वोट था. हालांकि, यह मान लेना गलत होगा कि JLKM के ये वोट भविष्य में किसी एक दल को मिल जाएंगे. मतदाता का रुख चुनाव-दर-चुनाव बदल सकता है. फिर भी 2024 का परिणाम यह जरूर बताता है कि JLKM ने गिरिडीह में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. यदि पार्टी अपना आधार बढ़ाती है, तो वह अगले मुकाबले में तीसरा महत्वपूर्ण राजनीतिक कारक बन सकती है.
जातीय समीकरण से आगे देखना होगा
गिरिडीह के चुनावी समीकरण को केवल जातीय गणित से समझना भी पर्याप्त नहीं होगा. रोजगार, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य, पानी, व्यापार, शहरी सुविधाएं और स्थानीय विकास जैसे मुद्दे मतदाताओं के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं. उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और लोगों से उसका संपर्क भी महत्वपूर्ण रहेगा. इसलिए अगली राजनीतिक लड़ाई को समझने के लिए यह सवाल ज्यादा अहम होगा कि गिरिडीह का मतदाता पार्टी के साथ जाता है या उम्मीदवार के साथ.
JMM के लिए सिर्फ सीट नहीं, संगठन की परीक्षा
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद JMM के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके समर्थकों और स्थानीय संगठन को एकजुट रखने की होगी. अगर पार्टी नया चेहरा उतारती है, तो उसे सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक स्वीकार्यता और संगठनात्मक नेटवर्क की जगह भरनी होगी. वहीं परिवार के किसी सदस्य को आगे बढ़ाने की स्थिति में सहानुभूति एक कारक बन सकती है, लेकिन उसे चुनावी समर्थन में बदलने के लिए संगठन की सक्रियता जरूरी होगी. इसलिए संभावित उपचुनाव JMM के लिए सिर्फ एक सीट बचाने की लड़ाई नहीं, बल्कि यह परखने का मौका भी होगा कि सुदिव्य कुमार सोनू के बाद पार्टी का स्थानीय संगठन कितना मजबूत है.
तीन आंकड़े, एक बड़ा सवाल
गिरिडीह की पिछली दो चुनावी तस्वीरों को तीन आंकड़ों में समझा जा सकता है – 2019 : JMM की जीत का अंतर – 15,884 वोट , 2024 : JMM की जीत का अंतर – 3,838 वोट , 2024 में JLKM : 10,787 वोट इन आंकड़ों से साफ है कि गिरिडीह में मुकाबला लगातार करीबी हुआ है और तीसरे राजनीतिक खिलाड़ी की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण है. लेकिन अगला परिणाम केवल इन आंकड़ों से तय नहीं होगा. उम्मीदवारों का चयन, संगठन की ताकत, स्थानीय मुद्दे और मतदाताओं की प्राथमिकता तस्वीर बदल सकते हैं. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है-सुदिव्य कुमार सोनू के बाद गिरिडीह में JMM की विरासत कौन संभालेगा ? क्या परिवार का चेहरा आगे आएगा, संगठन किसी नए नेता पर दांव लगाएगा या कोई नया राजनीतिक विकल्प उभरेगा ?
दूसरी ओर BJP 2024 के अपने प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, जबकि JLKM अपने 10,787 वोट के आधार को मजबूत करने की कोशिश कर सकती है. यानी गिरिडीह की अगली राजनीतिक लड़ाई सिर्फ एक सीट का मुकाबला नहीं होगी. यह विरासत, संगठन और बदलते चुनावी समीकरणों की परीक्षा भी होगी.
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