RANCHI/BOKARO : बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों के नियोजन की मांग को लेकर जारी आंदोलन के बीच जिला प्रशासन ने रविवार सुबह बड़ी पहल की. दो दिनों से बंद प्लांट का मुख्य गेट खुलवा दिया गया है. सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर जगुआर, होमगार्ड और जिला बल के करीब 150 जवानों की तैनाती की गई है. हालांकि, विस्थापितों का आंदोलन नौवें दिन भी जारी है.
एसडीएम और एएसपी ने मौके पर पहुंचकर खुलवाया गेट
बोकारो स्टील प्लांट के सभी गेट पिछले दो दिनों से बंद थे, जिससे कर्मचारियों की आवाजाही बाधित हो रही थी. रविवार सुबह चास एसडीएम प्रांजल ढांडा और एएसपी वेदांत शंकर मौके पर पहुंचे. अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से बातचीत की, जिसके बाद प्लांट का मुख्य गेट खुलवाया गया. गेट खुलने के बाद ए शिफ्ट के कर्मचारियों की आवाजाही शुरू हो गई.

जहरीली गैस के संभावित लीकेज को लेकर बढ़ी चिंता
चास एसडीएम प्रांजल ढांडा के मुताबिक, प्लांट में जहरीली गैसों की मौजूदगी के कारण संभावित गैस लीकेज को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ गई थीं. इसी को ध्यान में रखते हुए मुख्य गेट खुलवाने का निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर प्लांट के अन्य गेट भी खुलवाए जाएंगे. एसडीएम ने बताया कि फिलहाल स्थिति शांतिपूर्ण है. कर्मचारियों के बीच बना भय का माहौल धीरे-धीरे कम हो रहा है और ए शिफ्ट का संचालन सामान्य एवं शांतिपूर्ण तरीके से शुरू हो गया है.
सुरक्षा में 150 जवान तैनात, संचालन बाधित नहीं करने की अपील
एएसपी वेदांत शंकर ने बताया कि प्लांट की सुरक्षा के लिए जगुआर, होमगार्ड और जिला बल के करीब 150 जवानों को तैनात किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि विस्थापित आंदोलनकारी अपने धरना स्थल पर आंदोलन जारी रख सकते हैं, लेकिन प्लांट के संचालन और कर्मचारियों की आवाजाही को बाधित नहीं करना चाहिए.
उत्पादन ठप होने से रोजाना 30 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान
गौरतलब है कि विस्थापितों के नियोजन की मांग को लेकर आंदोलन लगातार जारी है. प्लांट के गेट बंद रहने से उत्पादन और परिचालन पर असर पड़ने की बात सामने आई है. प्रबंधन ने उत्पादन ठप होने से प्रतिदिन करीब 30 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है. फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्लांट का संचालन सामान्य बनाए रखने, सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने और कर्मचारियों की आवाजाही बहाल करने की है. वहीं, विस्थापित अपनी नियोजन संबंधी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटे हुए हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन और प्रबंधन के प्रयासों से इस विवाद का समाधान निकल पाता है या आंदोलन आगे भी जारी रहता है.
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