RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के दौरान सीआईडी ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) के आधार पर कई अहम जानकारियां सामने रखी हैं. जांच के मुताबिक, आयोग की गोपनीय शाखा में कार्यरत पीए सोनू कुमार और मामले के अन्य आरोपियों के बीच लंबे समय तक फोन पर संपर्क रहा. इनमें ब्रज कुमार राम का नाम भी शामिल है, जिसके मोबाइल नंबर से सोनू कुमार का 83 बार संपर्क होने की बात सामने आई है.
जांच में ब्रज कुमार राम को उस व्यक्ति के रूप में उल्लेखित किया गया है, जो कथित तौर पर JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर 2.50 लाख रुपये नकद पहुंचाने गया था. सीआईडी की जांच में इन संपर्कों और कथित लेन-देन के बीच संबंधों की पड़ताल की जा रही है. हालांकि, कॉल रिकॉर्ड में संपर्क मिलना अपने आप में किसी अपराध में संलिप्तता का निर्णायक प्रमाण नहीं है.
श्वेता कुमारी गुप्ता से 635 बार संपर्क का दावा
जांच में शामिल कॉल डिटेल रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी सोनू कुमार के मोबाइल नंबर से तत्कालीन प्रभारी परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता के नंबर पर 14 अगस्त 2024 से 18 जुलाई 2026 के बीच कुल 635 बार संपर्क हुआ. यह अवधि प्राथमिकी दर्ज होने से दो दिन पहले तक की बताई गई है. सीआईडी के तकनीकी विश्लेषण में इन संपर्कों को जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं में शामिल किया गया है. अब जांच के लिहाज से यह अहम है कि इन फोन कॉल्स के पीछे क्या वजह थी और क्या इनका JPSC की परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से कोई संबंध था.
तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक सह सचिव से 119 बार बातचीत
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, सोनू कुमार के मोबाइल नंबर से तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक सह सचिव के नंबर पर 10 मई 2025 से 9 जुलाई 2026 के बीच 119 बार संपर्क हुआ. जांच एजेंसी इन संपर्कों की अवधि, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और मामले से जुड़े अन्य साक्ष्यों के साथ उनका मिलान कर रही है. इन कॉल्स की वास्तविक विषयवस्तु और कथित अनियमितताओं में उनकी भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा.
ब्रज कुमार राम से 83 बार संपर्क, ₹2.50 लाख पहुंचाने का आरोप
सीआईडी के मुताबिक, 4 सितंबर 2024 से 28 जनवरी 2026 के बीच सोनू कुमार और ब्रज कुमार राम के मोबाइल नंबरों के बीच 83 बार संपर्क हुआ. ब्रज कुमार राम पर आरोप है कि वह JPSC को काम दिलाने से संबंधित मामले में Binsys की ओर से कथित तौर पर एल ख्यांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर गया था और वहां 2.50 लाख रुपये नकद पहुंचाए थे. जांच एजेंसी इस कथित लेन-देन, संबंधित व्यक्तियों के बीच संपर्क और आयोग से जुड़े कार्यों के संदर्भ में साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है.
इस मामले में फोन पर हुई बातचीत की संख्या जांच का एक हिस्सा है. केवल कॉल की संख्या के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता. आरोपों की पुष्टि के लिए अन्य दस्तावेजी और तकनीकी साक्ष्यों का महत्व भी है.
JPSC की परीक्षा प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
मामले में JPSC के वर्तमान सचिव के निजी सहायक अरुण कुमार के बयान का भी उल्लेख किया गया है. उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनके बयान में तत्कालीन अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की नियुक्ति के बाद परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और श्वेता कुमारी गुप्ता की भूमिका को लेकर आरोप लगाए गए हैं. गोपनीय शाखा के पीए सोनू कुमार पर भी कथित तौर पर पूरे मामले की जानकारी होने और संबंधित व्यक्तियों के सहयोग का आरोप है. इन बयानों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच एजेंसी मामले की विभिन्न कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है. आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों का पक्ष सामने आना भी जरूरी है.
जांच के केंद्र में कॉल रिकॉर्ड और कथित लेन-देन
JPSC परीक्षा विवाद में अब कॉल डिटेल रिकॉर्ड, कथित नकद लेन-देन और आयोग के भीतर संबंधित पदों पर बैठे लोगों की भूमिका जांच के प्रमुख बिंदु बन गए हैं. सीआईडी की जांच से जुड़े इन विवरणों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं. हालांकि, मामले में अंतिम जिम्मेदारी तय करने के लिए जांच के निष्कर्ष, उपलब्ध साक्ष्य और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण होगा. जांच पूरी होने और सक्षम अदालत के निष्कर्ष आने तक सभी आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए.
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