JHARKHAND : झारखंड हाई कोर्ट ने कथित 450 एकड़ वन भूमि की अवैध बिक्री और कब्जे के मामले में दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया है.
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कोर्ट ने मामले में CBI और ED से जांच कराने की मांग को ठुकरा दिया.चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता शिव शंकर शर्मा के आरोप अधिकांशतः अतिरंजित और अपुष्ट हैं.
साथ ही उनकी विश्वसनीयता पर भी पहले से सवाल उठ चुका है. इसलिए केवल आरोपों के आधार पर CBI या ED जांच का आदेश नहीं दिया जा सकता.
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि वन विभाग और अन्य सक्षम प्राधिकारियों ने याचिका दायर होने से पहले ही कथित अतिक्रमण और वन भूमि के हस्तांतरण की जांच शुरू कर दी थी.
जहां अनियमितताएं मिलीं, वहां कार्रवाई भी की जा रही है.जांच में यह भी सामने आया कि याचिकाकर्ता द्वारा 450 एकड़ वन भूमि के अवैध हस्तांतरण का दावा सही नहीं है.
खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता वन अधिकारियों और अन्य उच्च पदस्थ अधिकारियों पर मिलीभगत के आरोपों का कोई ठोस साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका.
रिकॉर्ड से यह भी स्पष्ट हुआ कि कथित बिक्री विलेखों में वन विभाग द्वारा कोई NOC जारी नहीं किया गया था.
अदालत ने कहा कि इस मामले में जांच एजेंसियों की निष्क्रियता या पक्षपात का कोई प्रमाण नहीं है, इसलिए CBI या ED जांच का कोई औचित्य नहीं बनता.
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यह आदेश किसी भी आरोपित को क्लीन चिट नहीं है. लंबित कानूनी कार्रवाई कानून के अनुसार जारी रहेगी.
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