RANCHI : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने विशेष अदालत में पूरक आरोपपत्र दाखिल किया है. इस आरोपपत्र में परीक्षा पास कराने के नाम पर उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसे लेने, परीक्षा परिणाम से पहले उम्मीदवारों की सूची तैयार होने और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की भूमिका सामने आने की बात कही गई है.
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, CID ने आरोप लगाया है कि 11 उम्मीदवारों से परीक्षा पास कराने के नाम पर कुल एक करोड़ रुपये लिए गए। मामले में बुद्धेश्वर भगत समेत कुल 10 आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र में आरोप दर्ज किए जाने की बात कही गई है. जांच एजेंसी के मुताबिक, आरोपियों से जुड़े लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों से मिले डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) तथा बैंक खातों में हुए लेन-देन की जानकारी जांच का हिस्सा है. हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा.
परीक्षा परिणाम से 24 घंटे पहले मिली उम्मीदवारों की सूची?
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के दौरान आरोपियों के लैपटॉप से 24 उम्मीदवारों के नामों वाली एक सूची मिली. दावा है कि यह सूची परीक्षा परिणाम जारी होने से लगभग 24 घंटे पहले मौजूद थी. जांच में कथित तौर पर यह भी सामने आया कि सूची में शामिल 11 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी. CID का आरोप है कि इन उम्मीदवारों से परीक्षा में सफलता दिलाने के नाम पर पैसे लिए गए थे.
इस मामले में एक अहम सवाल यह है कि परिणाम से पहले उम्मीदवारों के नामों वाली सूची कैसे तैयार हुई और उसमें शामिल लोगों का चयन प्रक्रिया से क्या संबंध था. इन सवालों के जवाब जांच में जुटाए गए साक्ष्यों और अदालत में होने वाली सुनवाई से स्पष्ट हो सकेंगे.
बुद्धेश्वर भगत की क्या भूमिका बताई गई है?
रिपोर्टों के मुताबिक, बुद्धेश्वर भगत का कथित तौर पर परीक्षा घोटाले के मुख्य आरोपी से सीधा संपर्क था. उसे तकनीकी जानकारी रखने वाला व्यक्ति बताया गया है. CID की जांच से संबंधित रिपोर्टों में आरोप है कि उम्मीदवारों के मूल प्रमाणपत्र जमा कराने और बकाया रकम की वसूली से जुड़े काम में उसकी भूमिका थी. जांच एजेंसी ने कथित तौर पर डिजिटल साक्ष्यों और लेन-देन से जुड़ी जानकारी के आधार पर आरोपियों की भूमिका का आकलन किया है.
किन आरोपियों पर क्या आरोप हैं?
मीडिया रिपोर्टों में उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपियों की कथित भूमिका इस प्रकार बताई गई है ये आरोप हैं, अदालत से साबित हुए तथ्य नहीं.
| आरोपी | जांच में सामने आए कथित आरोप |
|---|---|
| धर्मेंद्र कुमार | रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन JPSC अध्यक्ष के साथ उनकी बातचीत के 73 रिकॉर्ड मिलने का दावा है। आरोप है कि वह कथित तौर पर अयोग्य उम्मीदवारों को मेरिट सूची में शामिल कराने के लिए संपर्क और सौदेबाजी करता था। TDPL और बिसिंस को सूचीबद्ध कराने में भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया गया है। |
| अरुण कुमार | आरोप है कि वह उम्मीदवारों को परीक्षा पास कराने का आश्वासन देता था और इच्छुक उम्मीदवारों से अग्रिम रकम लेता था। |
| रमेश कुमार | रिपोर्टों में उसे कथित परीक्षा माफिया और उम्मीदवारों के बीच संपर्क स्थापित करने वाला व्यक्ति बताया गया है। उस पर ओएमआर शीट में हेरफेर से जुड़ी भूमिका का आरोप भी है। |
| उमेश कुमार | आरोप है कि वह पैसों के लेन-देन और गोपनीय दस्तावेजों का हिसाब रखता था। उम्मीदवारों के मूल प्रमाणपत्र छिपाने और लेन-देन से जुड़े साक्ष्य मिटाने की योजना में शामिल होने का भी आरोप है। |
| उमाकांत उरांव | रिपोर्ट के मुताबिक, उसने कथित तौर पर उम्मीदवारों को परीक्षा माफिया से संपर्क कराया और अपने संपर्कों के माध्यम से पैसे जुटाकर बिचौलियों तक पहुंचाए। वह खुद भी 14वीं JPSC परीक्षा में सफल हुआ था। |
| ब्रज कुमार राम | JPSC की पूर्व सदस्य अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक रहे ब्रज कुमार राम पर आरोप है कि वह उनके नाम का इस्तेमाल करके उम्मीदवारों को परीक्षा पास कराने का आश्वासन देता और कथित तौर पर रकम वसूलता था। |
नोट: उपलब्ध सामग्री में सभी 10 आरोपियों के नाम और उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों का पूरा विवरण नहीं है. इसलिए यहां उन्हीं छह आरोपियों की भूमिका दी गई है, जिनके बारे में जानकारी उपलब्ध कराई गई है.
डिजिटल साक्ष्य और बैंक खातों के लेन-देन पर जांच
इस मामले में डिजिटल साक्ष्य अहम माने जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने लैपटॉप से मिले डेटा, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और बैंक खातों में हुए लेन-देन की पड़ताल की है. यदि आरोपपत्र में दर्ज साक्ष्य अदालत में प्रमाणित होते हैं, तो उनसे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि कथित तौर पर उम्मीदवारों, बिचौलियों और अन्य आरोपियों के बीच संपर्क कैसे स्थापित हुआ और पैसे का लेन-देन किस तरह हुआ.
हालांकि, केवल कॉल रिकॉर्ड या बैंक लेन-देन का होना अपने आप में किसी व्यक्ति के अपराध को साबित नहीं करता। इन साक्ष्यों का संदर्भ और उनकी प्रमाणिकता अदालत में जांची जाएगी.
JPSC परीक्षा की निष्पक्षता पर फिर सवाल
झारखंड में सरकारी नौकरियों की परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों के बीच पारदर्शिता और निष्पक्ष चयन की मांग लंबे समय से उठती रही है. 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े इन कथित खुलासों ने एक बार फिर चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब इस मामले में अहम सवाल हैं कि कथित तौर पर उम्मीदवारों की सूची परिणाम से पहले कैसे उपलब्ध हुई, पैसे लेने के आरोपों के पीछे कौन-कौन शामिल था और जांच में सामने आए साक्ष्य अदालत में किस हद तक प्रमाणित होते हैं. इन सवालों का अंतिम जवाब न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों से ही मिलेगा. आरोपपत्र में नाम शामिल होना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है.
