RANCHI : राजधानी रांची में मंगलवार को सियासी पारा चढ़ता नजर आया. कांग्रेस कार्यालय के बाहर भाजपा और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए. दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई. धक्का-मुक्की और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच माहौल तनावपूर्ण हो गया. हालात ऐसे बने कि पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा.
दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष के बयान से नाराज भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी जिला स्कूल मैदान से कांग्रेस भवन की ओर बढ़े, लेकिन प्रशासन ने बैरिकेडिंग लगाकर उन्हें रोक दिया. इसके बावजूद कांग्रेस भवन के बाहर दोनों पक्षों के कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी तेज हो गई.

बयान से शुरू हुआ विवाद, सड़क पर आमने-सामने आए कार्यकर्ता
राजनीतिक बयानबाजी से शुरू हुआ विवाद देखते ही देखते सड़क पर शक्ति प्रदर्शन में बदल गया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारे लगाए, तो दूसरी ओर कांग्रेस समर्थकों ने भी जवाबी नारेबाजी की. दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के नेताओं को निशाने पर लिया. प्रदर्शन के दौरान लाठी-डंडे दिखाने और धमकाने के आरोप भी सामने आए। इससे मौके पर तनाव और बढ़ गया. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती है.
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पुलिस ने संभाला मोर्चा, समझाने के बाद समाप्त हुआ प्रदर्शन
मौके पर तैनात पुलिस और प्रशासन के जवानों ने स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की. दोनों पक्षों को समझाया गया और हालात को बिगड़ने से रोकने के प्रयास किए गए. इसके बाद प्रदर्शन समाप्त कराया गया. राहत की बात यह रही कि इस घटनाक्रम में किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं है. हालांकि, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच बढ़ती तल्खी ने राजधानी के सियासी माहौल को गरमा दिया है.

अब सवाल-सियासी टकराव यहीं थमेगा या बढ़ेगा?
इस घटनाक्रम के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होने की आशंका है. कांग्रेस ने भाजपा पर राजनीतिक मर्यादा तोड़ने का आरोप लगाया है, जबकि भाजपा की ओर से आगे बड़े आंदोलन के संकेत दिए जाने की बात सामने आई है. ऐसे में सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कांग्रेस भवन के बाहर किसने किसके खिलाफ नारे लगाए। बड़ा सवाल यह है कि क्या राजनीतिक विरोध अब इसी तरह सड़क पर टकराव का रूप लेता रहेगा?
फिलहाल, रांची में भाजपा और कांग्रेस के बीच हुई इस भिड़ंत ने झारखंड की राजनीति में बढ़ती तल्खी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। आने वाले दिनों में दोनों दलों का रुख तय करेगा कि यह विवाद यहीं थमता है या सियासी संघर्ष का नया दौर शुरू होता है.
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