RANCHI : झारखंड में अगले महीने होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले सत्तारूढ़ इंडिया गठबंधन के भीतर खींचतान तेज होती दिख रही है. गठबंधन में शामिल कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बीच मनमुटाव खुलकर सामने आने लगा है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप कुमार बलमुचू ने सार्वजनिक तौर पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि झारखंड में ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि गठबंधन सरकार में कांग्रेस की कोई प्रभावी सहभागिता है. बुधवार को पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में बलमुचू ने कहा कि अब सरकार के कामकाज का निष्पक्ष मूल्यांकन जरूरी हो गया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के किसी भी कार्यकर्ता को यह महसूस नहीं होता कि गठबंधन सरकार में उनकी बात सुनने वाला कोई है. बलमुचू ने साफ कहा कि अगर पार्टी कार्यकर्ताओं के काम नहीं होंगे तो आंदोलन ही एकमात्र रास्ता बचेगा. उन्होंने संकेत दिया कि कांग्रेस कार्यकर्ता जल्द ही सड़क पर उतरकर अपनी नाराजगी दर्ज करा सकते हैं.

पूर्व सांसद प्रदीप बलमुचू ने गठबंधन सरकार में कांग्रेस की अनदेखी का लगाया आरो,. क्षेत्रीय भाषा और संगठनात्मक मुद्दों पर भी JMM-कांग्रेस के बीच बढ़ी दूरियां
बलमुचू ने कहा कि गठबंधन सरकार के खिलाफ खड़ा होना अब कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मजबूरी बनती जा रही है. उनके इस बयान को राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के भीतर बढ़ते असंतोष और गठबंधन की अंदरूनी खींचतान के रूप में देखा जा रहा है. इससे पहले प्रदीप कुमार बलमुचू ने नई दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. इस दौरान दोनों नेताओं के बीच झारखंड के मौजूदा राजनीतिक हालात, संगठनात्मक गतिविधियों और राज्य के जनजातीय समाज से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई. राहुल गांधी ने खास तौर पर जल, जंगल और जमीन की रक्षा से जुड़े विषयों और झारखंड की सियासी परिस्थितियों की जानकारी ली.
इधर क्षेत्रीय भाषा के मुद्दे ने भी कांग्रेस और JMM के रिश्तों में खटास बढ़ा दी है. कांग्रेस कोटे से सरकार में शामिल मंत्री राधाकृष्ण किशोर और दीपिका पांडेय सिंह ने मगही, भोजपुरी और अंगिका को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग की थी. हालांकि राज्य सरकार ने फिलहाल पुरानी नियमावली को ही मंजूरी दे दी है. इससे कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी और बढ़ गई है.
राज्यसभा चुनाव से पहले गठबंधन के भीतर बढ़ती बयानबाजी और मतभेद ने झारखंड की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. अब नजर इस बात पर है कि कांग्रेस और JMM इन मतभेदों को सुलझा पाते हैं या यह विवाद चुनावी रणनीति को प्रभावित करेगा.
