Ritika
RANCHI : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इन दिनों सीधे असम की सियासत में उतर गए हैं. जिस धरती को हिमंता बिस्वा सरमा का मजबूत गढ़ माना जाता है, उसी असम में हेमंत सोरेन पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतर चुके हैं. राजनीतिक रस्साकशी के बीच एक ऐसा दृश्य सामने आया जिसने सोशल मीडिया पर तूफान खड़ा कर दिया. चुनावी प्रचार के दौरान हेमंत सोरेन एक गरीब आदिवासी महिला के घर पहुंचे, हाथ में टॉर्च था, और सामने था ऐसा घर जिसे देखकर खुद मुख्यमंत्री भी हैरान रह गए. घर में न बिजली थी, न गैस की सुविधा, न रोशनी. पूरा घर अंधेरे में डूबा हुआ था. बिजली बिल नहीं भर पाने की वजह से उस गरीब महिला का कनेक्शन तक काट दिया गया था. जब मुख्यमंत्री ने यह हालत देखी तो वह खुद चौंक गए और वहीं खड़े होकर सरकार पर तीखा हमला बोल दिया.
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हेमंत ने साधा हिमंता पर निशाना
हेमंत सोरेन ने सीधे-सीधे सवाल खड़ा कर दिया कि इतने बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार आखिर जमीन पर क्या कर रही है. उन्होंने कहा कि विद्वानों और बड़े-बड़े दावों की सरकार होने का दावा करने वाले लोग इतने छोटे से राज्य में भी बुनियादी सुविधाएं नहीं दे पाए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यह वही सरकार है जो बड़े-बड़े भाषण देती है, लेकिन हकीकत में गरीबों के घरों को अंधेरे में छोड़ देती है. उन्होंने आरोप लगाया कि यहां वोट खरीदने की कोशिश की जा रही है. हिमंता बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 9 हजार रुपये महीना देकर लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है, लेकिन सच यह है कि मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि बोलने में तो सब माहिर हैं, लेकिन असली सच्चाई जमीन पर दिखती है और असम की जमीन पर सच्चाई बिल्कुल अलग नजर आ रही है.
राजनैतिक संयोग
इस पूरे मामले ने एक और राजनीतिक दिलचस्पी पैदा कर दी है. कुछ समय पहले झारखंड के विधानसभा चुनाव में हिमंता बिस्वा सरमा बीजेपी के स्टार प्रचारक बनकर पहुंचे थे और अब वही तस्वीर उलट गई है. अब हेमंत सोरेन खुद असम की विधानसभा चुनाव की जमीन पर उतर कर बीजेपी को चुनौती दे रहे हैं. उन्होंने खुलकर कहा कि यह सरकार सिर्फ बातें करती है, लेकिन उसका परिणाम बिल्कुल उल्टा होता है.
राज्य की दुर्दशा के लिए डबल इंजन सरकार दोषी
उन्होंने डबल इंजन सरकार पर भी जोरदार हमला बोला और कहा कि जब केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही सरकार है तो जिम्मेदारी से भाग नहीं सकते. अगर राज्य सरकार जिम्मेदार है तो उतनी ही जिम्मेदारी केंद्र सरकार की भी है. हेमंत सोरेन ने कहा कि असम का यह चुनाव सिर्फ एक सामान्य चुनाव नहीं है, बल्कि यह पहचान, जमीन, आवास और अधिकारों की लड़ाई की शुरुआत है. उन्होंने कहा कि जिस तरह से यहां आदिवासी भाई-बहन रहने को मजबूर हैं, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है. जिन घरों में लोग रह रहे हैं, वह किसी भी सरकार की असफलता का जीता-जागता उदाहरण है. उन्होंने साफ कहा कि यह स्थिति सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि यहां की सरकारों द्वारा किया गया अपराध है.
असम के आदिवासी बरसों से ठगे गए हैं
उन्होंने असम की राजनीति पर भी बड़ा आरोप लगाया. हेमंत सोरेन ने कहा कि वर्षों से यहां की सरकारों ने आदिवासियों को सिर्फ ठगने का काम किया है. उनके अधिकार छीने गए, उन्हें हाशिये पर रखा गया और उन्हें उनका हक नहीं दिया गया. लेकिन अब हालात बदलेंगे. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर झारखंड जैसे राज्य में गरीबों को तीन कमरों का आवास दिया जा सकता है, अगर 50 लाख महिलाओं को हर महीने 2500 रुपये सम्मान राशि दी जा सकती है, तो फिर असम में ऐसा क्यों नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है. असम के आदिवासी अब अपने अधिकारों के लिए खड़े होंगे और उन्हें उनका हक मिलकर रहेगा.
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झामुमो का फोकस टी-ट्राइब और आदिवासी समुदाय पर
बता दें कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ मिलकर असम के चुनावी मैदान में पूरी ताकत झोंक रहे हैं. करीब 20 स्टार प्रचारकों की टीम के साथ वह लगातार प्रचार कर रहे हैं और उनका सबसे ज्यादा फोकस टी-ट्राइब और आदिवासी समुदाय पर है. साफ है कि असम की सियासत में अब झारखंड की एंट्री हो चुकी है और यह टक्कर आने वाले दिनों में और भी ज्यादा तीखी होने वाली है.
