BERMO : बेरमो अनुमंडल के बोकारो थर्मल स्थित डीवीसी के 500 मेगावाट क्षमता वाले ‘ए’ पावर प्लांट की यूनिट ऐश पौंड से छाई का उठाव नहीं हो पाने के संकट के कारण एक बार फिर से अंधेरे में डूब गई है. शुक्रवार की मध्य रात्रि लगभग सवा बारह बजे यूनिट को पूरी तरह से स्थानीय प्रबंधन के निर्देश पर बंद कर दिया गया. इसके पूर्व यूनिट बंद करने को लेकर रात्रि नौ बजे के बाद सभी इंजीनियरों एवं अधिकारियों को व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर जानकारी दी गई थी. बंद किए जाने के समय यूनिट से 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा था. नूरी नगर स्थित दोनों ऐश पौंड के पूरी तरह भर जाने और पिछले 28 फरवरी से छाई का उठाव ठप होने के कारण प्रबंधन के पास यूनिट बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था.
ऐश पौंड देखभाल को लेकर दो जीएम के बाद भी नहीं हो रहा छाई का उठाव
’ए’ पावर प्लांट से उत्पादन बंद, ऐश पौंड लबालब होने से संकट
ट्रांसपोर्टरों के भुगतान विवाद और आंदोलन के कारण 28 फरवरी से ठप है छाई का उठाव
डीवीसी को प्रतिदिन होगा 6 करोड़ का घाटा,झारखंड समेत कई राज्यों में बिजली संकट की आहट
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दो-दो जीएम फिर भी ‘छाई’ एक गंभीर समस्या
डीवीसी की विडंबना यह है कि ऐश पौंड की देखभाल करने को लेकर ऐश मैनेजमेंट सिस्टम के लिए दो जीएम राजेश विश्वास और एए कुजूर की पदस्थापना के बाद भी ऐश पौंड की समस्या और छाई ट्रांसपोर्टिंग का निराकरण नहीं हो पा रहा है. बताया जाता है कि छाई का उठाव करने वाली कंपनी ‘सारण’ द्वारा हाईवा मालिकों को पिछले दो महीनों का बकाया राशि का भुगतान नहीं किया गया है. इससे नाराज हाईवा मालिकों ने 28 फरवरी से छाई उठाव का काम पूरी तरह से बंद कर दिया था. हालांकि, डीवीसी के एचओपी सुशील कुमार अरजरिया ने इस गतिरोध के पीछे होली की छुट्टियों को भी एक कारण बताया था, और कहा था कि यूनिट से फुल लोड पर बिजली का उत्पादन हो रहा है. गौरतलब है कि इससे पहले भी बेरमो विधायक कुमार जयमंगल के नेतृत्व में बेरमो हाईवा एसोसिएशन और विस्थापितों द्वारा 15 जुलाई से किये गये आंदोलन के कारण साढ़े तीन महीनों तक उठाव बंद रहा था.

2019 जैसी त्रासदी की आहट
ऐश पौंड में अब तिल धरने की भी जगह नहीं बची है. प्रबंधन द्वारा पौंड में छाई की अस्थायी दीवारें बनाकर छाई को जमा कर रोकने की कोशिश की जा रही है, लेकिन खतरा बरकरार है. यदि राख का दबाव बढ़ा तो सितंबर 2019 जैसी घटना दोहराई जा सकती है, जब ऐश पौंड टूटने से भारी तबाही हुई थी और एनजीटी ने डीवीसी पर एक करोड़ का जुर्माना लगाया था. यूनिट बंद होने से डीवीसी को प्रतिदिन लगभग 6 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा और झारखंड के अलावा पंजाब, दिल्ली और कोल इंडिया को की जाने वाली बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी. मांग पूरी करने के लिए डीवीसी को अब बाहर से महंगी बिजली खरीदनी पड़ेगी. नवंबर माह में ऐश पौंड को लेकर तेरह दिनों तक और दिसंबर माह में तीन दिनों तक पावर प्लांट की यूनिट को बंद करना पड़ा था. पावर प्लांट को बंद करने के कारण डीवीसी को काफी आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ा था.
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