RANCHI/HAZARIBAGH: हजारीबाग भवन निर्माण विभाग में करोड़ों रुपये के छह निर्माण और मरम्मत कार्यों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. आरोप है कि जिन कामों की निविदा सितंबर 2026 में जारी की गई, उनमें से कई काम टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही करा दिए गए. इतना ही नहीं, दूसरे संवेदकों ने आरोप लगाया है कि इन कामों को भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता अतुल कुमार सिंघल के करीबी बताए जाने वाले ठेकेदार विजय सिंह और उनके करीबी लोगों को पहले ही दे दिया गया है.
6 सरकारी भवनों के रिनोवेशन पर 2.88 करोड़ की निविदा जारी
दरअसल, भवन निर्माण विभाग, भवन प्रमंडल हजारीबाग की ओर से जारी अति अल्पकालीन निविदा में कई महत्वपूर्ण सरकारी भवनों के रिनोवेशन और डेवलपमेंट से जुड़े छह काम शामिल हैं. दो विज्ञापन में 3-3 निविदा प्रकाशित की गई है. इन छह योजनाओं की अनुमानित लागत करीब 2.88 करोड़ रुपये है. इसमें सिविल एसडीओ सह एसडीएम आवास सदर हजारीबाग में व्हाइट वाश और स्पेशल रिपेयर का काम 24.85 लाख रुपये, एसपी आवास में बैरक और कैंपस डेवलपमेंट 24.90 लाख रुपये तथा डीआईजी आवास, बैरक और अन्य भवनों के कैंपस डेवलपमेंट का काम 49.20 लाख रुपये का है.
काम पहले करा कर , बाद में टेंडर निकालने का दावा
इसके अलावा जिला पेंशनर कार्यालय और अकाउंट कार्यालय के विस्तार का काम 49.83 लाख रुपये, पुराने सर्किट हाउस में सीएम सुइट के रिनोवेशन और फर्निशिंग का काम 46.01 लाख रुपये तथा उपायुक्त आवास में गोपनीय कार्यालय भवन और विजिटर रूम के रिनोवेशन का काम 42.92 लाख रुपये का है. कुल मिलाकर करीब 2 करोड़ 87 लाख रुपये से अधिक के इन छह कामों को लेकर दूसरे संवेदकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि टेंडर प्रक्रिया के पूर्व ही काम कर लिया गया था और बाद में टेंडर निकालकर खानापूर्ति की गयी है. और करोड़ो की बंदरबाट हुई है.
संवेदकों का आरोप है कि जब निविदा के पहले इन जगहों पर काम कैसे शुरू हुआ? यदि काम पहले से कराया गया था, तो इसके लिए किस स्तर से अनुमति दी गई? क्या विभाग ने इसके लिए कोई लिखित आदेश जारी किया था? और सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि टेंडर प्रक्रिया से पहले ही किसी संवेदक को काम सौंपने की स्थिति कैसे बनी?
डीसी ने दिया जांच का आश्वासन
दूसरे संवेदकों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. उनका कहना है कि यदि टेंडर से पहले ही काम किसी खास संवेदक को दे दिया गया था, तो फिर निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है. हालांकि विजय सिंह और कार्यपालक अभियंता पर लगाए गए ये आरोप संवेदकों के दावों पर आधारित हैं.
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है. इसलिए यह भी जरूरी है कि भवन निर्माण विभाग अपना पक्ष स्पष्ट करे और बताए कि छहों कार्यों के लिए कार्यादेश कब जारी हुआ, काम कब शुरू हुआ और निविदा प्रक्रिया से पहले काम कराए जाने की शिकायत पर विभाग का क्या कहना है. करीब 2.88 करोड़ रुपये के छह सरकारी कामों में टेंडर और काम की तारीखों के बीच अगर अंतर सामने आता है, तो यह जांच का बड़ा विषय होगा. फिलहाल इसे लेकर हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने जांच करने का आश्वासन दिया है.
