RANCHI / SERAIKELA KHARSAWAN : झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के गम्हरिया थाने में सुरक्षा मांगने पहुंची एक महिला के साथ दुष्कर्म का गंभीर मामला सामने आया है. महिला ने थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा पर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है. पीड़िता का दावा है कि घटना के दौरान मदद के लिए शोर मचाने पर चार पुलिसकर्मी कमरे के पास पहुंचे, लेकिन उसे बचाने के बजाय वहां से लौट गए.
मामले में आरोपी वायरलेस ऑपरेटर को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है. वहीं, चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है. थाना प्रभारी समेत संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया है. कथित घटना वाले कमरे को सील कर दिया गया है और फॉरेंसिक टीम ने वहां साक्ष्य जुटाए हैं.इस मामले ने पुलिस थानों में महिलाओं की सुरक्षा, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जवाबदेही और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
पति के डर से घर से निकली महिला ने पुलिस से मांगी मदद
पुलिस के अनुसार, महिला ने अपनी प्राथमिकी में बताया है कि 29 अक्टूबर की शाम सब्जी में नमक अधिक होने को लेकर उसका अपने पति से विवाद हुआ था. महिला का आरोप है कि विवाद के दौरान पति ने उसे जान से मारने की धमकी दी थी। बाद में दोनों के बीच मामला शांत हो गया और शाम को वे गम्हरिया आए. रात करीब 9:30 बजे घर लौटते समय झुरकुली के पास पति का एक दोस्त मिला. इसके बाद पति उसके साथ बैठकर शराब पीने लगा. महिला के मुताबिक, पति की ओर से पहले दी गई धमकी और वहां के माहौल से वह डर गई और वहां से निकल गई.
इसके बाद वह एसिड कंपनी के पास स्थित एक घर में पहुंची.वहां मौजूद महिला को उसने अपनी परेशानी बताई और पुलिस बुलाने की गुहार लगाई. रात करीब 12 बजे गम्हरिया थाने की पीसीआर टीम मौके पर पहुंची और महिला को थाने ले आई. देर रात होने के कारण उसे रात गुजारने के लिए थाने परिसर में एक कमरे में ठहराया गया. महिला को उम्मीद थी कि पुलिस उसे सुरक्षा देगी.लेकिन उसकी शिकायत के मुताबिक, इसी दौरान थाने के भीतर ऐसी घटना हुई, जिसने पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
कमरे में पहुंचकर दुष्कर्म करने का आरोप
पीड़िता ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि देर रात थाने में तैनात वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा उस कमरे में पहुंचा, जहां वह ठहरी हुई थी. महिला के मुताबिक, आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया.पीड़िता का कहना है कि घटना के दौरान उसने शोर मचाकर मदद मांगी. उसकी शिकायत के अनुसार, आवाज सुनकर चार पुलिसकर्मी कमरे के पास पहुंचे, लेकिन उसे बचाने के लिए कोई प्रभावी कदम उठाए बिना वहां से लौट गए. महिला ने बताया कि खुद को बचाने के संघर्ष में उसकी चूड़ियां टूट गईं और चेहरे पर खरोंच के निशान आ गए.
उसने कमरे में रखे सब्जी काटने वाले चाकू से आरोपी पर वार किया, जिससे उसकी एक उंगली में चोट लगने और खून निकलने की बात सामने आई है. ये सभी आरोप पीड़िता के बयान पर आधारित हैं. मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका और घटना से जुड़े अन्य तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी.
सुबह 700 रुपये देकर ऑटो से रेलवे स्टेशन भेजने का आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया है कि शुक्रवार सुबह एक पुलिसकर्मी कमरे में आया. महिला के मुताबिक, उसने आरोपी से 700 रुपये लेकर उसे दिए और फिर ऑटो से गम्हरिया रेलवे स्टेशन भेज दिया. उसे मायके चले जाने के लिए कहा गया. यह घटनाक्रम भी जांच के दायरे में है. पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि महिला को थाने से भेजने से पहले उसकी सुरक्षा, शिकायत दर्ज कराने और चिकित्सकीय सहायता से जुड़ी आवश्यक प्रक्रियाओं का पालन किया गया था या नहीं.
रेलवे स्टेशन पर पति से मिली, फिर दर्ज कराई शिकायत
शुक्रवार सुबह महिला का पति भी उसकी तलाश में गम्हरिया रेलवे स्टेशन पहुंचा था. इसी दौरान महिला की नजर उस पर पड़ी. वह उसके पास गई और उसने थाने में हुई कथित घटना की जानकारी दी. इसके बाद महिला ने गम्हरिया थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस ने वायरलेस ऑपरेटर नीरज लकड़ा को गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. पीड़िता को चिकित्सकीय जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस मामले से जुड़े साक्ष्यों और बयानों की जांच कर रही है.
एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी गठित, कमरा सील
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर एसडीपीओ अनुभव भारद्वाज के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया गया है. जांच टीम ने थाने पहुंचकर घटनास्थल का निरीक्षण किया. जिस कमरे में कथित घटना हुई, उसे सील कर दिया गया, ताकि वहां मौजूद साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके.
शनिवार दोपहर करीब तीन बजे रांची से फॉरेंसिक टीम भी गम्हरिया थाने पहुंची.टीम ने एसडीपीओ से मामले की जानकारी लेने के बाद कमरे का निरीक्षण किया और वहां मौजूद साक्ष्यों तथा परिस्थितियों की जांच की. जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि घटना के समय कमरे में क्या परिस्थितियां थीं, वहां कौन-कौन मौजूद था और पीड़िता की शिकायत में बताए गए घटनाक्रम की पुष्टि किन साक्ष्यों से होती है.
चार पुलिसकर्मी निलंबित, थाना प्रभारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में वायरलेस ऑपरेटर के अलावा अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. थाना प्रभारी संजय प्रसाद समेत संबंधित कर्मियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा किए जाने की बात भी सामने आई है.
जांच का एक अहम पहलू यह है कि कथित घटना के समय ड्यूटी पर कौन-कौन तैनात था, महिला के शोर मचाने के बाद क्या हुआ और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए. निलंबन विभागीय कार्रवाई का हिस्सा है. मामले में संबंधित पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी और संभावित लापरवाही का अंतिम निर्धारण जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकेगा.
थाने में सीसीटीवी कैमरों की स्थिति पर सवाल
इस घटना के बाद थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की स्थिति भी महत्वपूर्ण हो गई है. यदि थाने के गलियारों, प्रवेश-निकास द्वार और संबंधित हिस्सों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है, तो वह घटनाक्रम की जांच में उपयोगी हो सकती है.जांच एजेंसियों के सामने कई सवाल हैं.क्या संबंधित कमरे के बाहर या आसपास सीसीटीवी कैमरे लगे थे? क्या घटना की रात कैमरे काम कर रहे थे? क्या चार पुलिसकर्मियों के कमरे तक पहुंचने और वहां से लौटने की रिकॉर्डिंग उपलब्ध है? क्या थाने के प्रवेश-निकास द्वार की फुटेज सुरक्षित रखी गई है? क्या जांच के लिए संबंधित रिकॉर्डिंग तत्काल संरक्षित की गई?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि संबंधित कैमरों की स्थिति क्या थी और कोई रिकॉर्डिंग जांच टीम को मिली है या नहीं. इसलिए कैमरे बंद होने या फुटेज गायब होने का दावा करना उचित नहीं होगा। पुलिस को इस संबंध में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए.
पुलिस थानों में सीसीटीवी पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 2 दिसंबर 2020 को परमवीर सिंह सैनी बनाम बलजीत सिंह मामले में पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने और उनकी निगरानी से जुड़े विस्तृत निर्देश दिए थे. इन निर्देशों में थानों के प्रवेश और निकास द्वार, गलियारों, स्वागत कक्ष और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों की निगरानी पर जोर दिया गया था. कैमरों में रात्रि-दृष्टि और ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था तथा रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की आवश्यकता भी निर्देशों का हिस्सा थी.
इस मामले में यह जांचना जरूरी है कि गम्हरिया थाने में सीसीटीवी व्यवस्था की स्थिति क्या थी और संबंधित रिकॉर्डिंग उपलब्ध है या नहीं. हालांकि, मौजूदा जानकारी के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि थाने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन हुआ है.
महिला सुरक्षा और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल
गम्हरिया थाने का यह मामला केवल एक पुलिसकर्मी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी तक सीमित नहीं है. यह उस व्यवस्था की जवाबदेही से भी जुड़ा है, जिसके पास संकट में फंसे लोगों को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी है. महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि उनकी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए, रात में थाने पहुंचने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित व्यवस्था हो और ड्यूटी पर तैनात कर्मियों की जिम्मेदारी स्पष्ट हो.
यदि पीड़िता की शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिस व्यवस्था के भीतर गंभीर चूक का मामला होगा। ऐसे में केवल निलंबन पर्याप्त नहीं होगा. घटना के हर पहलू की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई जरूरी होगी. फिलहाल आरोपी वायरलेस ऑपरेटर न्यायिक हिरासत में है. एसआईटी मामले की जांच कर रही है और फॉरेंसिक साक्ष्यों की पड़ताल भी की जा रही है. अब जांच के निष्कर्षों पर नजर रहेगी, ताकि पीड़िता को न्याय मिल सके और पुलिस व्यवस्था की जवाबदेही तय हो सके.
