RANCHI : झारखंड के ग्रामीण इलाकों में हर घर तक नल से पानी पहुंचाने की योजना एक बार फिर चर्चा में है. जल जीवन मिशन के तहत अधूरी पड़ी पेयजल योजनाओं को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. हालांकि, इस राशि का लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार को पहले अपना निर्धारित हिस्सा खर्च करना होगा. ऐसे में योजना की रफ्तार इस बात पर निर्भर करेगी कि राज्य सरकार अपने हिस्से की राशि कितनी जल्दी उपलब्ध कराती है और लंबित कार्यों को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाती है.
जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पाइपलाइन के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है. लेकिन झारखंड में योजना की धीमी प्रगति, धन की कमी और ठेकेदारों के लंबित भुगतान के कारण कई परियोजनाओं के समय पर पूरा होने पर सवाल उठ रहे हैं.
2,000 करोड़ रुपये की मंजूरी, लेकिन राशि जारी होने की शर्त
केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. वही केंद्र सरकार की ओर से अप्रैल 2024 के बाद राशि जारी करने की प्रक्रिया प्रभावित हुई थी लेकिन जब बात पैसे देने की आई तो केंद्र ने शर्त ठोकते हुए कह दी की राज्य को अपने हिस्से की राशि पहले खर्च करनी होगी, जिसके बाद केंद्र से धन मिलने का रास्ता साफ होगा. यानि पहले राज्य को अपनी जेब ढीला करना होगा. जो काम अधूरे है, उसे पूरा किया जाए. इसके बाद केंद्र से मिलने वाली राशि से अधूरे निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने और लंबित भुगतान करने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, 2,000 करोड़ रुपये की मंजूरी और पूरी राशि का वास्तव में जारी होना दो अलग-अलग बातें हैं. इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि धन कब और किस प्रक्रिया के तहत उपलब्ध कराया जाता है.
झारखंड में 55.43 प्रतिशत घरों तक ही पहुंचा नल का पानी
समाचार पत्र में प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में जल जीवन मिशन के तहत कुल 62,52,346 ग्रामीण घरों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था. इनमें से 34,65,959 घरों तक नल के माध्यम से पानी पहुंचाया जा सका है. इस तरह योजना के तहत लगभग 55.43 प्रतिशत काम पूरा हुआ है. शेष घरों तक पानी पहुंचाने के लिए अभी काफी काम किया जाना बाकी है.

यह आंकड़ा योजना की वास्तविक चुनौती को सामने रखता है. केवल पाइपलाइन बिछाना या घरों में नल लगा देना पर्याप्त नहीं है. लोगों को नियमित रूप से पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल मिलना भी जरूरी है. जिन क्षेत्रों में निर्माण कार्य अधूरा है या जलापूर्ति शुरू नहीं हुई है, वहां ग्रामीण परिवारों को योजना का पूरा लाभ मिलने में देरी हो सकती है.
मल्टी विलेज और सिंगल विलेज योजनाओं में हजारों करोड़ रुपये का काम
जल जीवन मिशन के तहत झारखंड में मुख्य रूप से दो तरह की पेयजल योजनाएं संचालित की जा रही हैं-मल्टी विलेज स्कीम और सिंगल विलेज स्कीम. मल्टी विलेज स्कीम के माध्यम से एक से अधिक गांवों में पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाती है, जबकि सिंगल विलेज स्कीम किसी एक गांव की जरूरतों को ध्यान में रखकर संचालित होती है. समाचार पत्र की रिपोर्ट के मुताबिक, मल्टी विलेज स्कीम में लगभग 2,400 करोड़ रुपये और सिंगल विलेज स्कीम में लगभग 3,500 करोड़ रुपये के काम का उल्लेख किया गया है.रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ठेकेदारों के लगभग 6,000 करोड़ रुपये के भुगतान लंबित हैं.

यदि भुगतान में देरी के कारण निर्माण कार्य प्रभावित हो रहे हैं, तो नई राशि उपलब्ध होने से अधूरी परियोजनाओं को गति देने में मदद मिल सकती है. हालांकि, लंबित भुगतान के वास्तविक ब्योरे और परियोजनावार स्थिति की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक आंकड़ों से की जानी चाहिए.
2019 में शुरू हुई थी योजना, अब लक्ष्य वर्ष 2028
जल जीवन मिशन की शुरुआत 15 अगस्त 2019 को की गई थी। इसका मूल उद्देश्य वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराना था. लेकिन कई राज्यों में निर्धारित समयसीमा तक लक्ष्य पूरा नहीं हो सका. केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में जल जीवन मिशन को पुनर्गठित करते हुए दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दी. नई व्यवस्था में केवल बुनियादी ढांचा तैयार करने के बजाय नियमित जलापूर्ति, पेयजल स्रोतों की स्थिरता, पानी की गुणवत्ता और योजनाओं के रखरखाव पर भी जोर दिया गया है.

झारखंड के लिए अब चुनौती केवल शेष घरों तक कनेक्शन पहुंचाने की नहीं, बल्कि पहले से बने ढांचे को चालू रखने और ग्रामीण परिवारों को नियमित पानी उपलब्ध कराने की भी है.
अब आगे क्या?
केंद्र से मंजूर राशि का लाभ उठाने के लिए राज्य सरकार को अपने हिस्से की राशि उपलब्ध कराने, लंबित भुगतान की स्थिति स्पष्ट करने और अधूरी परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने की जरूरत होगी. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई राशि से वर्षों से अधूरी पड़ी पेयजल योजनाएं समय पर पूरी हो पाएंगी? क्या ग्रामीण परिवारों को वास्तव में नियमित रूप से नल से पानी मिलने लगेगा? और क्या सरकार निर्माण के साथ-साथ योजनाओं के रखरखाव की भी प्रभावी व्यवस्था कर पाएगी? इन सवालों के जवाब केवल राशि मंजूर होने से नहीं, बल्कि जमीन पर काम पूरा होने और घरों तक नियमित जलापूर्ति पहुंचने से मिलेंगे.
