RANCHI/HAZARIBAGH : झारखंड में जमीन की खरीद-बिक्री और जमीन से जुड़े विवादों के बीच हजारीबाग के कोर्रा थाना क्षेत्र के बाबूगांव में करीब 12 डिसमिल जमीन की खरीद इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. वजह जमीन का रकबा नहीं, बल्कि इसकी बताई जा रही कीमत है. जानकारी के मुताबिक करीब 12 डिसमिल जमीन के लिए लगभग 4 करोड़ रुपये का सौदा होने की बात सामने आ रही है. सबसे अहम बात यह है कि इस जमीन की खरीदारी रांची जिले के एक अंचल में पदस्थापित अंचलाधिकारी के परिजनों के नाम पर किए जाने की चर्चा है. हालांकि जमीन की रजिस्ट्री अब तक नहीं हो पाई है.
12 डिसमिल जमीन की कीमत करीब 4 करोड़ रुपये
बताया जा रहा है कि जमीन की कीमत सरकारी दर से कई गुना अधिक है. वहीं, जमीन का लेटेस्ट लगान रसीद नहीं कटे होने के कारण रजिस्ट्री की प्रक्रिया अटकी हुई है. ऐसे में इस जमीन की खरीद और इसके लिए तय की गई भारी रकम को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं.
CO के परिजनों के नाम पर खरीद की चर्चा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर करीब 12 डिसमिल जमीन के लिए 4 करोड़ रुपये की रकम कहां से आई? यदि जमीन अंचलाधिकारी के परिजनों के नाम पर खरीदी जा रही है, तो उनके पास इतनी बड़ी राशि का स्रोत क्या है? क्या यह रकम परिजनों की घोषित आय से आई है या इसके पीछे कोई दूसरा स्रोत है? इन सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की जांच से ही सामने आ सकता है.
आदिवासी जमीनों से जुड़े विवादों के बीच मामला चर्चा में
मामले को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि संबंधित अंचलाधिकारी ऐसे अंचल कार्यालय में पदस्थापित बताए जा रहे हैं, जहां जमीन से जुड़े विवाद सामने आते रहे हैं. खासकर आदिवासी जमीनों के हस्तांतरण और जमीन से जुड़े मामलों को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं.
ऐसे में यह भी जांच का विषय हो सकता है कि क्या बाबूगांव की इस जमीन की खरीद का संबंध अंचलाधिकारी की सेवा अवधि के दौरान अर्जित किसी अवैध आय से है या नहीं. हालांकि अभी तक ऐसा कोई दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि जमीन खरीद में अवैध कमाई का इस्तेमाल किया गया है. इसलिए इस पूरे मामले में आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है.
किन बिंदुओं की जांच से स्पष्ट हो सकती है तस्वीर?
जांच के दौरान जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य, सौदे की रकम, भुगतान का माध्यम, खरीदारों की आय, बैंक खातों से हुए लेनदेन और संबंधित अंचलाधिकारी की घोषित संपत्तियों की पड़ताल अहम होगी. साथ ही यह भी देखा जाना चाहिए कि परिजनों की आय और इतनी बड़ी संपत्ति खरीदने की क्षमता में कोई असमानता तो नहीं है.
अब रजिस्ट्री और धन के स्रोत पर टिकी नजर
अगर जांच में आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति या संदिग्ध धन के इस्तेमाल के प्रमाण मिलते हैं, तो मामला गंभीर रूप ले सकता है. ऐसे में सीआईडी और ईडी जैसी जांच एजेंसियों के स्तर से भी वित्तीय लेनदेन और संपत्ति के स्रोत की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है.
फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि 12 डिसमिल जमीन के लिए 4 करोड़ रुपये की रकम आखिर आई कहां से? इसका जवाब दस्तावेज और निष्पक्ष जांच से ही सामने आएगा.
