RANCHI : दुर्गापूजा की रौनक बढ़ने के साथ ही सड़कों पर जाम की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं. स्थिति ऐसी है कि कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी वाहन चालकों को काफी समय लग रहा है. शनिवार को कचहरी चौक से सुजाता चौक तक पहुंचने में करीब 45 मिनट लग गये, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा.
प्रमुख चौक-चौराहों पर वाहनों की लंबी कतारें
शहर के शहीद चौक, अलबर्ट एक्का चौक और अपर बाजार समेत कई प्रमुख इलाकों में जाम का असर देखने को मिला. सड़कों पर वाहनों का दबाव बढ़ने से लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी हुई. वहीं, त्योहार के दौरान बाजारों और पूजा पंडालों के आसपास बढ़ती भीड़ ने भी यातायात व्यवस्था पर दबाव बढ़ा दिया है.
पूजा पंडालों के तोरण द्वार और सजावट से संकरी हुईं सड़कें
दुर्गापूजा के मद्देनजर शहर में जगह-जगह आकर्षक सजावट और विशाल तोरण द्वार बनाये जा रहे हैं. कई स्थानों पर सड़क किनारे और सड़क के हिस्सों में बांस लगाये जाने के कारण रास्ते संकरे हो गये हैं. कोकर रोड, रातू रोड, बूटी मोड़ और हिनू जैसे इलाकों में इसका असर यातायात पर पड़ रहा है. सड़कों की चौड़ाई कम होने और वाहनों की संख्या बढ़ने से जाम की स्थिति बन रही है. इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. वहीं, स्कूली बसों और एंबुलेंस की आवाजाही भी प्रभावित होने से परेशानी और बढ़ गयी है.
ट्रैफिक एसपी ने पूजा समितियों से की अपील
यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाये रखने के लिए ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह ने पूजा समितियों से अपील की है कि तोरण द्वार और लाइटिंग की व्यवस्था इस तरह की जाये, जिससे सड़क पर आवागमन बाधित न हो. त्योहार की तैयारियों के बीच यातायात के लिए पर्याप्त जगह छोड़ने और लोगों की सुविधा का ध्यान रखने पर जोर दिया गया है.
जाम से राहत दिलाना ट्रैफिक पुलिस के लिए चुनौती
दुर्गापूजा के दौरान रांची में श्रद्धालुओं की भीड़ और वाहनों की आवाजाही बढ़ने की संभावना रहती है. ऐसे में प्रमुख चौक-चौराहों पर यातायात प्रबंधन, सड़क पर अनावश्यक अवरोधों को रोकना और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता सुगम रखना जरूरी है. अब सवाल यह है कि दुर्गापूजा की रौनक के बीच रांची की सड़कों पर लग रहे जाम से लोगों को राहत कब मिलेगी? त्योहार का उत्साह बरकरार रखने के साथ-साथ यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाना प्रशासन और पूजा समितियों, दोनों के लिए अहम चुनौती है.
