RANCHI : राजधानी रांची के मोरहाबादी वेंडर मार्केट में स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता को लेकर खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में कई अनियमितताएं सामने आई हैं. विभाग की ओर से 40 स्टॉलों की जांच की गई और खाद्य पदार्थों के 22 नमूने लिए गए. जांच में पनीर के दो नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे, जबकि चाट के दो नमूनों में औद्योगिक रंग पाए जाने की पुष्टि हुई.
चाट और पनीर की गुणवत्ता पर उठे सवाल
मोरहाबादी वेंडर मार्केट में बड़ी संख्या में लोग स्ट्रीट फूड का आनंद लेने पहुंचते हैं. ऐसे में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उनमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री की शुद्धता लोगों की सेहत के लिहाज से बेहद अहम है. जांच के दौरान चाट के नमूनों में औद्योगिक रंग मिलने से खाद्य सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं. खाद्य पदार्थों में निर्धारित मानकों के विपरीत रंगों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए जोखिम पैदा कर सकता है. वहीं, पनीर के दो नमूनों का मानकों पर खरा नहीं उतरना भी खाद्य गुणवत्ता की निगरानी को लेकर चिंता बढ़ाता है.
कार्रवाई के दौरान खाद्य पदार्थ नष्ट, स्टॉल संचालकों पर जुर्माना
जांच के दौरान मिलावटी पाए गए खाद्य पदार्थों को नष्ट किया गया. साथ ही, नियमों का उल्लंघन करने वाले स्टॉल संचालकों पर 500 रुपये जुर्माना लगाए जाने की बात सामने आई है. हालांकि, खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसे गंभीर मामले में जुर्माने की राशि को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है. क्या 500 रुपये का जुर्माना नियमों का उल्लंघन रोकने के लिए पर्याप्त है? क्या इतनी कम आर्थिक दंड राशि से खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता के प्रति लापरवाही पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है?
नियमित जांच और सख्त कार्रवाई की जरूरत
खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए केवल छापेमारी या जुर्माना लगाना ही पर्याप्त नहीं है. इसके लिए नियमित अंतराल पर जांच, खाद्य सामग्री की आपूर्ति के स्रोतों की पड़ताल और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई जरूरी है. साथ ही, खाद्य कारोबारियों को सुरक्षित खाद्य सामग्री के इस्तेमाल और निर्धारित मानकों के पालन के प्रति जागरूक करना भी महत्वपूर्ण है. मोरहाबादी वेंडर मार्केट में हुई जांच ने एक बार फिर स्ट्रीट फूड की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा निगरानी को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. स्वाद के लिए लोकप्रिय स्ट्रीट फूड लोगों की सेहत के लिए खतरा न बने, इसके लिए विभागीय निगरानी के साथ-साथ नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना जरूरी है.
