RANCHI/HAZARIBAGH : देश आजादी के 78 साल पूरे कर चुका है, लेकिन झारखंड के हजारीबाग जिले के बरकट्ठा प्रखंड स्थित सिजुआ गांव के लोगों की जिंदगी आज भी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है. गांव तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं, पीने के लिए साफ पानी की सुविधा नहीं और न ही बिजली की नियमित व्यवस्था. स्वास्थ्य केंद्र और आंगनबाड़ी जैसी जरूरी सुविधाओं का भी अभाव है. इन समस्याओं से परेशान सैकड़ों ग्रामीण अपनी मांगों को लेकर हजारीबाग समाहरणालय पहुंचे और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की.
ग्रामीणों की समस्याएं सुनने के बाद हजारीबाग के उपायुक्त हेमंत सती ने उन्हें जल्द समाधान का आश्वासन दिया है. उन्होंने सड़क की मरम्मत कराने और गांव को अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की बात कही.

पांच किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचते हैं ग्रामीण
सिजुआ गांव के लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी आवागमन की है. गांव तक पहुंचने वाली सड़क की हालत बेहद खराब है. ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क इतनी जर्जर है कि चार पहिया वाहन चलाना तो दूर, दोपहिया वाहन और साइकिल से आना-जाना भी मुश्किल हो जाता है. ऐसे में गांव के लोगों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए करीब पांच किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है. इस परेशानी का सामना बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भी करना पड़ता है. आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है.
न आंगनबाड़ी, न स्वास्थ्य केंद्र, बच्चों के भविष्य पर सवाल
गांव में आंगनबाड़ी केंद्र और स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था नहीं होने से ग्रामीणों को जरूरी सेवाओं के लिए दूसरे इलाकों पर निर्भर रहना पड़ता है. खासकर छोटे बच्चों की देखभाल और शुरुआती शिक्षा को लेकर परेशानी बनी हुई है. स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में बीमार पड़ने पर लोगों को इलाज के लिए दूर जाना पड़ता है. खराब सड़क के कारण यह समस्या और गंभीर हो जाती है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए.
आज भी चुआं का पानी पीने को मजबूर ग्रामीण
सिजुआ गांव में पेयजल और बिजली की व्यवस्था भी ग्रामीणों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. लोगों को पीने के पानी के लिए आज भी चुआं पर निर्भर रहना पड़ता है. इससे साफ पेयजल की उपलब्धता को लेकर चिंता बनी रहती है. वहीं, बिजली की सुविधा का अभाव भी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है. ग्रामीणों का सवाल है कि जब देश के गांवों तक विकास पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं, तो सिजुआ जैसे गांव आज भी इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्यों हैं.

समाहरणालय पहुंचे ग्रामीण, उपायुक्त ने दिया आश्वासन
अपनी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर सिजुआ गांव के सैकड़ों ग्रामीण हजारीबाग समाहरणालय पहुंचे. यहां उन्होंने अव्यवस्थाओं के खिलाफ नारेबाजी की और गांव की बदहाल स्थिति की ओर प्रशासन का ध्यान खींचा. इसके बाद उपायुक्त हेमंत सती ने ग्रामीणों के साथ सभागार में बैठक की. उन्होंने लोगों की समस्याएं सुनीं और जल्द समाधान का भरोसा दिया. उपायुक्त की ओर से सड़क की मरम्मत के साथ गांव को अन्य बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने का आश्वासन दिया गया.
आश्वासन से जगी उम्मीद, अब कार्रवाई का इंतजार
उपायुक्त से मुलाकात के बाद ग्रामीणों ने उनकी बात सुनने और समस्याओं पर ध्यान देने के लिए आभार जताया. ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई करेगा और गांव की स्थिति में सुधार होगा. हालांकि, सिजुआ गांव के लोगों के लिए असली राहत तब होगी, जब जर्जर सड़क की मरम्मत होगी, पेयजल और बिजली की सुविधा मिलेगी और स्वास्थ्य केंद्र व आंगनबाड़ी जैसी जरूरी सेवाएं उपलब्ध होंगी. अब देखना होगा कि प्रशासन का आश्वासन जमीन पर कब उतरता है और सिजुआ गांव के लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबे इंतजार से कब मुक्ति मिलती है.
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