RANCHI : झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर हुए छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में छात्र नेता कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को अदालत से राहत मिली है. रांची सिविल कोर्ट ने दोनों की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के बाद उन्हें जमानत प्रदान की है. मामला मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पुतला दहन के दौरान कथित तौर पर सरकारी कामकाज में बाधा डालने और एक युवक के साथ मारपीट से जुड़ा है.
अल्बर्ट एक्का चौक पर पुतला दहन के बाद दर्ज हुई थी प्राथमिकी
मिली जानकारी के अनुसार, JPSC-JSSC परीक्षा विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया था. इस घटना के बाद रांची जिला प्रशासन की ओर से कोतवाली थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी.
प्राथमिकी में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शनकारियों ने बिना अनुमति जुलूस निकाला और सरकारी कामकाज में बाधा उत्पन्न की. इस मामले में कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को नामजद आरोपी बनाया गया था. कोतवाली थाने में इस संबंध में कांड संख्या 183/2026 दर्ज होने की जानकारी दी गई है.
मामला दर्ज होने के बाद दोनों छात्र नेताओं को गिरफ्तारी की आशंका थी. इसी के मद्देनजर उन्होंने अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान उनकी ओर से अधिवक्ता सूरज किशोर प्रसाद ने पक्ष रखा. अदालत ने याचिका पर सुनवाई के बाद दोनों को अग्रिम जमानत की सुविधा प्रदान कर दी.
युवक से कथित मारपीट के मामले में भी मिली राहत
पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान एक मुस्लिम युवक के साथ कथित मारपीट को लेकर भी विवाद सामने आया था. इस घटना के संबंध में रांची के लोअर बाजार थाने में अलग प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में भी कुणाल प्रताप सिंह और चितरंजन सिंह को अग्रिम जमानत मिल गई है. इस तरह दोनों छात्र नेताओं को पुतला दहन से जुड़े मामले और युवक से कथित मारपीट के मामले में गिरफ्तारी से पहले कानूनी राहत मिली है.
अग्रिम जमानत का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं
अदालत से अग्रिम जमानत मिलने के बाद दोनों छात्र नेताओं को गिरफ्तारी से कानूनी सुरक्षा मिली है. हालांकि, अग्रिम जमानत को आरोपों से बरी होने के रूप में नहीं देखा जा सकता. मामले की जांच और आगे की न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्धारित तरीके से जारी रह सकती है. JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर झारखंड में छात्र आंदोलन पहले भी चर्चा में रहा है. ऐसे में इन मामलों में अदालत के फैसले के बाद अब आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रहेगी.
