RANCHI : झारखंड में अब जमीन के नीचे छिपे खनिजों की तलाश के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI की मदद लेने की तैयारी है. इसके जरिए बड़े इलाके में मौजूद अलग-अलग भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का विश्लेषण कर उन जगहों की पहचान करने की कोशिश की जाएगी, जहां खनिज मिलने की संभावना ज्यादा है.
दरअसल, खनिज की खोज के लिए अभी वैज्ञानिकों को बड़े इलाके में सर्वे, सैंपलिंग और ड्रिलिंग जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है. इसमें काफी समय और संसाधन खर्च होते हैं. AI इस प्रक्रिया के शुरुआती चरण को आसान बनाने में मदद कर सकता है.
इसे भी पढें : झारखंड में 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट, इन इलाकों में वज्रपात का खतरा
पुराने रिकॉर्ड से लेकर सैटेलाइट तस्वीरों तक का होगा विश्लेषण
AI पुराने भू-वैज्ञानिक रिकॉर्ड, सैटेलाइट तस्वीरें, ड्रिलिंग रिपोर्ट, जमीन की संरचना और दूसरे उपलब्ध आंकड़ों को एक साथ खंगालेगा. इन आंकड़ों में मौजूद पैटर्न और आपसी संबंधों का विश्लेषण कर यह अनुमान लगाया जा सकेगा कि किस क्षेत्र में किसी खास खनिज की मौजूदगी की संभावना अधिक हो सकती है. इसके बाद संभावित इलाकों में वैज्ञानिक सर्वे, सैंपलिंग और ड्रिलिंग की जाएगी. यानी AI खुद यह तय नहीं करेगा कि जमीन के नीचे खनिज मौजूद है या नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों को उन जगहों तक पहुंचने में मदद करेगा, जहां खोज का नतीजा मिलने की संभावना ज्यादा है.
कम संभावना वाले इलाकों में बेवजह खर्च से बचने की उम्मीद
खनिज खोज में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है बड़े क्षेत्र में संभावित जगहों की पहचान करना. हर जगह ड्रिलिंग करना न तो व्यावहारिक है और न ही किफायती. AI की मदद से पहले ही बड़े इलाके को छांटकर संभावित क्षेत्रों की सूची तैयार की जा सकती है. इससे कम संभावना वाले इलाकों में बार-बार सर्वे और ड्रिलिंग पर होने वाले समय और खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है.
8 सितंबर को होगा सेमिनार
इसी दिशा में खान एवं भूतत्व विभाग की ओर से 8 सितंबर को एक सेमिनार आयोजित किया जाएगा. इसमें AI से जुड़े विशेषज्ञ अधिकारियों को खनिज खोज में इस तकनीक के संभावित इस्तेमाल के बारे में जानकारी देंगे. सेमिनार में यह समझने की कोशिश होगी कि झारखंड में उपलब्ध भू-वैज्ञानिक आंकड़ों का इस्तेमाल AI आधारित खनिज खोज के लिए किस तरह किया जा सकता है.
कोयला से लेकर लिथियम तक, खनिज खोज में मिल सकती है मदद
झारखंड देश के प्रमुख खनिज उत्पादक राज्यों में शामिल है. राज्य में कोयला, लौह अयस्क, तांबा, बॉक्साइट और यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज पाए जाते हैं. ऐसे में AI आधारित तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में नए खनिज भंडार खोजने के साथ-साथ महत्वपूर्ण खनिजों की तलाश में भी मददगार हो सकता है. लिथियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की संभावित खोज में भी इस तकनीक की भूमिका देखी जा सकती है.इससे कम संभावना वाले इलाकों में बार-बार सर्वे और ड्रिलिंग पर होने वाले समय और खर्च को कम करने में मदद मिल सकती है.
हालांकि, AI की रिपोर्ट अंतिम प्रमाण नहीं होगी. यह सिर्फ संभावित इलाकों की पहचान करने में मदद करेगा. जमीन के नीचे वास्तव में कौन सा खनिज मौजूद है और उसकी मात्रा कितनी है, इसकी पुष्टि वैज्ञानिक सर्वे, सैंपलिंग और ड्रिलिंग के जरिए ही होगी. यानी आने वाले समय में झारखंड में खनिज खोज का तरीका बदल सकता है. जमीन के नीचे छिपे खजाने तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों के हाथ में अब नक्शे और ड्रिलिंग के साथ AI का डेटा विश्लेषण भी एक नया हथियार होगा.
