हजारीबाग : झारखंड के हजारीबाग शहर में जलस्रोतों पर अतिक्रमण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है. इस बार मामला शहर के हुरहुरु तालाब से जुड़ा है, जहां सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण किए जाने के आरोप सामने आए हैं. शिकायत के बाद प्रशासन ने जांच कराई, जिसमें तालाब की सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की पुष्टि होने का दावा किया गया है. अब संबंधित लोगों को नोटिस जारी कर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

यह मामला केवल एक तालाब तक सीमित नहीं है. स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में शहर के कई प्रमुख तालाब लगातार अतिक्रमण का शिकार हुए हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि समय रहते इन जलस्रोतों की सुरक्षा नहीं की गई, तो भविष्य में शहर को जल संकट का सामना करना पड़ सकता है.
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शिकायत के बाद हरकत में आया प्रशासन
हुरहुरु तालाब पर अतिक्रमण का मामला तब सामने आया, जब सामाजिक कार्यकर्ता मनोज गुप्ता ने उपायुक्त हेमंत सती से इसकी शिकायत की. शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने राजस्व विभाग के माध्यम से स्थल का निरीक्षण कराया और अमीन से भूमि की मापी कराई. जांच के दौरान तैयार रिपोर्ट में दावा किया गया कि करीब 50 डिसमिल सरकारी तालाब की भूमि पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है. आरोप है कि इस जमीन पर न केवल मकान बनाए गए, बल्कि एक निजी स्कूल का भवन भी खड़ा कर दिया गया.
किन लोगों पर लगे हैं अतिक्रमण के आरोप ?
प्रशासनिक जांच में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें रामचंद्र राम, दीपक पासवान, शशि चंद्र, बंसी गोप और पंडल गोप शामिल हैं. इन पर सरकारी तालाब की जमीन पर अवैध निर्माण कराने का आरोप है. हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है. इसलिए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी होना बाकी है.
प्रशासन ने क्या कार्रवाई की ?
मामले में अंचल अधिकारी ने बताया है कि संबंधित लोगों को पहला नोटिस जारी किया जा चुका है. यदि निर्धारित समय के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो नियमानुसार दूसरा नोटिस जारी कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन का कहना है कि पूरी प्रक्रिया कानून के दायरे में रहकर पूरी की जाएगी और जांच के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा.
उठ रहे हैं कई सवाल
इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर कई सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि यदि सरकारी तालाब की जमीन पर बड़े पैमाने पर निर्माण हुआ, तो निर्माण के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी ? क्या संबंधित विभागों ने समय रहते निगरानी नहीं की, या फिर शिकायत मिलने तक मामले की जानकारी ही नहीं थी ?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अतिक्रमण शुरुआती स्तर पर ही रोक दिया जाए, तो सरकारी संपत्तियों और जलस्रोतों को बचाया जा सकता है. लेकिन जब निर्माण पूरा होने के बाद कार्रवाई शुरू होती है, तब स्थिति अधिक जटिल हो जाती है.
जनप्रतिनिधियों ने क्या कहा ?
मामले को लेकर हजारीबाग के महापौर अरविंद राणा ने कहा है कि प्रशासन द्वारा चिन्हित किए गए अतिक्रमणों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी. वहीं उपमहापौर अविनाश यादव ने कहा कि सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा स्वीकार नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
पर्यावरण और जल संरक्षण से जुड़ा है मामला
विशेषज्ञों के अनुसार, शहरों में तालाब केवल जल संचयन का माध्यम नहीं होते, बल्कि भूजल स्तर बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि तालाबों का क्षेत्रफल लगातार घटता है या उन पर निर्माण होता है, तो वर्षा जल का प्राकृतिक संचयन प्रभावित होता है. इसका असर भविष्य में भूजल स्तर गिरने और पेयजल संकट के रूप में सामने आ सकता है.
हजारीबाग जैसे शहर, जहां कभी तालाबों की बड़ी संख्या थी, वहां लगातार हो रहे अतिक्रमण को पर्यावरणीय दृष्टि से भी गंभीर चुनौती माना जा रहा है.
आगे क्या होगा ?
फिलहाल प्रशासन ने नोटिस जारी कर प्रक्रिया शुरू कर दी है. अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच पूरी होने के बाद क्या वास्तव में अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई की जाएगी या मामला केवल नोटिस और कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगा.
यदि जांच में अतिक्रमण के आरोप सही पाए जाते हैं, तो प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने और तालाब के मूल स्वरूप को बहाल करने की होगी.
