रांची : झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के विश्राम गृह में मरीजों के परिजनों से निर्धारित शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूले जाने का आरोप सामने आया है. शिकायत में दावा किया गया है कि जहां पहले सात दिनों तक रहने के लिए प्रतिदिन 25 रुपये का शुल्क तय है, वहां कुछ लोगों से 240 रुपये तक लिए जा रहे हैं. आरोप यह भी है कि ठहरने के लिए कैंटीन से भोजन लेना अनिवार्य किया जा रहा है.

मामला सामने आने के बाद रिम्स प्रबंधन ने जांच के आदेश दिए हैं. अधिकारियों का कहना है कि यदि नियमों के विपरीत वसूली की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
क्या है पूरा मामला ?
रिम्स का विश्राम गृह उन मरीजों के परिजनों के लिए बनाया गया है, जो इलाज के दौरान अस्पताल परिसर में कम खर्च पर ठहरना चाहते हैं. लेकिन हाल के दिनों में कुछ परिजनों ने आरोप लगाया है कि यहां निर्धारित शुल्क के बजाय उनसे अधिक राशि ली जा रही है.
शिकायत के अनुसार, विश्राम गृह के एक कर्मचारी ने परिजनों को बताया कि 24 घंटे ठहरने के लिए 240 रुपये देने होंगे। इसमें 100 रुपये रहने का शुल्क और शेष राशि दो समय के भोजन के नाम पर ली जाएगी.
परिजनों का आरोप है कि यदि कोई व्यक्ति केवल निर्धारित शुल्क देकर ठहरना चाहता है और भोजन नहीं लेना चाहता, तो उसे इसकी अनुमति नहीं दी जाती. यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह अस्पताल की निर्धारित व्यवस्था और नियमों के विपरीत माना जाएगा.
कैंटीन पर भी अधिक कीमत वसूलने का आरोप
शिकायत केवल विश्राम गृह तक सीमित नहीं है। मरीजों के परिजनों ने कैंटीन में भी अधिक कीमत वसूलने का आरोप लगाया है. उनका कहना है कि सामान्य तौर पर 10 रुपये में मिलने वाली चाय 30 रुपये में और 40 रुपये की मैगी 80 रुपये में बेची जा रही है. परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए दूर-दराज से आने वाले अधिकांश परिवार पहले से ही आर्थिक दबाव में रहते हैं. ऐसे में उन्हें भोजन और ठहरने के लिए निर्धारित दर से अधिक भुगतान करना पड़ रहा है, जिससे उनकी परेशानी और बढ़ जाती है.
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रिम्स प्रबंधन ने क्या कहा ?
मामले पर रिम्स के जनसंपर्क पदाधिकारी डॉ. शिशिर कुमार ने कहा कि संस्थान के नियमों के अनुसार विश्राम गृह में पहले सात दिनों तक प्रतिदिन 25 रुपये का शुल्क निर्धारित है. उन्होंने बताया कि सात दिन पूरे होने के बाद 100 रुपये प्रतिदिन शुल्क लिया जाता है. डॉ. शिशिर कुमार के अनुसार, यदि पहले सात दिनों के दौरान किसी व्यक्ति से 100 रुपये या उससे अधिक की राशि वसूली गई है, तो यह निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं है.
उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता, मनमानी वसूली या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी.
गरीब मरीजों के परिजनों पर बढ़ता आर्थिक बोझ
रिम्स केवल रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और पड़ोसी राज्यों से आने वाले हजारों मरीजों का प्रमुख सरकारी अस्पताल है. यहां बड़ी संख्या में ऐसे परिवार भी पहुंचते हैं, जिनकी आर्थिक स्थिति सीमित होती है.
ऐसे में विश्राम गृह जैसी सुविधा का उद्देश्य कम खर्च में सुरक्षित ठहरने की व्यवस्था उपलब्ध कराना है. यदि निर्धारित शुल्क से अधिक राशि वसूले जाने के आरोप सही साबित होते हैं, तो इसका सबसे अधिक असर उन्हीं गरीब और जरूरतमंद परिवारों पर पड़ता है, जो सरकारी अस्पतालों पर निर्भर हैं.
जांच के बाद साफ होगी स्थिति
फिलहाल रिम्स प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करने की बात कही है. अब यह जांच ही तय करेगी कि वसूली निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या फिर शिकायतों में लगाए गए आरोप सही हैं.
इस बीच, इस मामले ने सरकारी अस्पतालों में मरीजों और उनके परिजनों को उपलब्ध कराई जाने वाली सुविधाओं, शुल्क निर्धारण और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि जांच में अनियमितता सामने आती है, तो यह केवल संबंधित कर्मचारियों की जवाबदेही का मामला नहीं होगा, बल्कि अस्पताल की व्यवस्था और निगरानी तंत्र की भी परीक्षा होगी.
