Arafat
PAKUR : झारखण्ड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ के आह्वान पर जिले के सभी मनरेगा कर्मचारियों ने सेवा स्थायीकरण, लंबित मानदेय भुगतान को लेकर मंगलवार को समाहरणालय के समीप धरना दिया. मनरेगा कर्मियों ने अपनी मांगो के समर्थन में नारेबाजी भी की.
2024 का समझौता अभी तक लागू नहीं
संघ के जिलाध्यक्ष अजीत कुमार टुडू के नेतृत्व में मनरेगा कर्मियों ने सांकेतिक हड़ताल के दूसरे दिन अपना विरोध दर्ज कराया. कहा कि विगत आठ माह से मनरेगा कर्मियों को मानदेय नही मिला है. दुर्गा पूजा, दीपावली, छठ, होली सहित सभी पर्व मानदेय भुगतान लंबित रहने के कारण फीका रहा. वर्ष 2024 में मनरेगा कर्मियों द्वारा किए गए हड़ताल के दौरान समझौते को लागू करने के लिए सरकार की ओर से जो आश्वासन दिया गया था, उसे अबतक लागू नहीं किया गया. पिछले छह माह का वेतन भी नहीं मिला है.

मनरेगा कर्मी केवल नाम के
पिछले हड़ताल पर लिखित दिये गये आश्वासन पर उदासीन रवैया मनरेगाकर्मियों में आक्रोश का बीज बोने का कार्य कर रही है. बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के इनसे चेक पोस्ट एवं दंडाधिकारी से जुड़े कार्यों का भी उन्होंने आपत्ति जताई. संविदा कर्मी अर्थात समतुल्य कर्मियों की श्रेणी जैसी समान वेतन और सुविधा और सुरक्षा प्रदान करना भी है लेकिन मनरेगा में कर्मियों के साथ ऐसा कुछ नहीं है. हम सिर्फ नाम के कर्मी हैं बाकी सब बंधुआ मजदूर जैसा. लिखित आश्वासन के बाद भी आजतक लंबित मांगे पूरी नहीं हुई.
12 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल
12 मार्च से झारखंड के करीब 5000 मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे. मौके पर अब्दुल गनी, मुंतसिर अहमद, सैदुर रहमान, ट्विंकल चौधरी, माणिक दास, अजीत कुमार टुडू, रिजवान फ़ारूक़ी, नवाब, उमेश प्रसाद साह मौजूद थे.
