Arafat
PAKUR : जिले के सरकारी स्कूलों में नवनियुक्त सहायक आचार्यों को पदस्थापन न मिलने के कारण वे स्कूलों के बजाय जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में हाजिरी लगाने को मजबूर हैं. जानकारी के अनुसार मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे सैकड़ों सहायक आचार्यों की लम्बी लाइन जिला शिक्षा अधिक्षक के कार्यालय के बाहर लगी थी. कतार में लगे शिक्षकों से जानकारी लेने पर बताया कि वे सभी सहायक आचार्य हैं और पिछले दो दिसंबर से जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में सुबह हाजिरी बनाने आते हैं.
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विभागीय कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार विज्ञान के 11 शिक्षक, भाषा के 11 व सामाजिक विज्ञान के 57 शिक्षक हैं. जबकि कक्षा एक से पांच तक के लिए 82 सहायक आचार्य हैं. इन सहायक आचार्यों को पिछले तीन माह से स्कूल नहीं मिला है. स्कूल नहीं मिलने के कारण प्रत्येक दिन दूर-दराज से आना पड़ता है. सुबह दस बजे तक कार्यालय पहुंच जाते है और 11 बजे हाजिरी बनाकर घर चले जाते है. विभाग का काम रहने पर शिक्षकों को रहना पड़ता है. मामले को लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक नयन कुमार से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया. संपर्क नहीं होने के कारण उनके पक्ष को नहीं रखा जा सका है.
शिक्षक के बिना स्कूल में पढ़ाई हो रही बाधित
जिले के सरकारी स्कूलों में लगातार शिक्षकों की कमी हो रही है. जिससे छात्रों को बेहतर शिक्षा का लाभ नहीं मिल पा रहा है. प्राथमिक व मध्य विद्यालय में पढ़ाने वाले कुछ पारा शिक्षकों की बहाली सहायक आचार्य में होने के बाद जिले के स्कूलों की स्थिति और खराब हो गई है. जानकारों की माने तो जब जिले में 161 सहायक आचार्य की बहाली हुई है तो तीन माह बीत जाने के बावजूद इन शिक्षकों को स्कूल किस कारण से नहीं दिया गया है. यादि विभाग इन शिक्षकों को विभिन्न स्कूलों में पदस्थापित कर दे, तो बच्चों को शिक्षा का लाभ जरूर मिलेगा.
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161 सहायक आचार्य को प्रति माह मिलता है 74 लाख 68 हजार रूपया
जानकारी के अनुसार जिले के सहायक आचार्य को पिछले 2 दिसंबर से जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यालय में हाजिरी बनाते हैं और चले जाते है. इन शिक्षकों को सरकार को प्रति माह 74 लाख 68 हजार रुपये का भुगतान करना होगा. यादि तीन माह की बात की जाय तो अब तक इन शिक्षकों को 2 करोड़ 24 लाख 64 हजार रुपये का वेतन भुगतान करना पड़ेगा.
