BOKARO : भोलू पासवान ने अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आने के बावजूद जनरल सीट से उनकी जीत को सामाजिक प्रतिनिधित्व और लोकतांत्रिक परिपक्वता का मजबूत प्रतीक माना जा रहा है. भोलू पासवान ने एक बार फिर साबित कर दिया कि लोकतंत्र में सबसे बड़ी ताकत जनता का भरोसा होता है. झारखंड के बोकारो जिले के महत्वपूर्ण शहर चास में हुए नगर निकाय चुनाव में उन्होंने जनरल सीट से मेयर पद पर जीत दर्ज कर न केवल अपनी लोकप्रियता को दोहराया, बल्कि एक नई राजनीतिक मिसाल भी कायम की. इस जीत के साथ ही चास नगर निगम की राजनीति में एक साफ संदेश गया है कि अब शहर की जनता जातीय समीकरणों से अधिक काम, नेतृत्व और भरोसे को महत्व दे रही है.
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रोमांचक मुकाबला और शानदार जीत
27 फरवरी को हुई मतगणना में चास नगर निगम के मेयर पद की लड़ाई बेहद दिलचस्प और उतार – चढ़ाव भरा रहा. शुरुआती राउंड में स्थिति बदलती रही, लेकिन जैसे-जैसे मतगणना आगे बढ़ी, भोलू पासवान ने ऐसी बढ़त बनाई कि अंत तक मुकाबला लगभग एकतरफा हो गया. अंतिम परिणाम में भोलू पासवान को 17,796 वोट मिले. भाजपा समर्थित उम्मीदवार अविनाश कुमार को 14,827 वोट के साथ दूसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा, जबकि कांग्रेस समर्थित जमील अख्तर 10,320 वोट के साथ तीसरे स्थान पर रहे.
शुरुआती दो राउंड में भोलू पासवान कांग्रेस समर्थित जमील अख्तर से पीछे चल रहे थे. लेकिन तीसरे राउंड से पासा पलटना शुरू हुआ. चौथे राउंड में 5,492 वोटों की भारी बढ़त के साथ उन्होंने मुकाबले को निर्णायक बना दिया और पांचवें राउंड के अंत तक जीत लगभग तय हो गई. देर रात करीब 1 बजे आधिकारिक घोषणा के साथ उनके समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया.
दिग्गजों की पूरी ताकत भी नहीं रोक सकी भोलू का विजय रथ
इस चुनाव को खास बनाने वाली बात यह भी रही कि भाजपा ने अपने समर्थित उम्मीदवार अविनाश कुमार को जिताने के लिए पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी थी. प्रचार के दौरान कई केंद्रीय मंत्री, पूर्व मंत्री, विधायक, पूर्व विधायक और प्रदेश स्तर के बड़े नेता मैदान में उतरे. बड़े-बड़े सम्मेलन, शक्ति प्रदर्शन और व्यापक प्रचार अभियान चलाया गया. लेकिन जनता के फैसले के सामने यह पूरा राजनीतिक तंत्र फीका पड़ गया. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि जमीनी नेता भोलू पासवान के सामने बड़े-बड़े दिग्गजों की रणनीति धरी की धरी रह गई.

लगातार दूसरी बार मेयर बने भोलू पासवान
भोलू पासवान चास नगर निगम के लगातार दूसरी बार मेयर बने हैं. उन्होंने पहली बार 2015 में मेयर पद जीता था और तब से लेकर अब तक शहर की राजनीति में एक मजबूत जनाधार कायम किया है. उनके पिछले कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि उनके नेतृत्व में चास नगर निगम ने स्वच्छता के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई. इसी काम और जनता के बीच उनकी सहज पहुंच ने उन्हें दोबारा जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
भोलू पासवान की राजनीति की सबसे खास बात यह रही है कि वे किसी बड़े राष्ट्रीय दल के औपचारिक समर्थन के बिना चुनाव लड़ते हैं. भाजपा और कांग्रेस जैसे दलों के समर्थित उम्मीदवारों के बीच भी उन्होंने हमेशा जमीनी संपर्क और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अपनी पहचान बनाई. चास के गलियों और मोहल्लों में उनकी सीधी पहुंच और नागरिक समस्याओं के समाधान की कोशिशों ने उन्हें जनता के बीच एक भरोसेमंद नेता के रूप में स्थापित किया.
जनरल सीट से SC नेता की जीत का बड़ा संदेश
भोलू पासवान की जीत इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, जबकि मेयर पद की सीट जनरल (ओपन) श्रेणी की थी. जनरल सीट का अर्थ है कि उस सीट पर किसी भी वर्ग का उम्मीदवार चुनाव लड़ सकता है. इसलिए यह जीत पूरी तरह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन सामाजिक दृष्टि से इसका संदेश बेहद मजबूत है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह परिणाम बताता है कि चास की जनता अब जातीय पहचान से ऊपर उठकर काम और नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है. भोलू पासवान की यह जीत केवल एक स्थानीय चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि लोकतंत्र की उस ताकत का उदाहरण है जिसमें अंतिम फैसला जनता करती है. चास की जनता ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजनीति में नाम से ज्यादा काम की कीमत होती है.
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जनरल सीट से एक SC नेता की जीत यह साबित करती है कि लोकतंत्र में अवसर सभी के लिए खुले हैं और जनता जब चाहती है तो बड़े-बड़े राजनीतिक समीकरण भी बदल देती है.
