RANCHI / JAMTARA : झारखंड के जामताड़ा जिला में शिक्षा और सामाजिक सौहार्द के मुद्दे पर राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि बच्चों के हाथों में गमछा, लाठी और तलवार देने के बजाय कलम और किताब दी जानी चाहिए. उनका कहना था कि शिक्षा ही वह ताकत है, जिसके जरिए समाज और आने वाली पीढ़ियों का भविष्य बदला जा सकता है.
डॉ. इरफान अंसारी ने कहा, एजुकेशन में हाफ पैंट की आवश्यकता नहीं है. इतना ही नही तलवार दी जाती है, गमछा बांटा जाता है- , बंद किया जाए ये सब. अंसारी जी आगे कहते है की जो लोग हाफ पैंट पहनकर डंडा लेकर शहर में घूमते हैं ( क्या आप RSS से परिचित है ) उनसे मैं कहना चाहता हूं कि इरफान अंसारी अपने बच्चों को न गमछा देगा, न तलवार और न डंडा. अगर कुछ देगा, तो कलम और किताब देगा, ताकि बच्चे शिक्षा में आगे आएं. तभी हम नाम कमा सकते हैं.
जहां शिक्षा का स्तर ऊंचा है, वहां जात-पात की राजनीति नहीं होनी चाहिए
डॉ. अंसारी ने अपने संबोधन में केरल, तमिलनाडु, बेंगलुरु और हैदराबाद का जिक्र करते हुए शिक्षा के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन जगहों पर शिक्षा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उनके मुताबिक, शिक्षित समाज में जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव की राजनीति के लिए जगह नहीं होनी चाहिए.

उन्होंने कहा की आप केरल चले जाइए, वहां साक्षरता का स्तर कितना ऊंचा है. तमिलनाडु जाइए, बेंगलुरु और हैदराबाद जाइए वहां जात-पात नहीं है. इसीलिए जहां पढ़े-लिखे लोग हैं और जहां शिक्षा का स्तर ऊंचा होगा, वहां भाजपा की सरकार नहीं आ सकती. यह कहते हुए उन्होंने भाजपा की राजनीति पर भी सवाल उठाए. हालांकि, भाजपा को लेकर उनका यह बयान एक राजनीतिक टिप्पणी है.
मैं हर समाज का सम्मान करता हूं
डॉ. इरफान अंसारी ने अपने संबोधन में सामाजिक एकता और धार्मिक स्वतंत्रता का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि वह सभी समुदायों का सम्मान करते हैं और विभिन्न धार्मिक त्योहारों में शामिल होते हैं. उन्होंने कहा, “मैं खुद डॉक्टर हूं. मैंने कभी जात-पात नहीं देखा. आप लोगों को लगता होगा कि इरफान साहब हर समाज का सम्मान करते हैं. मैं आदिवासियों का सम्मान करता हूं, दलितों का सम्मान करता हूं और सनातन का भी सम्मान करता हूं. मैं दुर्गा पूजा में भी जाता हूं. हम ईद मनाते हैं, बकरीद मनाते हैं, तो दूसरे त्योहार क्यों नहीं मनाएंगे? हमारे संविधान ने हमें यह अधिकार दिया है.

उन्होंने आगे कहा कि इंसान के शरीर से निकलने वाले खून की कोई जाति या धर्म नहीं होता. उन्होंने कहा, “अगर आप मेरा हाथ काटेंगे और खून निकलेगा, तो बताइए कि यह खून हिंदू का है, मुस्लिम का है या आदिवासी का? आप नहीं बता सकते. लेकिन अपने स्वार्थ के लिए जात-पात का जहर घोला जा रहा है.”
स्कूल बंद करने को लेकर भाजपा पर निशाना
अपने भाषण में डॉ. अंसारी ने झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास के कार्यकाल में स्कूलों को बंद किए जाने का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि उनके संबोधन में निशा पति और हंसदा जी ने इस विषय का उल्लेख किया था. डॉ. अंसारी ने दावा किया कि रघुवर दास के मुख्यमंत्री रहने के दौरान साढ़े सात हजार स्कूल बंद कर दिए गए थे. उन्होंने सवाल उठाया कि स्कूल बंद होने से सबसे ज्यादा नुकसान किन बच्चों को हुआ. उन्होंने कहा – मुसलमानों का स्कूल बंद हुआ, दलितों का स्कूल बंद हुआ और आदिवासियों का स्कूल बंद हुआ वही इरफ़ान अंसारी अपनी संबोधन में आगे कहते है अगर किसी समाज को कमजोर करना है, तो उसकी शिक्षा बंद कर दो. वह समाज अपने आप कमजोर हो जाएगा.
उन्होंने भाजपा नेताओं से अपनी सोच बदलने की अपील करते हुए कहा कि शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सोच भी बंद पड़े स्कूलों को खुलवाने और बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने की है.
सबनपुर और गोकुला के स्कूलों को प्लस टू बनाने की पहल
डॉ. अंसारी ने अपने संबोधन में जामताड़ा क्षेत्र में शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सबनपुर और गोकुला के हाई स्कूलों को प्लस टू स्तर तक विकसित करने की पहल की जा रही है. दोनों विद्यालयों में पांच-पांच डिजिटल कक्षाएं शुरू करने की योजना भी बताई गई. उन्होंने कहा कि केवल स्कूल की इमारतें बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीक का लाभ मिले.
इसे भी पढ़े : राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के स्वागत की तैयारी पूरी, झारखंड में 24-25 अक्टूबर को बैठक
उन्होंने शिक्षकों और विद्यालयों के प्रधानाचार्यों से अपील की कि वे बच्चों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दें. उन्होंने कहा, बिल्डिंग तो हम बना रहे हैं. आधुनिक तकनीक के साथ आपको इमारतें दे रहे हैं, लेकिन तकनीक का फायदा हमारे बच्चों को कैसे मिले, इस पर ज्यादा ध्यान दीजिए.
गरीबी किसी बच्चे की पढ़ाई में बाधा नहीं बनेगी
डॉ. अंसारी ने गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा को लेकर भी बड़ा वादा किया. उन्होंने अभिभावकों से कहा कि अगर उनका बच्चा पढ़ाई में अच्छा है और परिवार आर्थिक तंगी के कारण उसे आगे नहीं पढ़ा पा रहा है, तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं. उन्होंने कहा, जो बच्चे पढ़ने-लिखने में अच्छे हैं और उनके अभिभावक गरीब हैं, जो अपने बच्चों को नहीं पढ़ा सकते, वे अपने बच्चों को इरफान अंसारी को दे दीजिए. मैं वादा करता हूं, मैं पढ़ाऊंगा. उनके इस बयान का मुख्य संदेश यह था कि आर्थिक अभाव के कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा नहीं रुकनी चाहिए.
भाजपा नेताओं के बच्चे विदेश में पढ़ते हैं, हमारे बच्चे क्यों नहीं?
अपने भाषण के अंतिम हिस्से में डॉ. अंसारी ने भाजपा नेताओं के बच्चों की शिक्षा और गरीब परिवारों के बच्चों के अवसरों के बीच अंतर का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि भाजपा के कई नेताओं के बच्चे लंदन, ऑक्सफोर्ड और अमेरिका जैसे स्थानों पर पढ़ते हैं, जबकि गरीब परिवारों के बच्चों को स्थानीय स्तर पर ही पढ़ाई के अवसरों के लिए संघर्ष करना पड़ता है.

उन्होंने कहा, मैं वैसे लोगों से कहना चाहता हूं कि मेरा सपना है-अगर भाजपा के नेता का बेटा विदेश में पढ़ेगा, तो जामताड़ा का बच्चा, आदिवासी बच्चा, मुस्लिम बच्चा और दलित बच्चा भी ऑक्सफोर्ड में पढ़ेगा. हम वादा करते हैं” डॉ. अंसारी ने कहा कि उनका लक्ष्य जामताड़ा के बच्चों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है, ताकि वे भी देश और विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ सकें.
जामताड़ा में उच्च शिक्षा के विस्तार पर जोर
डॉ. अंसारी ने अपने संबोधन में क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विस्तार से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया. इनमें नारायणपुर में डिग्री कॉलेज, बगरुडीह में महिला कॉलेज और जामताड़ा में मेडिकल कॉलेज के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज स्थापित करने का लक्ष्य शामिल है. इन पहलों का उद्देश्य क्षेत्र के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर उपलब्ध कराना बताया गया. हालांकि, इन योजनाओं की मौजूदा स्थिति, निर्माण की समयसीमा और क्रियान्वयन से जुड़ी विस्तृत जानकारी अलग से स्पष्ट होना जरूरी है.
डॉ. अंसारी के पूरे संबोधन में शिक्षा, सामाजिक समानता और गरीब बच्चों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर रहा. उन्होंने अपने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि समाज की तरक्की के लिए बच्चों के हाथों में हथियारों और नफरत की जगह कलम और किताब होनी चाहिए.
इसे भी पढ़े : दीपावली से पहले फ्लाइट टिकटों में लगी आग, मुंबई से रांची का किराया 22 हजार के पार
