RANCHI/BOKARO : झारखंड के बोकारो स्टील प्लांट (BSL) में रोजगार की मांग को लेकर विस्थापितों का आंदोलन लगातार आठवें दिन, शनिवार 17 अक्टूबर को भी जारी है. विस्थापित अप्रेंटिस संघ ने आज प्लांट के सभी गेट बंद करने का आह्वान किया है. इससे पहले शुक्रवार को आंदोलनकारियों ने मुख्य गेट को छोड़कर अन्य प्रवेश द्वारों को जाम कर दिया था, जिससे कर्मचारियों की आवाजाही और मालवाहक वाहनों के परिचालन पर असर पड़ा. दूसरी ओर, जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि किसी भी परिस्थिति में प्लांट के सभी गेट बंद नहीं होने दिए जाएंगे. इस बीच डुमरी विधायक जयराम महतो भी आंदोलन को समर्थन देने धरना स्थल पहुंचे हैं.
चार घंटे चली प्रशासन की बैठक, प्लांट की आवाजाही रोकने पर सख्त रुख
विस्थापितों के आंदोलन को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है. शुक्रवार रात उपायुक्त अजय नाथ झा की अध्यक्षता में उनके कार्यालय में उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसमें एसपी नाथू सिंह मीणा, सीआईएसएफ के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी शामिल हुए. करीब चार घंटे तक चली बैठक रात 11 बजे समाप्त हुई.
बैठक में आंदोलन की मौजूदा स्थिति, प्लांट के परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा की गई. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि संयंत्र में पूरी तरह आवाजाही ठप करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. प्लांट के तकनीकी कामकाज के लिए जरूरी सामान और अन्य आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही जारी रखी जाएगी, ताकि उत्पादन और संचालन पर गंभीर असर न पड़े. एक अधिकारी के मुताबिक, प्रशासन पिछले साल 3 और 4 अप्रैल को उत्पन्न हुई अशांति जैसी स्थिति दोबारा नहीं बनने देना चाहता. इसी वजह से सभी प्रवेश द्वारों को पूरी तरह बंद करने की कोशिशों पर सख्त रुख अपनाया गया है.
नौकरी की मांग पर अड़े विस्थापित, कई गेटों पर प्रदर्शन
विस्थापित अप्रेंटिस संघ और अन्य विस्थापित संगठनों का मुख्य मुद्दा रोजगार है. आंदोलनकारी विस्थापित परिवारों के प्रशिक्षित युवाओं को नियोजन देने, अप्रेंटिस प्रशिक्षुओं की बहाली, नियमित नियुक्ति और स्पष्ट रोजगार नीति लागू करने की मांग कर रहे हैं. इसके अलावा, विस्थापितों के लिए क्लास-IV की नौकरियों में पहले लागू आरक्षण व्यवस्था बहाल करने की मांग भी उठाई गई है.
प्रदर्शनकारियों ने गुरुवार को स्टील गेट संख्या-9 और दुग्गल गेट संख्या-10 को जाम किया था. शुक्रवार को आंदोलन का दायरा बढ़ाते हुए गेट संख्या-3, 4 और 5 के साथ सीजेड गेट और मनसा सिंह गेट पर भी प्रदर्शन किया गया. इससे कर्मचारियों के आवागमन के साथ कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार इस्पात की ढुलाई प्रभावित होने की खबरें सामने आईं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अक्टूबर से टू टैंक गार्डन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल भी चल रही है. प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि पिछले 24 घंटों में तबीयत बिगड़ने के कारण एक दर्जन से अधिक लोगों, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं, को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है.
आंदोलन को मिला जयराम महतो का समर्थन
बीएसएल में जारी आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है. डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JKLM) के प्रमुख जयराम महतो शुक्रवार शाम धरना स्थल पहुंचे और आंदोलनकारियों को समर्थन दिया. जयराम महतो ने विस्थापितों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि झारखंड के निर्माण के लिए यहां के लोगों ने अपनी जमीन दी, लेकिन उन्हें उनके अधिकारों के अनुरूप लाभ नहीं मिला. उन्होंने विस्थापितों की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाने की बात कही. इससे पहले बोकारो की विधायक श्वेता सिंह भी आंदोलनकारियों के समर्थन में धरना स्थल पहुंची थीं. वहीं, प्रशासन की ओर से बीएसएल प्रबंधन को बातचीत के जरिए समाधान निकालने की पहल करने को कहा गया है.
20 हजार करोड़ की विस्तारीकरण परियोजना पर भी चिंता
विस्थापितों के आंदोलन के बीच बीएसएल की करीब 20 हजार करोड़ रुपये की ब्राउनफील्ड विस्तारीकरण परियोजना भी चर्चा में है. रिपोर्टों के मुताबिक, परियोजना का काम शुरू हो चुका है. पिछले साल 3 और 4 अप्रैल को हुई अशांति के कारण इस परियोजना को स्थगित करना पड़ा था. अब मौजूदा आंदोलन से औद्योगिक गतिविधियों और परियोजना की गति पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
बीएसएल की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, 950 विस्थापित अप्रेंटिसों की सूची में शामिल लोगों में से 3 अक्टूबर तक 204 को संविदा आधार पर रोजगार दिया गया था. यह आंकड़ा टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बीएसएल के हवाले से प्रकाशित हुआ है. हालांकि, आंदोलनकारियों की मांग नियमित नियुक्ति और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति की है.
फिलहाल, एक तरफ विस्थापित अप्रेंटिस संघ अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ प्रशासन प्लांट की आवाजाही और तकनीकी संचालन सामान्य बनाए रखने पर अड़ा है. ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या बीएसएल प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या आंदोलन और तेज होता है.
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