रांची : आदिवासी जनपरिषद ने कहा है कि आदिवासी समुदाय के लिए अलग धर्म कॉलम की मांग को और तेज किया जाएगा. संगठन का कहना है कि झारखंड गठन के बाद आदिवासियों की जमीन पर अतिक्रमण और कथित अवैध कब्जे की घटनाएं बढ़ी हैं. ऐसे में जमीन की सुरक्षा और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए राज्यभर में अभियान चलाया जाएगा.

शनिवार को रांची स्थित केंद्रीय धुमकुड़िया भवन में आयोजित आदिवासी जनपरिषद की बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों ने इन मुद्दों पर चर्चा की. बैठक में संगठन की आगामी रणनीति और विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर प्रस्ताव भी पारित किए गए.
इसे भी पढे : हजारीबाग में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत, नर्सिंग होम पर लापरवाही का आरोप
जमीन की सुरक्षा के लिए बनेगी कोर कमेटी
बैठक को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आदिवासी समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है. उनका आरोप था कि विभिन्न क्षेत्रों में भू-माफिया आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं.
संगठन का कहना है कि ऐसी घटनाओं पर नजर रखने और प्रभावित लोगों को कानूनी तथा सामाजिक स्तर पर सहयोग देने के लिए एक कोर कमेटी का गठन किया जाएगा. यह समिति जमीन से जुड़े मामलों की निगरानी करेगी और आवश्यक होने पर संबंधित स्तर पर हस्तक्षेप भी करेगी.
इसके साथ ही गांव-गांव में जनजागरूकता अभियान चलाने का भी निर्णय लिया गया, ताकि लोगों को उनके संवैधानिक और कानूनी अधिकारों की जानकारी दी जा सके तथा अधिक से अधिक लोगों को संगठन से जोड़ा जा सके.
अलग धर्म कॉलम की मांग होगी और तेज
आदिवासी जनपरिषद के अध्यक्ष प्रेम शाही मुंडा ने कहा कि जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग धर्म कॉलम की मांग लंबे समय से उठाई जाती रही है. उन्होंने कहा कि संगठन इस मुद्दे को आगे भी प्रमुखता से उठाएगा और इसके लिए व्यापक जनसमर्थन जुटाने का प्रयास करेगा. उनके अनुसार, यह केवल धार्मिक पहचान का नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और पारंपरिक पहचान से जुड़ा विषय है.
विश्व आदिवासी दिवस मनाने का निर्णय
बैठक में आगामी 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस पूरे उत्साह और व्यापक जनभागीदारी के साथ मनाने का निर्णय लिया गया। संगठन ने कहा कि इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें आदिवासी संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी.
नगड़ी में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना का भी विरोध
बैठक के दौरान रांची के नगड़ी क्षेत्र में प्रस्तावित रिम्स-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण का भी विरोध किया गया. संगठन के प्रतिनिधियों का कहना था कि यदि विकास परियोजनाओं के लिए भूमि अधिग्रहित की जाती है, तो प्रभावित परिवारों की सहमति, उनके अधिकारों और पुनर्वास से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि आदिवासी हितों की अनदेखी कर किसी भी परियोजना को आगे नहीं बढ़ाया जाना चाहिए.
कई पदाधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
बैठक में सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश मुंडा, रांची जिला महानगर समिति की अध्यक्ष शीला उरांव, केंद्रीय सचिव विष्णु मुंडा, पवन कुमार आदिवासी, रांची जिला अध्यक्ष सुनील होरो सहित संगठन के कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे. बैठक में पारित प्रस्तावों के साथ आदिवासी जनपरिषद ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में संगठन जमीन की सुरक्षा, अलग धर्म कॉलम की मांग और आदिवासी अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर राज्यभर में जनसंपर्क और जनजागरूकता अभियान चलाएगा.
इसे भी पढे : जंतर-मंतर पर NTA और क्लस्टर सिस्टम के खिलाफ उठी आवाज, AISA झारखंड ने किया समर्थन
