Vaibhav
PAKUR : जिले में इन दिनों पत्थर चिप्स के अवैध परिवहन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. मुफस्सिल थाना और नगर थाना क्षेत्र से प्रतिदिन बड़ी संख्या में ओवरलोड ट्रकों के गुजरने की खबरें सामने आ रही हैं. हैरानी की बात यह है कि काशीला चेक पोस्ट, भगत सिंह चेक पोस्ट और चांदपुर चेक पोस्ट जैसी तीन-तीन जांच चौकियों तथा दो थानों की मौजूदगी के बावजूद कई ट्रक बिना वैध माइनिंग चालान के निकलते देखे जा रहे हैं.
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि प्रतिदिन 100 से 200 चिप्स लदे ट्रक पाकुड़ से पश्चिम बंगाल की ओर रवाना हो रहे हैं. आरोप यह भी है कि प्रत्येक ट्रक से कथित तौर पर 8,000 रुपये की “सेटिंग” तय है, जिसके बाद उन्हें बिना रोक-टोक आगे बढ़ने दिया जाता है. यदि इन दावों में सच्चाई है तो यह न केवल राजस्व की भारी क्षति का मामला है, बल्कि कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है.

कौन है मोफिज जो कराता है मैनेज?
सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर यह पूरा नेटवर्क किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है? इस पूरे प्रकरण में “मोफिज” नाम सामने आ रहा है. स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि अवैध परिवहन की इस कथित व्यवस्था में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है. सवाल यह है कि आखिर मोफिज कौन है? उसकी पहुंच इतनी प्रभावशाली कैसे है कि तीन चेक पोस्ट और दो थाना क्षेत्रों के बीच से ट्रक नियमित रूप से पार हो रहे हैं? क्या वह अकेला काम कर रहा है, या उसके पीछे कोई बड़ा संरक्षण तंत्र सक्रिय है?
पूरे मामले की परत तब खुलनी शुरू हुई जब Loktantra 19 की टीम ने पड़ताल के लिए एक अंडरकवर प्रयास किया. हमारे संवाददाता ने स्वयं को गाड़ी मालिक बताते हुए व्हाट्सएप कॉल के माध्यम से कथित तौर पर मोफिज से संपर्क साधा. बातचीत में संवाददाता ने पूछा कि “हमारे पास दो गाड़ियां हैं, उन्हें चलवाना है—कितना पैसा लगेगा?” इस पर जो जवाब सामने आया, उसने कई अहम संकेत दिए.

8000 में पासिंग का खेल, हर चेक पोस्ट पर सेटिंग
लोकतंत्र 19 टीम के हाथ इस बातचीत से जुड़े पुख्ता सबूत लगे हैं. प्राथमिक स्तर पर उपलब्ध ऑडियो और कॉल रिकॉर्डिंग से यह संकेत मिलता है कि कथित तौर पर 8,000 रुपये प्रति ट्रक की दर पर ‘व्यवस्था’ सुनिश्चित की जाती है, जिसके बाद ट्रकों को तीन-तीन चेक पोस्ट और थाना क्षेत्रों से पार कराया जाता है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि के लिए प्रशासनिक जांच आवश्यक है, लेकिन सामने आए तथ्यों ने पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
यदि यह सच है कि बिना वैध माइनिंग चालान के ट्रक लगातार गुजर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर राज्य के खनन नियमों और राजस्व कानूनों का उल्लंघन है. इससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है. साथ ही, ओवरलोड ट्रकों से सड़कें भी क्षतिग्रस्त होती हैं, जिससे आम जनता को दुर्घटनाओं और यातायात समस्याओं का सामना करना पड़ता है.
पाकुड़ जिले में पत्थर उद्योग एक बड़ा आर्थिक आधार है. वैध खनन और परिवहन से हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है. लेकिन यदि अवैध गतिविधियां बढ़ती हैं, तो इसका सीधा असर ईमानदार व्यवसायियों पर पड़ता है. वे प्रतिस्पर्धा में पिछड़ जाते हैं, जबकि अवैध नेटवर्क लाभ कमाते हैं. यह स्थिति लंबे समय में पूरे उद्योग की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है.

कहां सोई है पाकुड़ जिला प्रसाशन
अब प्रश्न यह है कि प्रशासन की भूमिका क्या है? तीन चेक पोस्ट और दो थानों की मौजूदगी के बावजूद यदि सैकड़ों ट्रक रोजाना गुजर रहे हैं, तो क्या यह महज चूक है या फिर किसी स्तर पर मिलीभगत की आशंका है? क्या संबंधित विभागों—खनन, परिवहन और पुलिस—की संयुक्त जांच होगी? क्या उच्च स्तरीय टीम बनाकर पूरे मामले की निष्पक्ष पड़ताल की जाएगी?
Loktantra 19 इस मामले में अपनी खोजी रिपोर्टिंग जारी रखे हुए है. टीम के पास मौजूद साक्ष्यों की विधिवत जांच और सत्यापन की प्रक्रिया जारी है. जल्द ही वह पूरी बातचीत और उससे जुड़े तथ्यों का खुलासा सार्वजनिक किया जाएगा, ताकि जनता खुद सुन सके कि किस तरह कथित तौर पर 8,000 रुपये में ट्रकों को तीन-तीन थाना क्षेत्र पार कराने की बात कही जा रही है.
पाकुड़ की जनता जवाब चाहती है. लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या कानून सबके लिए बराबर है, या फिर कुछ नाम और चेहरे ऐसे हैं जिनके लिए नियम बदल जाते हैं. यदि सब कुछ वैध है, तो प्रशासन को पारदर्शी तरीके से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. और यदि कहीं गड़बड़ी है, तो दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए.
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यह सिर्फ अवैध परिवहन का मामला नहीं है, बल्कि शासन की साख, कानून की विश्वसनीयता और जनता के भरोसे का प्रश्न है. Loktantra 19 अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए इस मुद्दे को उठाता रहेगा और सच को सामने लाने की कोशिश जारी रखेगा.
